Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

चीन-ताइवान का संभावित सैन्य संघर्ष और भारत को सबक

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 25, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
चीन-ताइवान का संभावित सैन्य संघर्ष और भारत को सबक
चीन-ताइवान का संभावित सैन्य संघर्ष और भारत को सबक

संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त देशों की सूची में ताइवान नाम का कोई देश नहीं है. हालांकि कुछ छोटे देशों ने ताइवान को एक देश की मान्यता दी है लेकिन संयुक्त राष्ट्र संघ में ताइवान देश नहीं है. ताइवान समुद्र के बीच एक टापू है. यह तकरीबन 37 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में है. यहां की जनसंख्या डेढ़ करोड़ से भी कम है. इसे यूं समझ लीजिए कि यह भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का आधा हिस्से जितना है.

भारत का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 33 लाख वर्ग किलोमीटर है, जबकि चीन का भौगोलिक क्षेत्रफल 96 लाख वर्ग किलोमीटर से भी अधिक है, यानी, तीन भारत के बराबर एक अकेला चीन है. वर्तमान में जहां भारत की जनसंख्या 1 अरब 44 करोड़ तक पहुंच गई है, वहीं ‘चीनी जनसंख्या नियंत्रण कानून’ ने जनसंख्या के मामले में अपने को भारत से कम कर लिया है, इस समय चीन की कुल जनसंख्या 1 अरब 42 करोड़ है.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

बेल्जियम एक छोटा सा देश है, जिसकी राजधानी ब्रुसेल्स है. यह भौगौलिक दृष्टिकोण से ताइवान से भी छोटा है लेकिन संयुक्त राष्ट्र में बेल्जियम एक देश के तौर पर नामित है. 32 देशों के नाटो सैन्य संगठन का मुख्यालय ब्रुसेल्स में ही है. अब मामला ये है कि बीते गुरुवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वायुसेना प्रमुख को तलब कर ताइवान के ऊपर चार दर्जन फाइटर जेट उड़ाने के आदेश जारी कर दिये.

इधर, राष्ट्रपति जिनपिंग ने आदेश दिया उधर दर्जनों चीनी फाइटर जेट गर्जना करते हुए ताइवान की सीमा पर मंडराने लगे. रेडियो ताइवान को आपातकाल की घोषणा करनी पड़ीं और इमरजेंसी सायरनों से ताइवान पूरे दिन सिहरता रहा. ताइवान के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति लिंग-ताई ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से संयम बरतने की अपील की.

दरअसल ताइवान के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति लिंग-ताई को कट्टर चीन विरोधी माना जाता है. अपने शपथ ग्रहण समारोह में लिंग ताई ने साफ कहा कि ताइवान किसी भी तरह से चीनी दादागिरी के आगे नहीं झुकेगा. उधर जिनपिंग को लिंग ताई के इन कटु वचनों से ऐसा बुरा लगा कि उन्होंने ताइवान द्वीप को लगभग 17 समुद्री युद्ध पोतों से घेरकर उसके हवाई क्षेत्र में घुसपैठ कर डाली.

अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में गुरुवार को दक्षिण एशिया में हुई इस अप्रत्याशित घटना के कई मायने निकाले जा रहे हैं लेकिन चीन जैसा एक महाशक्तिशाली राष्ट्र सीधा ताइवान पर हमला कर दे, ऐसा नहीं है. यह मामला रूस यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन में बढ़ते नाटो देशों के दखल का नतीजा है. चूंकि रणक्षेत्र में पुतिन दुनिया के सबसे अनुभवी राष्ट्राध्यक्ष में सुमार हैं और पुतिन का लक्ष्य यूक्रेन जीतना कम नाटो की तबाही ज्यादा है इसीलिए पुतिन यूक्रेन में कभी ज्यादा आक्रामक होकर कभी धीमा होकर नाटो देशों की नब्ज टटोलते रहते हैं.

पिछले दिनों पुतिन की चीन यात्रा का कुल जमा भी यही रहा कि अमरीका को छोटे-छोटे युद्धों में फंसाते हुए खोखला कर बाद में उसे कुचल देना. रूस को चीन का साथ देना ही होगा. अगर चीन इस समय पुतिन के नाटो वध में साथ नहीं देता है तो कल वही नाटो शत-प्रतिशत चीन की तरफ भी बढ़ेगा.

उधर, उत्तर कोरिया ने अमरीका को दक्षिण कोरिया की पहरेदारी में फंसा रखा है तो उसी अमरीका को ईरान ने इजरायल की चौकसी में लगा दिया और अब चीन ने ताइवान को आतंकित कर अमरीका का ध्यान दक्षिण एशिया की तरफ खींच लिया है और इस सबमें पुतिन के फाइटर जेट टैंक मिसाइलें यूक्रेन में नाटो की हर रणनीति को धुआं धुआं कर रहे हैं.

जिनपिंग चाहते थे कि ताइवान का राष्ट्रपति उनकी पसंद का निर्वाचित हो. अगर ताइवानी नागरिक जिनपिंग की नसीहत को मान लेते तो ताइवान न केवल एक शांत क्षेत्र होता बल्कि संयुक्त राष्ट्र में ताइवान को देश होने की मान्यता भी मिल जाती. इतना तो तय है कि बिना चीनी समर्थन के ताइवान कभी भी संयुक्त राष्ट्र में देश होने की मान्यता प्राप्त नहीं कर सकता और जब ताइवान कोई देश ही नहीं है तो चीन की सीमा पर ताइवान नाम का भू-भाग चीन का ही होगा.

इस पर ताइवान को ना-नुकुर करने की न केवल असहनीय कीमत चुकानी होगी बल्कि अपने अस्तित्व से हाथ धोने की नौबत भी आ सकती है. अमरीका ताइवान की मदद सिर्फ औपचारिक तौर पर ही कर सकेगा. अमरीका यह अच्छी तरह जानता है पुतिन-जिनपिंग की राजनितिक जुगलबंदी उसके दुर्दान्त को करीब ही लायेगा. लेकिन अपने को हर युद्ध में आकंठ फंसा चुका अमरीका के पास पीछे लौटने की सभी लाइफलाइनेंं एक्सपायर हो चुकी हैं.

चीन ताइवान संघर्ष में भारत के लिए भी असुरक्षा का माहौल बन सकता है. भारत को चाहिए कि सीमा विवादों को लेकर चीन के साथ बातचीत के विकल्प को पुनः बहाल किया जाये. यह सही है कि आज का भारत हर क्षेत्र में मजबूती रखता है लेकिन चीन दुनिया की महाशक्ति है, इसे अंधराष्ट्रवाद के नशे में भुलाया नहीं जाना चाहिए.

  • ए. के. ब्राईट

Read Also –

लद्दाख में चीन और मोदी सरकार की विदेश नीति
उत्तर कोरिया, चीन, रूस के चक्रव्यूह में तबाह होते नाटो देश
‘The Last War’ : भारत 10 दिनों में चीन से युद्ध हार सकता है
‘नाटो सैन्य संगठन को पुतिन जूती की नोक से मसल देने की बात करते हैं’ – एडरिफ गोजा

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

आज सुप्रीम कोर्ट के सामने देश के जनतंत्र को बचाने का आख़िरी मौक़ा

Next Post

इजरायल द्वारा फिलिस्तीनी जनता पर किये जा रहे हमलों से उत्पन्न मानवीय त्रासदी

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

इजरायल द्वारा फिलिस्तीनी जनता पर किये जा रहे हमलों से उत्पन्न मानवीय त्रासदी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

वित्तीय शक्तियों और राजनीति के अनैतिक गठजोड़ ने संगठित ठगी के दौर को जन्म दिया है

March 19, 2024

कैमूर जनसभा का ऐलान – ‘अपने जल-जंगल-जमीन-आबरू बचाने के लिए संघर्ष का जो भी तरीका अपनाना हो अपनाएंगे’

February 7, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.