Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

सेना में रहने वाले लोग अक्सर मानसिक रूप से विकृत होते हैं

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 17, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

जब मैंने यह लिखा था कि सेना में रहने वाले लोग अक्सर मानसिक रूप से विकृत हो जाते है क्योंकि सेना का काम मूल मानव स्वभाव के विरूद्ध है तो बहुत से साथियों ने सवाल उठाए थे कि कैसे ? यह उसी का उत्तर देने का प्रयास है. नोट करें कि ये इस या उस की सेना के बारे में नहीं है. ये सेना की अवधारणा की बात हो रही है. कुछ सामान्य से सवालों के उत्तर दीजिए. वैसे तो 13 हैं, लेकिन यहां सिर्फ तीन पूछे जा रहे हैं. सबसे पहले और स्वाभाविक रूप से जो उत्तर मन में आए, उसको ठीक मानना.

  1. एक आदमी एक ऐसे व्यक्ति को जिसे वह जानता नहीं, अपना दोस्त मानता है, दुश्मन मानता है या तटस्थ रहता है ?
  2. एक सामान्य व्यक्ति आमतौर पर परिवार और दोस्त बंधुओं के साथ रहना चाहता है या दूर ?
  3. जब आम आदमी को कोई व्यक्ति घायल, पीड़ित या दुःख की अवस्था में मिलता है तो क्या उसकी मदद करने को जी करता है ?

आप में से 95 प्रतिशत के उत्तर स्वाभाविक रूप से क्रमश: होंगे – तटस्थ, साथ रहना, मदद करना. तीसरे मामले में आप में से बहुसंख्यक मदद करते भी होंगे या कम से कम मदद करने की कोशिश तो अवश्य ही करते होंगे.

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

अब सेना में देखिए, उस आदमी को आपका शत्रु बताया जाता है जिसे कभी आपने नहीं देखा, ना बात की और ना ही जिसे आप जानते हैं. घर परिवार से दूर रखा जाता है, सेक्स इच्छाओं का दमन किया जाता है. और तीसरे सवाल के संदर्भ में अगर आपको कहा जाए कि आप उसकी पीड़ा, वेदना, यंत्रणा को और बढ़ाओ, उसे मार डालो, तड़पा तड़पा कर, शायद आप में से 100 में से 99 आदमी ऐसा करने से इंकार कर दें.

इसीलिए सेना में शराब पिलाई जाती है, इसीलिए धर्मगुरु रखे जाते हैं, इसीलिए राष्ट्रवाद का नशा कराया जाता है, इसलिए मेडल दिए जाते हैं, इसीलिए स्मारक बनाए जाते हैं, इसीलिए आदेश आदेश हैं की घुट्टी पिलाई जाती है, भयंकर डर दिखाया जाता है. इतनी दिमागी धुलाई और इतनी भयंकर बेरोजगारी के बावजूद विश्व की सभी बड़ी सेनाओं में अधिकारियों के हज़ारों पद खाली हैं और बहुत से देशों में अनिवार्य और बाध्यकारी सैनिक सेवा लागू है. जबकि मानव के 3 लाख साल के इतिहास में सेनाएं अधिकतम 5000 वर्ष पुरानी है. यानी, सिर्फ 1.33 प्रतिशत समय और आज भी दुनिया के लगभग 50 देशों के पास या तो सेना नहीं है या फिर ना के बराबर.

  • महेन्द्र सिंह

Read Also –

सत्ता के बलि का बकरा बनते सेना-पुलिस
सेना और लोकतंत्र
सेना अमीरों के मुनाफे के लिए युद्ध लड़ती है
सेना, अर्ध-सेना एवं पुलिस, काॅरपोरेट घरानों का संगठित अपराधी और हत्यारों का गिरोह मात्र है
सेना, अर्द्धसेना और पुलिस जवानों के नाम माओवादियों की अपील
सेना, अर्ध-सैनिक बल और पुलिस जवानों से माओवादियों का एक सवाल

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

आखिर 5जी तकनीक किसे चाहिए ?

Next Post

अडानी के पास इतना धन आया कहां से कि वह आज दुनिया का दो नंबरी अमीर बन गया ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

अडानी के पास इतना धन आया कहां से कि वह आज दुनिया का दो नंबरी अमीर बन गया ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

आगे बढ़ने के लिए यही एकमात्र तरीका रह गया है देश में ?

June 22, 2022

मैंने इस देश के लोकतंत्र का जो भयानक चेहरा देखा है उससे मुझे अब किसी पर भरोसा नहीं रहा – हिमांशु कुमार

April 20, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.