Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

जी. एन. साईंबाबा : गोलियथ के खिलाफ संघर्षरत डेविड

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 14, 2022
in ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
जी. एन. साईंबाबा : गोलियथ के खिलाफ संघर्षरत डेविड
जी. एन. साईंबाबा : गोलियथ के खिलाफ संघर्षरत डेविड

माओवादियों से संबंध और देशद्रोह के आरोप में सजा काट रहे दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व प्रोफेसर जी. एन. साईबाबा को बंबई हाईकोर्ट ने रिहा कर दिया है. साईबाबा की रिहाई का आदेश कोर्ट की नागपुर बेंच ने दिया है. बेंच ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि साईबाबा को तुरंत रिहा किया जाए.

साईबाबा ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी. निचली अदालत ने साल 2017 में साईबाबा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. इस सजा को पलटते हुए जस्टिस राहुल देव और अनिल पानसरे की बेंच ने प्रोफेसर को रिहा करने का आदेश जारी कर दिया है.

You might also like

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

जी. एन. साईबाबा कौन है तो मनीष आजाद ने इस सन्दर्भ में ‘जी. एन. साईंबाबा: गोलियथ के खिलाफ संघर्षरत डेविड’ शीर्षक दो साल पहले लिखी गई इस लेख में अच्छी जानकारी दी है. आप भी पढ़ें –

जैसे-जैसे ठंड बढ़ रही है, मुझे जेल के अपने लोग याद आ रहे हैं. जेल में बीमार, बुजुर्ग और गरीबों के लिए सर्दी सबसे बुरा मौसम होता है. फिर यह सोच कर दिल भारी हो जाता है कि 90 प्रतिशत विकलांग, नागपुर के ठंडे अंडा सेल में बंद राजनीतिक कैदी जी. एन. साईंबाबा की इस समय क्या स्थिति होगी ? अभी ही खबर आयी कि रोजाना महज कुछ मिनटों के लिए सूरज की गर्मी पाने के लिए उन्हें इस स्थिति में भी करीब 10 दिन भूख हड़ताल पर जाना पड़ा.

मुझे लगता है कि विटामिन-डी की जरूरत साईबाबा से ज्यादा इस भारतीय ‘लोकतंत्र’ को है जो ‘सूरज’ की रोशनी के अभाव में ‘गठियाग्रस्त लोकतंत्र’ में बदल चुका है और आज अनेकों फ्रैक्चर का शिकार हो चुका है. ग़ौरतलब है कि साई बाबा कोर्ट के आदेश के बावजूद बुनियादी सुविधाएं ना मिलने के कारण विगत 26 अक्टूबर से 6 नवंबर तक भूख हड़ताल पर थे. परिवार समेत बाहरी दुनिया को इसकी खबर भी नहीं थी.

हर व्यक्ति की दो मां होती हैं. एक उसकी मां और दूसरी उसकी भाषा. इसी साल अगस्त में जब उनकी मां मृत्यु के कगार पर थी तो न उन्हें उनसे मिलने के लिए पैरोल दी गयी और ना ही काफी आग्रह के बावजूद मां के साथ उनकी विडियो कांफ्रेंसिंग से मुलाक़ात कराई गयी. मां की मृत्यु के कई दिनों बाद ही उन्हें यह खबर मिली कि अब उनकी मां इस दुनिया में नहीं रही.

उनकी अपनी भाषा तेलगू में उन्हें न कोई किताब दी जा रही है और न ही तेलगू में किसी पत्र का आदान प्रदान होने दिया जा रहा है. क्या भाषा भी कानूनी और ग़ैर-कानूनी होती है ? क्या भाषा भी राष्ट्रद्रोही होती है ?

जी. एन. साईंबाबा दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक कॉलेज में अंग्रेजी साहित्य के अध्यापक थे और कालेज के कैंपस में ही अपने परिवार के साथ रहते थे. यह अजीब बात है कि उन्हें कानूनी तरीके से गिरफ्तार करने की बजाय कालेज से घर आते हुए उन्हें रास्ते से किडनैप किया गया. किसी को तत्काल यह खबर न पता चले, इसलिए उनके ड्राईवर को भी उठा लिया गया. उनके परिवार वालों और दोस्तों को उनकी गिरफ्तारी की खबर तब मिली जब उन्हें नागपुर में कोर्ट में पेश किया गया.

ऐसे दृश्य पहले लैटिन अमेरिकन तानाशाही वाले देशों की विशेषता हुआ करते थे, अब हमारे देश की विशेषता बन चुकी है. बहरहाल मार्च 2017 में जब उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी तो विधि विशेषज्ञों को यह देखकर घोर आश्चर्य हुआ कि पुलिस ने उन पर जितनी भी धाराएं लगायी थी, उन सभी में उनको आजीवन कारावास सजा दी गयी है. यह अपवाद है और शायद महाराष्ट्र का पहला केस है, जहां सभी धाराओं में आजीवन सजा दी गयी है. इससे सरकार और न्याय व्यवस्था की मिलीभगत का पता चलता है और न्याय की जगह बदले की भावना नज़र आती है.

दरअसल जी. एन. साईंबाबा बहुत पहले से ही सरकार के निशाने पर थे और इसका कारण था- उनका स्वतंत्र दिमाग. इतिहास गवाह है की दुनिया की सभी फासीवादी-तानाशाही सरकारें स्वतंत्र दिमाग से बेहद खौफ खाती है. जी. एन. साईंबाबा खुद एक इंटरव्यू में कहते हैं कि मुझसे छुटकारा पाने का बस एक ही तरीका उनके पास रह गया है कि मुझे जेल में फेंक दिया जाय.

डेविड और गोलियथ के बीच चले युद्ध का मिथकीय किस्सा मैंने पहली बार किसी सन्दर्भ में उन्हीं से सुना था. बाद में मुझे जब उनके जीवन-संघर्ष के बारे में पता चला तो जी. एन. साईंबाबा खुद मुझे डेविड नज़र आने लगे. एक गरीब-दलित परिवार में 90 प्रतिशत विकलांगता के बावजूद वे मध्य भारत के लगभग सभी आदिवासी इलाकों में गए. वे खुद बताते हैं कि गाड़ी से उतरने के बाद आदिवासी लोग उन्हें बारी बारी से अपने कन्धों पर उठाते हुए उन्हें दूर दराज के जंगल पहाड़ों में ले गए और उन्हें अपनी कठिनाइयों और संघर्षों से परिचय कराया.

इसी प्रक्रिया में सत्ता रूपी शक्तिशाली गोलियथ को हराने का उनका इरादा और दुनिया बदलने का उनका संकल्प चट्टानी शक्ल लेने लगा. यही कारण था कि आदिवासियों के खिलाफ जब ‘ऑपरेशन ग्रीन हंट’ व ‘सलवा जुडूम’ के नाम से भारत सरकार ने खुले युद्ध का एलान किया तो इस युद्ध के खिलाफ सबसे मुखर आवाज जी. एन. साईंबाबा की ही थी.

‘फोरम अगेंस्ट वार ऑन पीपल’ (Forum Against War on People) के मंच से न सिर्फ वे अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे, बल्कि जनता के खिलाफ इस युद्ध के विरोध में एक ‘सामूहिक चेतना’ का निर्माण करने का भी प्रयास कर रहे थे और यह क्रूर विडम्बना देखिये की खुद जी. एन. साईंबाबा को भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने का दोषी ठहरा दिया गया.

जी. एन. साईंबाबा के बारे में जज ने कहा कि भले ही उनका शरीर काम न करता हो, लेकिन उनका दिमाग बहुत तेज है. जब मैं इस ‘लोकतंत्र’ के बारे में सोचता हूं तो मुझे ठीक इसका उल्टा नज़र आता है. यानी भले ही इस लोकतंत्र का शरीर यानी संस्थाएं काम कर रही हों, लेकिन यह लोकतंत्र ‘ब्रेन डेड’ हो चुका है.

Read Also –

भारतीय जेल एक हत्या घर : पांडु नरेटी की संस्थानिक हत्या के खिलाफ एकजुट हो !
भाकपा माओवादी एक राजनीतिक पार्टी है और उनके कार्यकर्ता व नेताओं की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक बंदी का दर्जा मिलें
भारत में आधुनिकता की विभिन्न धाराओं की पराजय और आरएसएस की जीत कैसे हुई ?
गिरफ्तार दलित मानवाधि‍कार कार्यकर्ताओं को बिना शर्त रिहा करो
वरवर राव समेत सभी राजनैतिक बंदियों की अविलंब रिहाई सुनिश्चित करो
सत्ता-राजनेता-अपराधी-पुलिस गठजोड़ पर 100 पन्नों वाली एन. एन. वोहरा रिपोर्ट को क्यों छिपा रही है मोदी सरकार ?

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

हाशिये के लोगों के बारे में सोचें और वैज्ञानिक चिंतन के लिए लड़ें

Next Post

जी. एन. साईंबाबा की रिहाई मसले पर हत्यारों-बलात्कारियों के संरक्षक सुप्रीम कोर्ट की साख दांव पर

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

by ROHIT SHARMA
March 22, 2026
ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
Next Post

जी. एन. साईंबाबा की रिहाई मसले पर हत्यारों-बलात्कारियों के संरक्षक सुप्रीम कोर्ट की साख दांव पर

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

महात्मा गांधी की हत्या में संघ के डरपोक सावरकर की भूमिका

July 15, 2019

देविंदर सिंह का ‘सीक्रेट मिशन’

January 18, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.