Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

राजनैतिक नियोग : बचे 77 दिन में विकास पैदा हो जाये तो आश्चर्य मत कीजियेगा !

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 20, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

भैया ये नियोग का मतलब समझे क्या ? वो ऐसा है कि वैदिक साहित्य, शास्त्रों और धार्मिक ग्रंथों के पितृसत्तात्मक पुरुषवादी सोच के ज्ञानी पुरुष लिख गए हैं कि यदि पारिवार का मुख्य पुरुष सदस्य पुत्र उत्पन्न किये बिना मृत्यु को प्राप्त हो जाये या नपुंसक हो या अन्य किसी कारण से संतान उत्पन्न करने की क्षमता न रखता हो तो परिवार का नाम चलाने के लिए स्त्री को अपने ससुर, जेठ, देवर, दूर के मर्द रिश्तेदार, पारिवारिक मित्र, दास और नौकर तक से मैथुन (सम्भोग) कर परिवार का नाम चलाने के लिए पुत्र रत्न प्राप्ति कर लेनी चाहिए, यह स्त्री का कर्तव्य है. शास्त्रों में इस व्यवस्था को ही नियोग कहा गया है. आगे चलकर नियोग की आड़ में स्त्री से संभोग के लिए उसकी मर्ज़ी के पुरुष के अधिकार से भी वंचित कर दिया गया. विधवा स्त्री पारिवारिक संपत्ति और सेक्स ऑब्जेक्ट की तरह अपने घरों में ही प्रयुक्त कर शोषित होती रही.

पुनर्जागरण काल में जब राजा राम मोहन राय, विद्यासागर, सावित्री फूले, फातिमा बीबी जैसे लोग सदियों से प्रताड़ित स्त्री को विभिन्न अधिकार और शिक्षा दिलाने के लिए जूझ रहे थे, उसी काल में हिन्दू धर्म के पुनरुत्थानकर्ता स्वामी दयानंद सरस्वती जी भी अपनी पुस्तक ’सत्यार्थ प्रकाश’ में इस नियोग व्यवस्था का पुरजोर समर्थन ही नहीं बल्कि इसकी पुनर्स्थापना भी कर रहे थे.




आधुनिक काल में ये सर्वविदित है कि भाजपा के लिए 2014 के चुनाव के तारणहार मोदी जी अपनी किसी महत्वाकांक्षा या मरदाना कमज़ोरी या संन्यास की झूठी सनक के तहत अपनी ब्याहता स्त्री को छोड़ भागे. आगे चलकर वे सन्यासी भी नहीं रहे और राजनैतिक भोग-विलास की वास्तविक दुनिया में लौट आये. उन्होंने राजनैतिक दल के रूप में भाजपा का वरण किया और 2014 में शीघ्र ही विकास को पैदा करने का चुनावी वादा किया. दुर्भाग्य से अपनी वैवाहिक ज़िन्दगी की तरह वे यहां भी असफल हुए और ढाई साल के अथक परिश्रम के फलस्वरूप विकास को पैदा न कर सके.

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

आगे की स्थिति को ऐसे समझने का प्रयास करें कि जो महानुभाव भाजपा और नारायण दत्त तिवारी के गठबंधन का मज़ाक उड़ा रहे हैं या आलोचना कर रहे हैं, वे अज्ञानी पुरुष हैं और शास्त्र तथा सत्यार्थ प्रकाश में वर्णित नियोग की परंपरा के ज्ञान से वंचित हैं.

दरअसल मोदी जी और भाजपा ने राष्ट्र हित एवं देश की भलाई के लिए नियोग की परंपरा का मॉडिफिकेशन कर इसे पारिवारिक क्षेत्र से अपग्रेड कर राजनैतिक क्षेत्र में भी लागू करने में सफलता पाई है.




अभी तक जो मोदी जी नहीं कर सके थे, उसे कराने का एक प्रयास एन डी तिवारी को भाजपा में लाकर किया गया था. सोचा गया था कि भाजपा और एन डी तिवारी जी के संसर्ग से वो हो सकेगा. नियोग से विकास पैदा हो सकेगा. ब्राह्मणवादी सोच से लबरेज़ पार्टी ने विकास उत्पन्न करने के लिए भी राजनैतिक लंपटता के गुरु घंटाल 91 वर्षीय ब्राह्मण का ही वरण किया था.

देश ने सोहर गीत गाने की तैयारी शुरू भी कर दी थी. हम थाली और बेलन बजाने और सड़क पर नृत्य करने को तैयार थे कि तिवारी और भाजपा के नियोग से विकास पैदा होगा और उसे मोदी जी का नाम दे दिया जाएगा, तो हम भी खुश हो लेंगे लेकिन तैयारी धरी रह गयी. विकास पैदा करवाने में सहयोग देने की जगह तिवारी जी खयड ही निकल गए थे.

मोदी जी के त्याग और तिवारी जी के 91 वर्षीय पौरुष के दम पर अब विकास पैदा होकर नही दिया गया. हालांकि तिवारी जी का रिकॉर्ड इस क्षेत्र में बहुत अच्छा था. भारत की न्यायपालिका तक इसे मानती थी.




बस सवाल ये है कि बुढ़ौती में चल रहे व्यक्ति से राजनैतिक नियोग कर भाजपा कैसा विकास पैदा कर पाती है ? क्या विकलांग विकास ? थका और लुंज पुंज विकास ? खैर वह योजना तो किसी सतिरे नहीं चढ़ी. अब प्लान बी के तहत विकास उत्पन्न जरने के लिए घर के अंदर के ही मर्द सदस्य गडकरी जी से नियोग सहायता की उम्मीद पाली जा रही है. अबकी विकास होकर ही रहेगा.

नोटबन्दी के दौरान देश भर में शादियों के लिए पैसा न होने के दौरान गडकरी जी ने अपनी बिटिया की शादी कैसै विकसित अवस्था में कर लेने में कामयाबी पायी थी, यही उनके पौरुष की पहचान है. बाकी बचे 77 दिन में विकास पैदा हो जाये तो आश्चर्य मत कीजियेगा !

  • फरीदी अल हसन तनवीर





Read Also –

सवर्ण आरक्षण की बात करना सिर्फ एक चुनावी स्टंट
भारत में हिन्दु राष्ट्र की धोखाधड़ी
फर्जी सरकार के फर्जी आंकड़े




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

मर्जी है आपका क्योंकि वोट है आपका

Next Post

भाजपा नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय का पीएम मोदी को पत्र

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

भाजपा नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय का पीएम मोदी को पत्र

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

चित्रा मुद्गल : नाम बड़े और दर्शन छोटे

October 7, 2024

मीडिया वालों, कलम छोड़ दो कट्टे थाम लो….!

May 4, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.