Thursday, July 23, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

सुशांत सिंह राजपूत : काले धन का स्याह सच और चुनाव की बैतरणी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 11, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

सुशांत सिंह राजपूत : काले धन का स्याह सच और चुनाव की बैतरणी

पं. किशन गोलछा जैन, ज्योतिष, वास्तु और तंत्र-मंत्र-यन्त्र विशेषज्ञ

ये जो सुशांत सिंह मामले में आप रोज-रोज अपना माथा दुखा रहे हैंं न, तो आपको बता देता हूंं कि असल मामला सिर्फ संपत्ति का है. क्योंकि सुशांत के पास दो नंबर का बहुत पैसा था, जिसे रिया उड़ा रही थी (फ़ोकट में नहीं बदले में सुशांत की शारीरिक जरूरतें पूरी करती थी). और चूंंकि उसे उसकी दो नंबरी धन का सबसे ज्यादा पता है इसीलिये वो सबसे ज्यादा दबा कर बैठी है और यही सुशांत के घरवालों की पीड़ा है.

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

बाकि ये सीबीआई का चोंचला और न्यूज मीडिया का रात-दिन रिया का शोषण जो चल रहा है, वो सिर्फ प्रोपेगेंडा है. अर्थात सुशांत के नाम की बकवास कथा सिर्फ इसलिये बांंची जा रही है ताकि महाराष्ट्र में सरकार गिराया जा सके और बिहार में चुनावी फायदा बीजेपी द्वारा उठाया जा सके. इसीलिये अपना माथा दुखाना बंद कीजिये क्योंकि सबसे बड़ा प्रश्न तो यही है कि सुशांत के पास इतनी दौलत आयी कहांं से ?

इतना तो तय है कि – गिनती की कुछ फिल्मों और थोड़े से विज्ञापनों से तो 60 करोड़ नगद जैसी बड़ी रकम जुटायी नहीं जा सकती, जबकि साथ में ढेर सारी प्रॉपर्टी की खरीदी भी अलग से है (हालांंकि उसके मरने का दुःख मुझे भी है क्योंकि कलाकार अच्छा था लेकिन उसका स्याह पक्ष भी उजागर होना चाहिये न… ? ताली कभी एक हाथ से थोड़े ही बजती है ?).

चलो मान लेते हैं की सुशांत का ऐसा कोई स्याह पक्ष नहीं है और उसकी सारी संपत्ति भी एक नंबर की है तो फिर ईडी रिया की जांंच क्यों कर रही है ? अर्थात कुछ न कुछ तो गड़बड़ जरूर है और अगर कुछ भी नहीं है तो एक दूसरा सवाल उठता है कि जब कुछ है ही नहीं तो सरकार इस केस में इतना इंटरेस्ट क्यों ले रही है ? जबकि ऐसी आत्महत्यायें बॉलीवुड में रोज होती है (कम से कम एक तो रोज की मान ही लीजिये, परन्तु छोटे कलाकार होने से वे फ्रेम में नहीं आते). सिर्फ लॉकडाउन का ही डाटा निकाला जाये तो कम से कम 40 ऐसे नामचीन कलाकारों ने सुसाइड किया है, फिर सिर्फ सुशांत में इतना सरकारी इंटरेस्ट क्यों है भाई ?

कहीं सुशांत सरकार द्वारा प्लांटेड कोई जासूस तो नहीं था ? (उसकी इतनी बेनामी संपत्ति और दो नंबर का रोकड़ा बहुत कुछ कहता है. लेकिन ये प्रश्न छुपाये जा रहे है और सिर्फ रिया को फंसाने और बदनाम करने का कार्य किया जा रहा है – क्यों ?

मैं ये नहीं कहता कि रिया निर्दोष है. अगर वो दोषी है तो उसे सजा भी मिलनी चाहिये लेकिन उसे बदनाम नहीं किया जाना चाहिये क्योंकि बॉलीवुड का ये स्याह पक्ष है जिसमें बहुत-सी नहीं तो ज्यादातर फीमेल्स अभिनेत्रियां अपने शरीर के बदले धनवानों की संपत्ति पर ऐश करने के लिये उनके साथ या तो लिव-इन में रहती है या उनसे शादी कर लेती है. (इतिहास उठाकर देख लीजिये बॉलीवुड का अगर मेरी बात गलत निकले तो) और अगर रिया ऐसा करके अपने या अपने परिवार का भविष्य अगर सुरक्षित कर रही थी तो इसमें गलत क्या है ?

आप सभी अपने परिवार के लिये सेक्रिफाइज नहीं करते क्या ? आप अपने बच्चों के लिये, अपनी फैमिली के लिये आर्थिक सुरक्षा का प्रयास नहीं करते क्या ? रिया ने ऐसा किया तो वो गलत कैसे ?

आपकी नजर में उसका तरीका गलत हो सकता है, मगर ऐसे ही न जाने कितने गलत तरीके आप भी तो अपने कारोबार में अंजाम देते हैं. कितनों के शादी के बाद विवाहेतर संबंध होते हैं और कितने तो रखैल के रूप में भी दूसरी औरत रखते हैं, कितने तो वेश्यागमन भी करते हैं और कितने ही बॉसेज अपनी फीमेल स्टाफ और सेक्रेटरी के साथ संबंध बनाते हैं और बदले में उन्हें धन और प्रोन्नति का लालच देते हैं (अगर ये गलत नहीं तो वो कैसे गलत है भाई ?)

कितनी ही फीमेल्स खुद अपना शरीर परोसती है ताकि वो बिना मेहनत किये आगे बढ़ सके और ये सब आपके समाज में ढके छुपे तौर पर होता है. अगर रिया ने ये सब खुलेआम किया तो आपको क्यों दर्द उठ रहा है ? (उसने आपकी संपत्ति से तो कुछ नहीं लिया न ?)

अरे कितनी ही फीमेल्स तो पहले खुद अपना शरीर परोसती है और बाद में बलात्कार या यौन शोषण का झूठा आरोप लगा देती है. कम से कम रिया ने ये तो नहीं किया न ? बल्कि उसने तो स्पष्टतया स्वीकार ही किया है न कि हांं, वो लिव-इन में रहती थी सुशांत के साथ. और ये जो आपको उसके इस हलफनामे से दर्द हो रहा है तो अगर आपके समाज का सच बताऊंगा तो आपका पेट भी दुखने लगेगा.

क्या आप इस सच से इंकार कर सकते हैं कि कितने ही ऐसे बच्चे हैं जिन्हें रोज कचरे के ढेर में फेंक दिया जाता है ताकि किसी का पाप छुप सके. आप इस बात को नकार सकते हैं कि कितनी ही ऐसी महिलायें है जो खुद अपने बच्चे को गला दबाकर मार देती है या जमीन में गड्डा खोदकर दबा देती है ताकि उसकी की गयी अय्याशियां समाज में उजागर न हो.

अरे भाई देखा तो यहां तक है कि जिनके पुरुष लम्बे समय से मुसाफिरी में रहते हैं और पीछे से उनके बच्चे भी हो जाते हैं. पर उन्हें फर्क पड़ने की बात तो जाने दीजिये पता तक नहीं चलता कि बिना संबंध बनाये ऐसा कैसे हो सकता है कि उनकी बीवियांं बच्चे पैदा कर ले ?

अरे. कितने ही लोगों के बच्चे नेपाली, बिहारी, बंगाली जैसी देह दृष्टी वाले होते हैं जबकि उनका उनसे या ऐसे क्षेत्रों से सिर्फ इतना संबंध होता है कि वे अपनी बीवी के साथ वहां काम धंधे के लिये गये होते हैं या उनके नौकर इन क्षेत्रों के होते हैं. लेकिन क्या उन्होंने कभी अपने बच्चों का डीएनए टेस्ट करवाया है कि वे उनके बच्चे हैं या नहीं ?

मैं रिया को ऐसी किसी वजह के लिये गलत नहीं मानता. हांं, इस बात की जांंच जरूर होनी चाहिये कि अगर उसने सुशांत की दिमागी हालत ख़राब करने के लिये किसी दवा या ड्रग्स का प्रयोग किया है, तो कानून के हिसाब से जो सजा मुनासिब हो वो उसे दी जाये लेकिन साथ में ये जांंच भी हो कि सुशांत के पास इतना दो नंबर का धन आखिर आया कहांं से ?

फिर से बता रहा हूंं ये सारा प्रपंच उसी काले धन के लिये है. घरवाले सोचते हैं कि सुशांत हमारा था, अतः उसकी सारी संपत्ति हमारी है और रिया को किसी भिखारी की तरह धक्के मारकर निकाल देना चाहिये. जबकि रिया सोचती है कि उसे जब भी जरूरत हुई मैंने उसे अपनी देह दी. उसने जैसे चाहा, जो चाहा, जब चाहा उसने वो किया. अतः उसकी संपत्ति पर मेरा अधिकार है. चूंंकि कानूनी रूप से रिया को बेदखल किया नहीं जा सकता, अतः उसे फंसाया और बदनाम किया जा रहा है (ऐसा मैं सोचता हूंं). अगर इन बातों का खुलासा हुआ तो सच भी बाहर आ जायेगा.

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

मध्यकाल में मंदिरों का तोड़ा जाना : भ्रम और वास्तविकता

Next Post

आज़ाद की शहादत : प्रामाणिक ब्यौरा

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

आज़ाद की शहादत : प्रामाणिक ब्यौरा

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

कोरोना वायरस बनाम लॉकडाऊन

May 11, 2020

आज देशद्रोही का दोगला संतान देश प्रेम का ठेकेदार बन गया है

August 16, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.