Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

यह डर है या लोगों के विरोध का खौफ है ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 9, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

यह डर है या लोगों के विरोध का खौफ है ?

दिल्ली हाई कोर्ट में वकील के पेशे से जुड़ी एक लड़की और उसकी मित्र ने अमित शाह के 200 लोगों के काफिले के विरोध में CAA-NRC के विरोध में अपने घर में रखी चादर पर नारे लिखकर लहराए

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

पूरा देश अब मान चुका है कि ये सबका साथ, सबका विश्वास नहीं बल्कि सबका विनाश और सबको देशद्रोही और खुद को देशभक्त बताने का जो अभियान चल रहा है, उसमें सबसे बड़ी गलती उन्होंने ही कर दी, जो ऐतबार कर लिया, अच्छे दिनों का जबकि वो सही में जुमला था. इसे जुमलेबाजी के अलावा कुछ भी नहीं आता.

पिछले रविवार को अमित शाह की प्रचार रैली जब लाजपत नगर के अंदर से गुजर रही थी तो दो लड़कियों ने अपने अपार्टमेंट की बालकनी पर जामिया औऱ जेएनयू में स्टूडेंट्स की पिटाई और एनआरसी-सीएए के विरोध में अपना बैनर विरोध स्वरूप लटका दिया. वो सिर्फ दो लड़कियां थीं -सूर्या राजप्पन और उसकी दोस्त लेकिन बैनर देखकर शाह की रैली में चल रहे गुंडों-अंधभक्त उस अपार्टमेंट के नीचे सैकड़ों की तादाद में जमा हो गए. उन्होंने दोनों लड़कियों को जमकर गंदी गालियां निकालीं, उन्होंने निर्भया जैसे नतीजे भुगतने के नारे लगाए. लाजपत नगर के लोकल लोग यह तमाशा अपनी आंखों से देखते रहे. कोई उन लड़कियों की तरफ या सचमुच की निर्भयाओं की तरफ से नहीं खड़ा हुआ. मकान मालिक ने उनसे वह घर खाली करा लिया. वह कह रहा है कि ‘मैंने उन्हें मकान किराये पर देकर गलती की थी.’

दिल्ली का जो समाज निर्भया की घटना पर जींस पहनकर बिंदी लगाकर कैंडल मार्च निकालता है, उन्हें इस घटना पर शर्मसार होना चाहिए. राजधानी के बिल्कुल बीचों-बीच हुई इस घटना को इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने विस्तार से छापा है.

यह वह कथित मर्दवादी समाज है जो किसी फिल्म अभिनेत्री के किसी प्रोटेस्ट में शामिल होने पर अपशब्द कहता है। जेएनयू में दीपिका पादुकोण के जाने पर इस नामर्द समाज ने न जाने क्या क्या टिप्पणियां कल कीं. बेशक वो अपनी फिल्म के प्रमोशन की वजह से गई लेकिन वहां उसका जाना एक रिस्क भी तो है. वो समाज जो उसे अपशब्द कह रहा है, उसकी फिल्म न देखे. आखिर सलमान खान की फिल्म दबंग 3 आई और चुपचाप उतर गई. उसकी फिल्में हिट कराने वाले युवक-युवतियां तो सड़कों पर पुलिस की लाठियां-गोलियां खा रहे थे. बॉलिवुड के इस बड़े स्टार की फिल्म पिटने से बॉलिवुड को समझ में आ गया कि ताकत की चाबी कहां है लेकिन किसी बड़े आंदोलन में किसी बड़े बॉलिवुड स्टार के आने या न आने को हम संकीर्ण नज़रिए से देखें, जो आया वो हमारा है, जो नहीं आया या आए ये उनका ज़मीर है.

इस घटनाओं पर भी गौर देने की जरूरत है. तमिलनाडु में कुछ लोगों ने अपने घर के आगे की सड़कों पर सिर्फ रंगोलियां बनाईं, 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया, नए राजा के हिसाब से रंगोली बनाना भी अब अपराध है. S.R. दारापुरी, 70 साल के बुजुर्ग, रिटायर्ड IPS अपनी कॉलोनी में अपने घर के बाहर खड़े थे, सिर्फ एक कागज लेकर. जिसपर सिर्फ इतना लिखा – ‘NO NRC’. पुलिस की जीप आई, घर से उठा ले गई, धाराएं लगीं, दंगा भड़काने की. और जेल में ठूंस दिया गया

इतिहासकार रामचन्द्र गुहा बस एक कागज लेकर सड़क पर खड़े थे, उन्हें धक्का देते हुए पुलिस जेल ले गई. BHU में बेहद शांतिपूर्ण तरीके से प्रोटेस्ट कर रहे 25 छात्रों, प्रोफेसरों, पत्रकारों को पकड़कर जेल में डाल दिया गया. ये याद रहे कि वहां किसी भी तरह की कोई हिंसा नहीं रही थी. साफ है दूसरा मत रखने पर आपको जेल मिलना तय है. जेएनयू विश्वविद्यालय के बाहर मेन गेट को दो दिन तक एक भीड़ घेरे रही, जैसे कि कारसेवा के लिए आई हो, उसे किसी भी तरह की आलोचना पसन्द नहीं थी, उसे किसी भी तरह के नारे से दिक्कत थी, वह बस नोच लेना चाहते थे, कुचल देना चाहते थे.

यह है मोदी जी के सपनों का भारत..।

उनका इतिहास हमेशा घृणा, नफरत, भाई से भाई को लड़ाना और कट्टरता के साथ अपने राजनीति हितों को साधना..।

– मोदी जी बधाई हो, आप पास हो रहे हो..। pic.twitter.com/y4LKOY3Tv3

— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) January 8, 2020

बहरहाल, देश में इस समय जो माहौल बना है, वह आगे क्या रुख लेगा किसी को पता नहीं लेकिन आज जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना असम दौरा वहां के स्टूडेंट्स की धमकी के बाद खत्म करना पड़ा है, वह देश का मूड बताने के लिए काफी है. मोदी-शाह सरकार को चेहरे से स्टूडेंट्स ने नकाब उतार दिया है. ये दोनों संघी कार्यकर्ता सबकुछ कर सकते हैं लेकिन सरकार नहीं चला सकते. साबित हो चुका है. संघ के हाथों से तोते उड़ गए हैं. बस धैर्य से शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहे. हर नया दिन इनके ताबूत में एक और कील ठोंक देता है.

  • युसुफ किरमानी एवं अन्य

Read Also –

आप टेंशन मत लीजिए, जब तक आपके खुद की ‘सरकारी हत्या’ नहीं होती
अमित शाह जी, इससे अच्छा तो आप इमरजेंसी ही लगा दो
जल्द ही हिटलर की तरह ‘अन्तिम समाधान’ और ‘इवैक्युएशन’ का कॉल दिया जाएगा
CAA-NRC का असली उद्देश्य है लोगों का मताधिकार छीनना

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

देश को 15-20 साल पीछे ले गई मोदी सरकार

Next Post

पाकिस्तान : भारतीय वीजा के इंतजार में हिन्दुओं का अस्थिकलश

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

पाकिस्तान : भारतीय वीजा के इंतजार में हिन्दुओं का अस्थिकलश

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

क्षत्रियों के नाम में ‘सिंह’ लगाने का रहस्य

January 24, 2020

युग प्रभात के ओजस्वी स्तम्भ प्रो. साईबाबा को बुलन्द सैल्यूट

October 13, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.