Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

तो यह है असलियत गौतम अडानी के अमीरी का

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 23, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
तो यह है असलियत गौतम अडानी के अमीरी का
वित्तीय वर्ष 2019-20 में देश के ख़ज़ाने में टैक्स अदा करने वाली प्रमुख कंपनियों की सूची में अडानी की एक भी कंपनी नहीं है.

गिरीश मालवीय लिखते हैं – यह है असलियत गौतम अडानी की, जिनके दो नंबरी अमीर बनने पर भक्त लहालौट हो रहे हैं. यह तस्वीर बता रही है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में देश के ख़ज़ाने में टैक्स अदा करने वाली प्रमुख कंपनियों की सूची में अडानी की एक भी कंपनी नहीं है. यह, जी हां ! यह सच है कि टैक्स देने वाली टॉप 20 कंपनियों में एक भी कंपनी अडानी की नही है और कल ख़बर आई है कि गौतम अडाणी के नेतृत्व वाली कंपनी समूह पूंजीकरण के लिहाज से देश में नंबर वन बन गया है.

अडाणी समूह ने 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) के साथ सूचीबद्ध टाटा समूह (जिसमें 27 फर्में शामिल हैं) को पीछे छोड़ दिया और मुकेश अंबानी की नौ कंपनियों का समूह 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक के बाजार पूंजीकरण के साथ सूची में तीसरे स्थान पर चला गया है.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

आपको याद होगा कि कुछ दिन पहले ख़बर आई थी कि अनिल अंबानी की रिलायंस एनर्जी को अडानी ट्रांसमिशन ने 18,800 करोड़ रुपये में खरीद लिया. इस बारे में सूचना अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली ने आरटीआई के तहत जानकारी मांगी तो पता चला कि रिलायंस एनर्जी ने 1451.69 करोड़ रुपये के कई करों का भुगतान महाराष्ट्र सरकार को नहीं किया है जबकि कंपनी ने यह पैसा उपभोक्ताओं से सरचार्ज, टॉस, ग्रीन सेस और सेल्स टैक्स आदि के नाम पर वसूले थे.

गलगली ने बताया कि आरटीआई दायर करने के बाद महाराष्ट्र सरकार हरकत में आई और रिलायंस एनर्जी को नोटिस भेजा. बीते तीन नवंबर को डिविजन इंस्पेक्टर मीनाक्षी ने रिलायंस के जनरल मैनेजर को नोटिस भेज बकाया पैसा जमा करने को कहा.

गलगली ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर कहा कि रिलायंस एनर्जी के बैंक एकाउंट को फ्रीज़ कर मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. ‘अगर अब रिलायंस एनर्जी को अडानी ट्रांसमिशन ने ख़रीद लिया है तो 1451.69 करोड़ रुपये का भुगतान कौन करेगा ? क्या इस नुकसान की भरपाई के लिए उपभोक्ताओं को बिजली की ज़्यादा कीमत चुकानी पडेगी ? कि इतनी बड़ी रकम बकाया होने के बावजूद भी रिलायंस कैसे अडानी को कंपनी बेच सकती है ? सरकार को बकाया राशि पर 24 प्रतिशत का ब्याज लेना चाहिए और ज़रूरी कार्रवाई करने का आदेश देना चाहिए. वरना यह सवाल हमेशा बना रहेगा कि आख़िर टैक्स का पैसा कौन भरेगा.’

अडानी ने होल्सिम के साथ को अल्ट्रा टेक कम्पनी की डील की है उसमें भी टैक्स भरने को होलसिम वालों ने मना कर दिया है. यानी, वहा भी लोचा है इससे पहले भी कई बार अडानी की कंपनियों के बारे में टैक्स चोरी के मामले सामने आए हैं लेकिन सब पर पर्दा डाल दिया गया. वजह सब जानते हैं कि सैंया भए कोतवाल तब डर काहे का.

जनचौक वेबसाइट पर देवेन्द्र त्रिपाठी की प्रकाशित एक लेख कहता है कि  दुनिया के अमीरों की लिस्ट में टॉप थ्री में शामिल हो चुके गौतम अदानी लगातार सुर्खियों में छाए हुए हैं. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीते दिनों अमेरिकी बिजनेसमैन जेफ बेजोस को पछाड़ कर गौतम अदानी अमीरों की इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर पहुंच गए थे. वैसे, फोर्ब्स पत्रिका के अनुसार अदानी फिलहाल तीसरे नंबर पर हैं.

फोर्ब्स की मानें, तो अदानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदानी की कुल नेट वर्थ 153.5 बिलियन डॉलर है. हाल ही में गौतम अदानी ने अंबुजा सीमेंट्स और एसीसी में होल्सिम (Holcim) के भारतीय कारोबार का अधिग्रहण कर लिया है. बताया जा रहा है कि हिस्सेदारी की इस खरीद की वजह से अदानी ग्रुप के कर्ज में 40,000 करोड़ का इजाफा हो सकता है.

वैसे, गौतम अदानी के इतनी तेज गति से आगे बढ़ने पर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं. कहा जा रहा है कि अदानी ग्रुप पर कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है, इसके बावजूद उनकी नेट वर्थ में उछाल दर्ज किया जा रहा है, जो असंभव सा प्रतीत होता है.

दरअसल, अदानी ग्रुप का कर्ज पिछले पांच सालों में एक ट्रिलियन रुपये से बढ़कर 2.2 ट्रिलियन रुपये पहुंच गया है. बीते दिनों क्रेडिट सुइस और क्रेडिटसाइट्स ने गौतम अदानी के अदानी ग्रुप पर भारी-भरकम कर्ज लदने की बात कही थी. इस स्थिति में सवाल उठना लाजिमी है कि वो क्या वजह है, जो कर्ज के बावजूद गौतम अदानी की नेट वर्थ में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है ? और, क्या अदानी ग्रुप पर इतना भारी कर्ज किसी चिंता की ओर इशारा करता है ?

अदानी ग्रुप की कंपनियों के शेयर में इस साल बहुत ज्यादा तेजी दर्ज की गई है. अदानी ग्रुप की शेयर मार्केट में लिस्टेड कंपनियों की बात की जाए, तो अदानी इंटरप्राइजेज, अदानी पोर्ट एंड सेज, अदानी पावर, अदानी ट्रांसमिशन, अदानी ग्रीन एनर्जी, अदानी टोटल गैस और अदानी विलमर लिमिटेड के शेयर भाव में लगातार तेजी दर्ज की गई है. कोरोना महामारी के दौरान जहां कई कंपनियों के शेयर भाव नीचे गिर रहे थे. वहीं, अदानी ग्रुप के शेयर्स में कई बार अपर सर्किट लग गया था.

शेयर मार्केट के जरिये कंपनियां बाजार से निवेशकों का पैसा उठाती हैं और, उन्हें अपने हिसाब से कंपनी के अलग-अलग प्रोजेक्ट्स में निवेश करती हैं. और, गौतम अदानी की नेट वर्थ में बढ़ोत्तरी के पीछे शेयर मार्केट ही सबसे अहम हिस्सा है. उनकी कंपनियों के शेयर आसमान छू रहे हैं. अदानी ग्रुप में निवेशक आंख मूंदकर निवेश कर रहे हैं. जिसका उन्हें फायदा भी मिल रहा है. आज अगर अदानी ग्रुप की सभी कंपनियों का मार्केट कैप देखा जाए, तो ये करीब 20 ट्रिलियन रुपये से ज्यादा है.

क्रेडिटसाइट्स की रिपोर्ट के अनुसार, गौतम अदानी लीक से अलग हटकर नये, गैर-पारंपरिक और बहुत ज्यादा निवेश वाले कारोबारों में विस्तार कर रहे हैं. बीते कुछ सालों में गौतम अदानी ने बंदरगाहों, ग्रीन एनर्जी, पावर ट्रांसमिशन, थर्मल और रिन्यूएबल पावर जेनेरेशन, माइनिंग, स्टील, रियल इस्टेट, डाटा सेंटर्स, हेल्थकेयर, एफएमसीजी जैसे व्यापारों में विस्तार के साथ सीमेंट व्यवसाय के अधिग्रहण जैसे फैसले लिए हैं.

अदानी विल्मर का शेयर प्राइस 733.55 रुपये है जो लिस्टिंग के बाद से निवेशकों को 92.53 फीसदी तक का फायदा दे चुका है. अदानी इंटरप्राइजेज का शेयर प्राइस जनवरी 2021 में करीब 500 रुपये था. वहीं, आज इसके शेयर की कीमत 3780.50 रुपये है. अगर किसी ने अदानी इंटरप्राइजेज में इसकी लिस्टिंग के समय निवेश किया होगा. तो, आज निवेशक को 3005.13 फीसदी का फायदा हो चुका है.

इसी तरह अदानी पोर्ट एंड सेज का शेयर भी अब दोगुनी कीमत पर पहुंच चुका है. अडानी पावर का शेयर अब तक अपने निवेशकों को 1189.82 फीसदी का फायदा पहुंचा चुका है. अदानी ट्रांसमिशन का भी हाल ऐसा ही है. इसके जरिये भी निवेशकों के पांच साल में 3,028.03 फीसदी का फायदा मिला है. वहीं, अदानी ग्रीन एनर्जी ने अपने निवेशकों को पांच साल में 7,845.67 फीसदी का फायदा दिया है. अदानी टोटल गैस ने भी पांच सालों में 903.19 फीसदी की बढ़त हासिल की है.

गौतम अदानी के अदानी ग्रुप में निवेश करके बहुत से निवेशक मालामाल हुए हैं. और, इन निवेशकों की वजह से ही अदानी ग्रुप के नेट वर्थ में तेजी दर्ज की गई है. वैसे, ये सब कुछ केवल निवेशकों के दम पर ही नहीं है. अदानी ग्रीन एनर्जी को रेवेन्यू भी साल दर साल बढ़ता रहा है. मार्च 2022 में इस कंपनी का रेवेन्यू 5127 करोड़ रुपये है. 2020 में ये रेवेन्यू 2548 करोड़ था. आसान शब्दों में कहें, तो दो सालों में ही कंपनी का रेवेन्यू दोगुने से ज्यादा बढ़ चुका है. यानी कंपनी को लाभ हो रहा है, नुकसान नहीं.

गौतम अदानी के नाम के साथ विवाद जुड़ते रहे हैं. खासतौर से बीते एक दशक में अदानी ग्रुप को लेकर तमाम तरह के दावे किए जाते रहे हैं. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी तक दावा करते नजर आ चुके हैं कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को दो कारोबारी घराने अदानी और अंबानी चला रहे हैं. खैर, ये आरोप सिर्फ आरोप मात्र ही हैं. वैसे, अदानी ग्रुप पर कर्ज बढ़ने का सबसे बड़ा कारण ये है कि गौतम अदानी ने व्यापारों में विस्तार के साथ अधिग्रहण जैसे कई फैसले लिए हैं.

वहीं, एल्युमिनियम और सीमेंट प्रोडक्शन, कॉपर रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल्स जैसे व्यापारों में भारी-भरकम निवेश की जरूरत होती है. और, ये लंबे समय यानी करीब 5-6 साल बाद रिटर्न देना शुरू करते हैं. अदानी ग्रुप की ज्यादातर कंपनियों के विस्तार पर नजर डालें, तो उनका रुझान भारत में उन व्यवसायों की ओर है, जिनमें लोग हाथ डालने से कतराते हैं.

लोगों की चिंता का विषय ये है कि अगर अदानी ग्रुप की कोई एक कंपनी भी दिवालिया होती है, तो उसे इस स्थिति से बाहर निकालना मुश्किल होगा. लेकिन, बीते सालों में अदानी ग्रुप की सातों कंपनियों के शेयर भाव लगातार बढ़े हैं. जिसका मतलब साफ है कि निवेशक अदानी ग्रुप द्वारा किए जा रहे निवेश पर भरोसा जता रहे हैं. मार्च 2022 में अदानी ग्रुप के पास 33,000 करोड़ रुपये की ऑपरेटिंग इनकम थी. और, उस पर 2.2 ट्रिलियन का कर्ज था. लेकिन, इस कर्ज के अलग-अलग हिस्सों पर नजर डाली जाए, तो स्थिति साफ हो जाती है.

क्रेडिटसाइट्स के अनुसार, 2.2 ट्रिलियन रुपये के कर्ज में से 35,000 करोड़ का कर्ज प्रमोटर्स की ओर से दिया गया है. 21,000 करोड़ रुपये का कर्ज शार्ट-टर्म लोन के तौर पर है. जो कंपनी को मिलने वाले भुगतान से जाता रहता है. अदानी ग्रुप के पास नकदी और इसी तरह की अन्य चीजें भी हैं, जो करीब 27,000 करोड़ रुपये की हैं. इस हिसाब से 2.2 ट्रिलियन रुपये का कर्ज 1.37 ट्रिलियन रुपये हो जाता है. इस कर्ज में बैकों का शेयर 40 फीसदी है. और, बैंकों के इस कर्ज में 8 फीसदी अंतरराष्ट्रीय बैंकों का कर्ज है. 11 फीसदी कर्ज का हिस्सा प्राइवेट सेक्टर से लिया गया है. और, 21 फीसदी पब्लिक सेक्टर से लिया गया है. आसान शब्दों में कहें, तो अदानी ग्रुप पर लंबे समय तक रहने वाले कर्ज का हिस्सा 1.37 ट्रिलियन रुपये है.

कृष्ण कांत लिखते हैं – पिछले आठ साल में गरीबों की संख्या 35 करोड़ से 80 करोड़ पहुंच गई, इसी दौरान अडानी की संपत्ति 40 हजार करोड़ से 12 लाख करोड़ हो गई. आज अडानी की एक दिन की कमाई में तीन महीने तक 80 करोड़ गरीबों का पेट भरा जा सकता है.

अगस्त के आखिरी हफ्ते में अडानी दुनिया के तीसरे सबसे बड़े खरबपति बने. उसी दौरान खबर छपी कि अडानी की संपत्ति एक दिन में 42,000 करोड़ रुपये बढ़ गई. उस दिन तक उनकी संपत्ति लगभग 11 लाख करोड़ थी. एक पखवाड़े बाद आज अडानी दुनिया के दूसरे सबसे बड़े अमीर बन गए. आज उनकी संपत्ति करीब 12 लाख करोड़ हो गई. अडानी कौन सा कारोबार करते हैं कि 15 दिन में लगभग एक लाख करोड़ कमा लेते हैं ?

31 अगस्त को एक दिन में अडानी की संपत्ति 42,000 करोड़ रुपये बढ़ गई. मुफ्त राशन योजना को सरकार ने 3 महीने के लिए बढ़ाया तो 40,000 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान था. यानी अडानी की एक दिन की कमाई से तीन महीने तक 80 करोड़ गरीबों का पेट भरा जा सकता है और 2000 करोड़ फिर भी बच जाएंगे.

भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 2014 के बाद देश में गरीबों की संख्या 35 करोड़ के आसपास थी, यानी जो गरीबी रेखा के नीचे थे पिछले दो साल से सरकार दावा कर रही है कि वह 80 करोड़ लोगों का पेट भरने के लिए गरीब कल्याण योजना के तहत मुफ्त राशन दे रही है. 2020-21 के दौरान सिर्फ एक साल में 23 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे चले गए. आज 140 करोड़ में से 80 करोड़ मुफ्त सरकारी राशन पर ज़िंदा रहने को क्यों मजबूर हुए ? देश को इस हाल में किसने पहुंचाया ?

इन आंकड़ों से आप देश में व्याप्त विसंगति और गैरबराबरी का अंदाजा लगा सकते हैं. पिछली सरकार की प्राथमिकता थी कि कुछ लोग तेजी से अमीर हो रहे हैं तो बाकी जनता के हाथ में भी जीने भर का पैसा पहुंचना चाहिए. इसके लिए मनरेगा का सहारा लिया गया. आज मनरेगा का बजट घटा दिया गया है, लेकिन गरीबों से रोटी और कफन तक पर टैक्स वसूला जा रहा है.

यह देश भयंकर आर्थिक तबाही की ओर बढ़ रहा है. डेढ़ लोगों द्वारा दो लोगों के लिए चलाया जा रहा यह देश अगर आपका भी है तो आपको इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए. अगर आप एक आदमी की लूट, लालच और झूठ पर ताली बजाने के लिए धरती पर अवतरित हुए हैं तब आपसे बड़ा गर्वीला प्राणी हो नहीं सकता, आपको बधाई हो !

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

विश्व बैंक ने की दुनिया में मंदी आने की घोषणा, क्या हम लोग इसका मतलब समझ पा रहे हैं ?

Next Post

अमित शाह गृहमंत्री है या दंगा मंत्री ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

अमित शाह गृहमंत्री है या दंगा मंत्री ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

संगतराश, तुम उसका बुत बनाना

January 15, 2021

भाजपा ने सत्ताहवस की खातिर देश के 130 करोड़ लोगों को मौत के मूंह में झोंक दिया

April 2, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.