Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

राजपक्षे को तो मुक्ति मिल गई लेकिन श्रीलंका की जनता को क्या मिला ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 26, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
राजपक्षे को तो मुक्ति मिल गई लेकिन श्रीलंका की जनता को क्या मिला ?
राजपक्षे को तो मुक्ति मिल गई लेकिन श्रीलंका की जनता को क्या मिला ?

राजपक्षे को मुक्ति मिल गई. पूर्व राष्ट्रपति अपनी दौलत के साथ आराम से सिंगापुर मे जी लेंगे. उनके परीवार की दौलत भी उनके पास ही है.क्षसाथ देने वाले उद्योगपति, ठेकेदार, नेता … सभी अपनी जिदगियां आराम से जियेगें, देश में रहें या विदेश में, क्या फर्क पड़ता है. लेकिन जनता को श्रीलंका में रहना है, उसे वो सारा कर्ज पटाना हैं जो उसने लिया नहीं, जिसे लेने से पहले उससे पूछा नहीं गया.

आराम से जो काम बैलेट के माध्यम से हो सकता था, उसे लुटने पिटने के बाद सड़कों पर उतर कर हासिल किया गया. वोट देते समय तो दिमाग में सिहली गर्व और अल्पसंख्यकों के प्रति नफरत थी. जब देश के पोर्ट, हवाई अड्डे और तमाम परिसंपत्तियां दिन के उजाले में विदेशियों के हाथ लुटाए जा रहे थे, जनता ने देखने से इंकार कर दिया. संपत्ति तो सार्वजनिक थीस नफरत निजी थी तो निजी आनंद बड़ा था.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

इस आनंद की कीमत अब सारी जिंदगी चुकानी है. कर्ज पहले ही देश के तमाम उत्पादन से ज्यादा हो चुका है. आगे देश चलाने के लिए नई सरकार और भी कर्ज लेगी. इस कर्ज से लंका खड़ा होगा, जिदगी चलेगी तो टैक्स फिर से आना शुरू होगा. इस टैक्स का ज्यादातर हिस्सा कर्ज चुकाने में जाएगा. दरसअल, आने वाले कुछ दशकों का टैक्स, यानी नेशनल इनकम, कर्ज की किस्तों के रूप में विदेश जाएगा, जो पंद्रह साल तक राजपक्षे राज चुनने का भुगतान होगा.

टैक्स लेने का मोटिव जनसुविधाऐं उपलब्ध कराना होता है. सरकार आपको अमीर नहीं बना सकती पर वह अपने हिस्से की लूट कम कर सकती है. वह अपना खर्च भी इस तरह से डिजाइन कर सकती है कि आपके खर्च घट जाऐं. मसलन अच्छे स्कूल कालेज और अच्छे अस्पताल बनाकर आपका ढेर सारे पैसे वह बचा सकती है, जो आप इलाज या शिक्षा पर खर्च करते. आपकी सैलरी, पेंशन बढा सकती थी, आपको अफोर्डेबल मकान बनाकर लीज पर दे सकती है.

लेकिन श्रीलंका की आने वाली दो दशकों की सरकार के पास वैसा मौका नहीं होगा. जनता की कमाई का ज्यादातर हिस्सा लूटकर वह विदेश भेजेगी. यह लंकाइयों के लिए एक्सट्रीम पावर्टी (बेइंतहा दरिद्रता) की राह है. यह सजा भुगतनी ही है इसलिए कि उसने राजपक्षे से प्यार किया था, उसकी बांटी अफीम खाई थी.

सच्चाई यह है कि भारत के अगले बजट में कमाई का साठ प्रतिशत हिस्सा कर्जों के भुगतान में जाएगा. 70 साल में जो विदेशी कर्ज 52 लाख करोड जमा हुआ था, वह आठ साल मे 125 लाख करोड जा चुका है लेकिन खर्च बेतहाशें है. एयरपोर्ट और एक्सप्रेस वे बन रहे हैं, दाल, चावल, दही लूटा जा रहा है. आपके लंच की चार रोटियों में से 2 सरकार खा रही है. यह आपकी नफरत की कीमत है.

इस चमकदार नफरत में आपने दिन दहाड़े डाके को देखने से इन्कार कर दिया. बैंकों को डूबते देखा, रिजर्व बैंक का सरप्लस लुटते देखा, डिफाल्टर्स को भागते देखा, नौकरियां छूटती देखी, स्कूल, अस्पताल, पेंशन पर डाका देखा, इस पर बात करने वालों पर एजेंसियों के छापे देखे लेकिन आप खुश रहे क्योकि मुसलमानों की चूड़ी टाइट हो रही है.

सजा श्रीलंका की ही तरह भुगतनी है. आखिर हमने भी तो ठीक वही किया है. मौत के सौदागरों की बांटी अफीम खाई है, हत्यारों से प्यार किया है. होश आने के बाद बची जिंदगी इस नशे की किस्तों का भुगतान करना है.

सवाल यह आज मौजूं है कि श्रीलंका को क्या मिला लेकिन जब आप इस रेजीम से छुटकारा पाऐंगे, अपने घावों और धंसे पेट को सहलाते हुए खुद को यह सवाल करते पाऐंगे कि भारत को क्या मिला ?

  • विशाल जार्ज

Read Also –

श्रीलंका के बहाने सत्ता के स्वकेन्द्रित चरित्र के बेबाक विश्लेषण
श्रीलंका में जनता को गोली मारने के आदेश देकर सिंहासन छोड़कर भागते नेता
श्रीलंका : प्रतिक्रांति के समर्थक ही आज सत्ता के खिलाफ मैदान में हैं
उदारीकरण की नीतियों के कारण श्रीलंका बदहाल
उदारीकरण के कारण श्रीलंका के नक्शेकदम पर बढ़ता भारत
इस देश के लिए दुआ और नमाज़ ही काम आ सकती है, क्योंकि …

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

द्रौपदी पांडव से द्रौपदी मुर्मू तक – कांचा इलैया शेपर्ड

Next Post

बार बाला की रट्ट लगाने वाली भाजपा की बार बाला स्मृति ईरानी

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

बार बाला की रट्ट लगाने वाली भाजपा की बार बाला स्मृति ईरानी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

भाजपा-आरएसएस के मुस्लिम विरोध का सच

April 3, 2019

टेलीप्रॉम्प्टर प्रकरण : बिना स्क्रिप्ट के मोदी एक शब्द भी नहीं बोल सकते

January 19, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.