जो लोग सीपीआई (माओवादी) पार्टी और उसकी उत्तर समन्वय समिति (NCC) को एनआईए की रचना बताते हैं, उनसे मुझे बस एक ही बात कहनी है: तुम गद्दार और वर्ग गद्दार हो. इतिहास दर्ज करेगा कि तुम कौन हो.

माओवादी पार्टी की उत्तर समन्वय समिति की राजनीतिक कार्रवाई, जिसने वर्ग राजनीति का समर्थन किया, उन लोगों के मुंह पर करारा तमाचा थी, जिन्होंने यह मान लिया था कि उनके बिना माओवादी पार्टी का कोई अस्तित्व नहीं रह जाएगा.

कुछ बेहद अजीब और चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं. कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी माओवादी पार्टी द्वारा कार्रवाई किए गए लोगों को बचाने में लगे हुए हैं, जिन्हें पार्टी गद्दार मानती है.

दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि पिछले तीन महीनों से केरल के इन तथाकथित बुद्धिजीवियों और अवसरवादियों में से किसी ने भी सोशल मीडिया पर नक्सलबाड़ी आंदोलन और उसकी राजनीतिक विरासत को बदनाम करने वालों की आलोचना नहीं की है. इनमें सीमा विजय की टीम से लेकर वेणुगोपाल तक शामिल हैं.

परंपरागत रूप से दक्षिणपंथी माने जाने वाले इस समूह का अपना एक अलग राजनीतिक दृष्टिकोण है, जिसमें वामपंथी चेहरा भी शामिल है. इस समूह के लिए माओवादी आंदोलन केवल अपनी सामाजिक स्थिति और प्रभाव स्थापित करने का एक मंच बनकर रह गया है.

हैरानी की बात यह है कि उत्तर समन्वय समिति के निर्णयों और कार्रवाइयों की जानकारी होने तथा इन समूहों के साथ सहयोग नहीं करने की राजनीतिक हिदायत के बावजूद, केरल में माओवादी के रूप में पहचाने जाने वाले कुछ लोग एनसीसी के खिलाफ कार्रवाई करने वालों की सोशल मीडिया पोस्ट साझा कर रहे हैं.

वे बिना कोई राजनीतिक स्पष्टीकरण दिए एनसीसी और उसके राजनीतिक रुख का समर्थन करने वालों को एनआईए की देन बता रहे हैं. इस तरह के प्रचार के जरिए केरल में यह अफवाह फैलाई जा रही है कि उत्तर समन्वय समिति और उसका समर्थन करने वाले लोग एनआईए द्वारा तैयार किए गए हैं.

आज क्रांतिकारी दल द्वारा प्रेस विज्ञप्तियां जारी किए जाने के बावजूद, ये तथाकथित बुद्धिजीवी अवसरवादियों और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से आंदोलन को कमजोर करने वालों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं.

ऐसे बुद्धिजीवियों की भूमिका आंदोलन के पुनर्निर्माण में बाधा खड़ी करने वाली रही है. आंदोलन के प्रति उनकी राजनीतिक प्रतिबद्धता और वास्तविक भूमिका पर गंभीर सवाल उठते हैं.

  • Aichorus Magiz (मलयालम से हिन्दी रुपांतरण)