Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

संसद में ‘जय संविधान’ के नारे से भाजपा को इतनी नफरत क्यों ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 3, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
संसद में 'जय संविधान' के नारे से भाजपा को इतनी नफरत क्यों ?
संसद में ‘जय संविधान’ के नारे से भाजपा को इतनी नफरत क्यों ?
मुनेश त्यागी

पिछले दिनों जब संसद में ‘जय संविधान’ के नारों पर आपत्तियां उठायीं गईं और लोकसभा स्पीकर द्वारा सांसद दीपेंद्र हुड्डा को ‘जय संविधान’ का नारा लगाने से रोक दिया गया तो इस पर बड़ा अचंभा हुआ और यह विश्वास ही नहीं हुआ कि संसद में किसी सांसद, किसी पार्टी या स्पीकर को, जय संविधान का नारा लगाने पर कोई आपत्ति हो सकती है. हम पिछले कुछ दिनों से देख रहे हैं कि आरएसएस और बीजेपी के नेताओं में और आरएसएस के पूरे तंत्र में, विपक्षी दलों से लगातार आपत्ति और असहमतियां बढ़ती जा रही है.

हकीकत यह है कि आरएसएस के अधिकांश संगठनों और उसकी राजनीतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी के दस साल की सत्ता और सरकार ने, संविधान के बुनियादी प्रावधानों का सम्मान और पालन नहीं किया है और उसके अनिवार्य पहलुओं और सिद्धांतों जैसे…संप्रभुता, जनतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद, न्याय, समता, समानता, आजादी, भाईचारा, आरक्षण, यूनियन, धार्मिक बराबरी, संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, सस्ता और सुलभ न्याय, आर्थिक समानता, सस्ती और आधुनिक शिक्षा, सस्ते और मुफ्त इलाज की सुविधा, ज्ञान विज्ञान की संस्कृति को, बिल्कुल नजर अंदाज और धरासई कर दिया है.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

सरकार ने आम जनता, गरीबों, किसानों और मजदूरों का हितरक्षण नहीं किया है, किसानों को एमएसपी एसपी नहीं दी गई है और मजदूरों को न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा है, उनके तमाम अधिकार जैसे छीन लिए गए हैं और उनमें से अधिकांश को सेवायोजकों का आधुनिक गुलाम बना दिया गया है, नौजवानों को नौकरी और रोजगार से वंचित किया गया है और पिछले दो सालों के दौरान सत्तर से अधिक परीक्षाएं कैंसिल की गई हैं और समाज में कुछ लोगों का ही प्रभुत्व और वर्चस्व बढ़ता और कायम होता जा रहा है.

इस सरकार ने जनता की रोजी-रोटी, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और छोटे उद्योग धंधों को स्थापित करने के क्षेत्र में कोई उल्लेखनीय काम नहीं किया है. कमरतोड़ मंहगाई और आकंठ भ्रष्टाचार को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया है, जाति, वर्ण, उच्च नीच और छोटे-बड़े की सोच को बदलने के लिए उसने कोई काम नहीं किया है, बल्कि हजारों साल से मौजूद इस विभाजनकारी सोच और मानसिकता को आगे बढ़ाया गया है. समाज में राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में पहले से मौजूद शोषण, जुल्म, अन्याय, गैरबराबरी को खत्म करने का कोई काम नहीं किया गया है और इस विभाजनकारी सोच को घटाया नहीं गया है बल्कि इसे और जोरदार तरीके से आगे ही बढ़ाया गया है.

अहम सवाल यह है कि यह सब क्यों हो रहा है ? यही आज सबसे बड़ा सवाल उठकर खड़ा हो गया है. यह सब संविधान विरोधी और जनतंत्र विरोधी काम इसलिए हो रहे हैं कि आज आरएसएस अपने अनेकों संगठनों और मुख्य रूप से राजनीति करने वाली भारतीय जनता पार्टी के माध्यम से राज सत्ता पर काबिज हो गया है. उसका भारत के संविधान में लिखित मूल्यों, आदर्शों और सिद्धांतों में कोई यकीन नहीं है, ना तो आज है और ना ही आजादी के आंदोलन के दौरान था. उसने अपने नेताओं के मुख से बार-बार यही कहलवाया था कि इस देश को किसी संविधान की जरूरत नहीं है, यहां तो पहले से ही मनुस्मृति मौजूद है. इस देश को तिरंगे झंडे की नहीं बल्कि भगवा झंडे की जरूरत है.

उसके सारे संगठन आज भी वर्ण व्यवस्था और समाज विरोधी जातिवाद में विश्वास रखते हैं. हजारों साल पुराने शोषण, जुल्म और अन्यायों को वे खत्म नहीं करना चाहते हैं बल्कि उन्हें बनाए रखने के हामी ही हैं. वे सब सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समता और समानता के वाहक नहीं हैं बल्कि उनके मार्ग में सबसे ज्यादा बड़ी बाधाएं बने हुए हैं. वे सब आज भी हिंदुत्व और मनुवाद की राजनीति को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं.

मोदी सरकार के दस सालों के कारनामों पर एक नजर दौड़ना जरूरी है. उसने अपने दस साल के शासन में जनता की एकता पर हमला किया है, सांप्रदायिक नफरत फैलाई है, गंगा जमुनी तहजीब और संस्कृति पर लगातार हमले किए हैं, जनता के आपसी सहयोग और भाईचारे को तोड़ने की भरपूर कोशिश की है, किसानों मजदूरों के अधिकारों और आंदोलनों पर लगातार हमले किए हैं, उसका व्यवहार और सोच एकदम अलोकतांत्रिक, तानाशाहीपूर्ण और फासीवादी है, उसकी मानसिकता और आचरण अव्यावहारिक और जनविरोधी हैं. उसने देशी विदेशी उद्योगपतियों और धनवान लोगों के हितों को आगे बढ़ाने के लिए के अलावा कुछ नहीं किया है.

उसने चुनाव आयोग की निष्पक्षता, पारदर्शिता और ईमानदारी पर बड़े-बड़े सवाल पैदा कर दिए हैं और उसे अपनी कठपुतली बना लिया है. उसने संसद में विपक्षी नेताओं के बोलने पर रोक लगाई है, बाधा उत्पन्न की है, उनके माइक बंद किए हैं और वह जो कानून बना रही है उन कानूनों को बनाने में उसने विशेषज्ञों और विपक्षी पार्टियों से कोई सलाह मसविरा या बहस नहीं की है, उसने जनता को राहत देने का काम नही किया है और उसने अपने हिंदुत्ववादी और मनुवादी शासन और राजव्यवस्था को कायम करने के लिए यह सब किया है.

फिलहाल हुए चुनावों से पहले सरकार की इन तमाम जनविरोधी, संविधान विरोधी और जनतंत्र विरोधी नीतियों पर इंडिया गठबंधन की तमाम पार्टियों ने विचार विमर्श किया, सरकार के सब कामों पर नज़रें दौड़ाई, उसके सब कामों का विश्लेषण और आंकलन किया और उन्होंने पाया के इस सरकार का भारत के संविधान, जनतंत्र और सामाजिक न्याय में, जनता का भाईचारा कायम रखने में और सबको सस्ता सुलभ न्याय देने में, सबका विकास करने में, सबको शिक्षा और स्वास्थ्य देने में, सबको रोजगार और नौकरी देने में उसका कोई विश्वास नहीं है.

उसके पिछले दो सालों के शासन में सत्तर परीक्षाएं लीक हुई हैं, जो यह दर्शा रहा है कि यह सरकार गरीबों और किसानों मजदूरों के बच्चों को नौकरी देना नहीं चाहती और उसने जनहित में लागू किए गए आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों को व्यवहार में जैसे खत्म ही कर दिया है.

इंडिया गठबंधन के नेताओं ने इन सब मुद्दों पर गहन विचार विमर्श किया और एकजुट होकर चुनावों के दौरान इन मुद्दों को गम्भीरता और जोरदार तरीके उठाया, इन सब मुद्दों को जनता के बीच ले गए और इन नारों और कार्यक्रमों को जनता ने अपने सिर माथे पर लिया, और इन्हें अपनाकर गरीब और परेशान जनता ने मोदी सरकार से मुख मोड़ लिया और उसने उसके चार सौ पार के नारे को धराशाई कर दिया, उसके सांसदों की संख्या घटा दी और वह संसद में अपनी मन चाही संख्या को पार नहीं कर पाई.

इसलिए अब संसद में वह एक मजबूत विपक्ष को मजबूती के साथ काम करते देखना नहीं चाहती. वह नहीं चाहती कि भारत का विपक्ष जनता के मुद्दों को उठाये, नौकरी और रोजगार की विफलताओं पर कोई चर्चा करें, लगातार लीक हो रहे परीक्षाओं की चर्चा करे, वह संविधान और जनतंत्र पर कोई चर्चा करे. अब उसे डर लगने लगा है कि विपक्षी इंडिया गठबंधन के लोग संविधान और जनतंत्र के नारे को संसद में जितना उठाएंगे, उससे सरकार और बीजेपी को उतनी ही परेशानी होने वाली है और हो सकता है कि भविष्य में संविधान, आरक्षण, जनतंत्र और उसकी रोजी-रोटी पर किए गए हमलों से परेशान होकर जनता, उसे सरकार से ही बेदखल कर दे.

इसलिए एक सोची समझी साजिश और डर के तहत संसद में ‘जय संविधान’ के नारे लगाने पर जान बुझकर रोक लगाई जा रही है. अब लगने लगा है कि संसद और संसद के बाहर हो रही संविधान और जनतंत्र की मजबूत बहस, आरएसएस और बीजेपी के नेताओं को चैन की नींद नहीं सोने देगी. हमारा गंभीरता से यह मानना है कि अब यह ‘जय संविधान’ का नारा ही, भारत के किसानों, मजदूरों, नौजवानों और छात्रों के भविष्य की रक्षा करेगा. इस नारे को जितना दबाया जाएगा, उतने ही जोरदार तरीके से इस नारे की आवाज पूरे देश में गूंजेगी और यही नारा पूंजीपतियों और संप्रदायिक ताकतों के इस जन विरोधी गठजोड़ को सरकार और सत्ता से बाहर करेगा.

Read Also –

भाजपा-आरएसएस संविधान से ‘समाजवादी और सेकुलर’ शब्द हटाने के लिए माहौल बना रहे हैं
…यानी आप संविधान का पालन करेंगे तो आपको अदालतें धमकायेगी !
संविधान की शपथ लेकर सरकार में बैठे हो गुंडे बदमाशों की तरह काम मत करो
…यानी आप संविधान का पालन करेंगे तो आपको अदालतें धमकायेगी !
माओवादियों की जनताना सरकार का संविधान और कार्यक्रम 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
G-Pay
G-Pay
Previous Post

निजी शिक्षण संस्थान बड़े बड़े आर्थिक और शैक्षणिक घोटालों का गढ़ तो नहीं ?

Next Post

राहुल, स्पीकर और हिन्दुत्व

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

राहुल, स्पीकर और हिन्दुत्व

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

आजादी चरखे से नहीं आई, यह सच है…

October 7, 2024

कन्हैया कुमार कांग्रेस ज्वाइन करेगें ?

September 22, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.