Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

621 अरब डॉलर के विदेशी कर्ज के नीचे दबी गुलामी का आनंद लेने वाली जनता

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 7, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
621 अरब डॉलर के विदेशी कर्ज के नीचे दबी गुलामी का आनंद लेने वाली जनता
621 अरब डॉलर के विदेशी कर्ज के नीचे दबी गुलामी का आनंद लेने वाली जनता
राम अयोध्या सिंह

621 अरब डॉलर के विदेशी कर्ज के नीचे दबा भारत भी अपने को विश्वगुरु और विश्वशक्ति बनने का ख्वाब देखे, यह आत्म प्रवंचना और पागलपन छोड़ और कुछ नहीं है. इससे भी बड़ा आश्चर्य तो यह है कि यहां का प्रधानमंत्री अपने को अमेरिका के राष्ट्रपति के बराबर समझता है और अपने शानो-शौकत के लिए पैसे पानी की तरह बहा रहा है. एक साल के अन्तर्गत भारत को 267 अरब डॉलर हर हाल में चुकता भी करना है. कहीं इसीलिए तो नहीं भारतीयों को भीख मांगने के लिए मानसिक रूप से तैयार किया जा रहा है ?

ऐसी स्थिति में भारत के पास दो ही विकल्प शेष हैं – या तो वह दिवालिया होकर हमेशा के लिए अमेरिका का गुलाम बन जाए, या फिर जनाक्रोश की आग में तपकर एक नए भारत की शुरुआत हो. संभावना का प्रतिशत फिफ्टी-फिफ्टी ही है. भारत का दुर्भाग्य अभी लंबे समय तक इसका पीछा नहीं छोड़ेगा. गुलामी का आनंद लेने वाली जनता का यही हस्र होता है.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

किसी भी देश में एक लोकतांत्रिक सरकार की उपस्थिति के लिए संसद में जनता द्वारा निर्वाचित सदस्यों का बहुमत ही आवश्यक नहीं होता, अपितु यह भी आवश्यक होता है कि वह सरकार संवैधानिक प्रावधानों, नियमों और परिनियमों के साथ ही लोकतांत्रिक मूल्यों, आदर्शों, सिद्धांतों और परंपराओं के अनुपालन के लिए भी प्रतिबद्ध हो.

इनमें सबसे महत्वपूर्ण है अभिव्यक्ति और समाचारपत्रों की स्वतंत्रता की अभिरक्षा. भारत के केन्द्र में स्थापित मोदी सरकार अपने शुरूआती कार्यकाल से ही संविधान और लोकतंत्र को ठेंगा दिखाने का काम करती आ रही है. एक-एक कर संविधान और संवैधानिक संस्थाओं और प्रावधानों की उपेक्षा करने के साथ ही उनकी मर्यादा को भी तार-तार किया जाता रहा है.

लोकतंत्र को अपने प्रतिकूल मानते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों, आदर्शों, सिद्धांतों और परंपराओं को रद्दी की टोकरी में डाल दिया जाता रहा. विरोध के स्वर को दबाने से लेकर अपने तमाम विरोधियों के अस्तित्व को नकारने एवं उसे हमेशा के लिए मटियामेट करने के सारे हथकंडे अपनाए जाते रहे हैं.

सरकार के खिलाफ आवाज उठाने, उसकी आलोचना करने, हड़ताल करने, सरकार की जनविरोधी नीतियों, निर्णयों और कार्ययोजनाओं के खिलाफ जनांदोलन एवं जनसंघर्ष करने वाले तथा सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में डाल देने के साथ ही उनकी हत्या करना भी सरकार की नीतियों में शामिल है.

ताजातरीन मामला मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी का है, जिसे बिना किसी वाजिब आधार के गिरफ्तार कर लिया गया है. ऐसे मामले हजारों की संख्या में हैं, जो वर्तमान सरकार की अलोकतांत्रिक चरित्र को उद्घाटित करने के लिए पर्याप्त है. क्या नागरिक अधिकारों का दमन और शमन कर कोई सरकार अपने को लोकतांत्रिक कह सकती है ? अगर कोई भी सरकार ऐसा करती है तो यह परले दरजे का फासीवादी रवैया है और सरकार के फासीवादी चरित्र को उजागर करती है.

महज संसद में बहुमत के आधार पर वह अपने को लोकतांत्रिक साबित नहीं कर सकती. सरकार की चाल, चरित्र और चेहरा भी लोकतांत्रिक होना चाहिए, और साथ ही उसे लोकतांत्रिक मूल्यों, आदर्शों, सिद्धांतों और परंपराओं के अनुपालन के लिए प्रतिबद्ध और कटिबद्ध भी होना चाहिए अन्यथा लोकतंत्र का कोई अर्थ नहीं है.

भारत सरकार के इस दोहरे मापदंड और अलोकतांत्रिक रवैये का यूरोपीय संघ और खासकर जर्मनी ने खुलकर आलोचना की है. इसके पहले भी अमेरिकी समाचारपत्रों के समूह ने भारत में पत्रकारों पर लगातार हो रहे हमलों तथा अभिव्यक्ति के अधिकार के खिलाफ सरकारी रवैये पर तीखी नाराजगी जाहिर की थी. दलितों, अल्पसंख्यकों, आदिवासियों तथा विरोधियों के खिलाफ लगातार आक्रामक रवैया अपनाकर सरकार अपने अलोकतांत्रिक चरित्र को ही साबित कर रही है. सचमुच यह भारत के लिए एक शर्मनाक स्थिति है.

एक तरफ तो सरकार भारत को दुनिया का सबसे बड़ा और अच्छा लोकतांत्रिक देश घोषित करती है और दूसरी तरफ खुद ही लोकतंत्र और लोकतांत्रिक प्रक्रिया, आदर्शों, मूल्यों और परंपराओं का हनन करती जा रही है. यह सरकार के दोहरे चरित्र और दोहरे मानदंड को ही अभिव्यक्त करती है.

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

आस्था आहत होने लगी है, इसका मतलब है आफत आने लगी है

Next Post

सत्ता का इकोसिस्टम : मोहम्मद जुबैर गिरफ्तार है, रोहित रंजन फरार है

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

सत्ता का इकोसिस्टम : मोहम्मद जुबैर गिरफ्तार है, रोहित रंजन फरार है

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

आतंकवादी : आज साइकिल, कल हाथ

February 22, 2022

‘राष्‍ट्र के नाम सम्‍बोधन’ में फिर से प्रचारमन्‍त्री के झूठों की बौछार और सच्‍चाइयां

April 14, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.