Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

संसद फिर धुंआ-धुंआ, सो हाउ डू यू फील ??

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 13, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
संसद फिर धुंआ-धुंआ, सो हाउ डू यू फील ??
संसद फिर धुंआ-धुंआ, सो हाउ डू यू फील ??

95 साल पहले, सेंट्रल असेम्बली, वही भवन जो हमारा पुराना संसद भवन कहलाने लगा है, वहां भगतसिंह ने बम फेंका था.

फुस्सी बम … याने धमाका हुआ, मगर कोई घायल नहीं हुआ, कोई मरा नहीं. भगतसिंह ने बम किसी को मारने के लिए नहीं बनाया था. उसमें छर्रे नहीं थे, जो विस्फोट के बाद गोली की तरह चारों ओर फैल जाते, शरीरों में घुस जाते, जान ले लेते.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

सिर्फ आवाज करने वाला बम था. फिर भी पूरी सावधानी से, खाली बेंचो पर फेंका कि गलती से भी कोई घायल न हो. भगत ने जिस असेम्बली में बम फेंका, उसमे विदेशी नहीं, भारतीय बैठे थे.

आसंदी पर विट्ठलभाई पटेल थे. सरदार पटेल के बड़े भाई. सदस्य भी सारे भारतीय थे. वही लोग, जो इस अशक्त किस्म की संसद में चुनकर आये थे.

कांग्रेस नहीं थी, क्योंकि गांधी ने ऐसी असेम्बली, जिसके पास असल पावर न हो, चुनाव लड़ने से इनकार किया था. मगर, कई कांग्रेसी स्वराज दल बनाकर चुनाव लड़े.

जीते- मोतीलाल नेहरू, चितरंजन दास, विट्ठलभाई, केलकर वगैरह. जिन्ना भी थे, और पंजाब, बंगाल, मद्रास सहित कई जगहों से दीगर भारतीय भी.

तो भगत का बम अगर किसी को आहत करता, तो भारतीय लीडर्स को ही करता.

आज भी जिसने फुस्सी फेंका, वह अपनी बात देश तक पहुंचाना चाहता था. हत्या, मारना, हिंसा उसका उद्देश्य नहीं था. अब सवाल यह है कि उनका यह कृत्य आपको कितना उद्वेलित करता है ??

क्या आपको लगा कि कोई बड़ा ही क्रांतिकारी, अनोखा, हिम्मतवाला, जनता को उत्साह से भर देने वाला काम हुआ है ?? क्या इससे सरकार के इकबाल को कोई हानि हुई ? प्रेरणा मिली आपको ??

अगर आप इनसे जुड़ाव महसूस नहीं करते, इनकी हिमाकत से आपको सहानुभूति महसूस नहीं होती, आपको कुछ बेवकूफों का बेमतलब और मूर्खतापूर्ण कृत्य लगता है…तो भला 95 साल पहले भारत की जनता भगतसिंह द्वारा बम फेंकने की घटना से बहुत प्रेरित हुई होगी ? बड़ा कनेक्ट फील किया होगा ?? क्या वो आंदोलित हो गई होगी ??

सोचिये ! अगर का यह कृत्य मोदी सरकार को उसके आलोच्य नीतियों से डरा या डिगा नहीं सकता तो उस दिन ब्रिटिश सरकार भला इन बम धमाकों से कैसे हिल जाती ?? डर जाती, कांप जाती ??

अक्सर सवाल होता है कि खुदीराम, बिस्मिल, अशफाक के कार्यों का सही मूल्यांकन नहीं हुआ. उन्हें वैसा महत्व नहीं मिला, जैसा मिलना था.

पर जरा सोचिए कि सच में उनके कामों में कितनी डेप्थ थी ?? कुछ अफसरों को मार देना, डकैती डाल देना, बम-वम फेंककर, अंग्रेजी साम्राज्य को कितना डरा दिया गया ?? एब्सॉल्युटली जीरो.

उल्टे, इन्हें मिली सजाओं ने आम नागरिक के दिल मे भय का संचार किया होगा. उनका अन्तस् कमजोर किया होगा. उन्हें लग गया होगा कि ब्रिटिश के विरुद्ध कोई अटेंप्ट, जानलेवा है.

और यहीं गांधी का महत्व है. यहीं चरखे का महत्व है. तकली चलाना, नमक बनाना ऐसा क्राइम नहीं, जरायम नहीं, जुर्म नहीं जिसे करने से आपका अन्तस् कांपे.

नमक बनाकर जेल जाने और बम बंदूक से किसी को मारकर जेल जाने में अंतर है. पहला विकल्प निडर बनाता है, कोंसिक्वेंस का डर नहीं होता.

गांधी ने अपनी तकली से लाखों भारतीयों को निडर बनाकर ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध जनसमुद्र खड़ा कर दिया. यही हिम्मत, लोगों को जोड़ना, आपके भीतर का डर हटाना, गांधी की उपलब्धि है. और यही उस दौर में गांधी की ऊंचाई है. उनके आसपास कोई नहीं. आई रीपीट…कोई नहीं.

मौजूदा दौर में भी गांधी ही चाहिए, भगत नहीं. सामूहिक चेतना को जगाने वाला चाहिए, निजी हमले करने वाले नहीं. नक्सल हों, कश्मीरी हों, पंजाबी हों, उत्तर पूर्व के आतंकी कह लें, या क्रांतिकारी… जान लेने वाले हों, या फुस्सी बम फोड़ने वाले, ये 140 करोड़ जनता की सोच को उद्वेलित नहीं कर सकते.

मुझे सदन में कूदने वाले आधुनिक भगत सिंहों की मूर्खता पर दया आती है, पर इनसे कोई सहानुभूति नहीं. व्हाटएवर दे डिड, आई डोंट फील गुड. बट, हाउ डू यू फील ??

  • मनीष सिंह

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

नोम चोम्स्की के लिए अमेरिका

Next Post

13 दिसम्बर, 2023 को भगत सिंह लौट आये ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

13 दिसम्बर, 2023 को भगत सिंह लौट आये ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

भारत में जाति की गणना क्यों होनी चाहिए ? ज़मीन के स्वामित्व का भी जाति के अनुसार सर्वे हो

August 24, 2021

देश की मूर्ख अवाम धर्म की अफीम चाटकर सो रही है

November 16, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.