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Home गेस्ट ब्लॉग

आदिवासी महिलाओं की हत्या में मशगूल छत्तीसगढ़ पुलिस

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 12, 2019
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छत्तीसगढ़ सरकार इन हत्याओं पर खामोश हैं. कितनी भी सरकारें बदल लो, मशीनरी का कैरेक्टर नहीं बदलता. न तो उसे अनाथों की चीख सुनाई देती है और न तो बेगुनाह आदिवासियों की विधवाओं का विलाप. सीएम भूपेश बघेल ने कहा था, ‘हम माओवादी समस्या के समाधान के लिए आदिवासियों से बात करेंगे.’ उन्हें तीन महीने के राकेश से बात करनी चाहिए कि उसे क्या चाहिए ? उसे ’मां’ चाहिए.

इस तस्वीर में दिख रहे चार बच्चों में से सबसे छोटा राकेश है, जिसकी उम्र महज तीन महीने की है. बड़े की भी उम्र 4 साल होगी. राकेश ने चार दिनों से मां का दूध नहीं पिया है. अब कभी नहीं पी पायेगा. जो तीन और बच्चे दिख रहे वो भी अब कभी अपनी मां की गोद को महसूस नहीं कर पायेंगे. इनकी मां पुडियाम सुक्की को इसी शनिवार को सुरक्षा बल के जवानों ने पीठ में गोली मार दी.

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जी हां, छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के गोदेलगुडा गांव में रहने वाली सुक्की को पुलिस के जवानों ने पीठ पर उस वक्त गोली मारी जब वो अपने छोटे बच्चों को यह कहकर घर से निकली थी कि अभी आकर दूध पिलाती हूं. एक और महिला कलमु देवे को भी जवानो ने गोली मारी लेकिन वो बच गई क्योंकि गोली उसकी जांघ में लगी.

शनिवार 2 फरवरी को लकड़ी लेने जंगल गई महिलाओं पर सुरक्षाबल के जवानों ने गोली मार दिया. गोलीबारी की आवाज सुनते ही महिलायें चिल्लाती रहीं कि हम नक्सली नहीं हैं, जंगल में लकड़ी लेने आई हैं. बावजूद इसके उन जवानों ने महिलाओं को गोली मार दी.

पुलिस की गोली से मारी गई पोडिय़म सुक्की के चार बच्चे हैं, इसमें सबसे छोटा 3 महीने का नवजात है और अभी मां के दूध पर ही निर्भर था, जबकि बड़े बच्चे की उम्र 6 साल है.

एस.पी. सुकमा कहते हैं कि वह निर्दोष थे लेकिन हत्या की बात नहीं मानते. वह कहते हैं कि क्रास फायरिंग में गोली लगी. अब मजिस्ट्रेट जांच करेगा और कभी न कभी अपनी रिपोर्ट भी पूरी कर लेगा. फिर हम यह किस्सा भूल जाएंगे लेकिन इन बच्चों का क्या होगा ?

छत्तीसगढ़ सरकार इन हत्याओं पर खामोश हैं. कितनी भी सरकारें बदल लो, मशीनरी का कैरेक्टर नहीं बदलता. न तो उसे अनाथों की चीख सुनाई देती है और न तो बेगुनाह आदिवासियों की विधवाओं का विलाप. सीएम भूपेश बघेल ने कहा था, ‘हम माओवादी समस्या के समाधान के लिए आदिवासियों से बात करेंगे.’ उन्हें तीन महीने के राकेश से बात करनी चाहिए कि उसे क्या चाहिए ? उसे ’मां’ चाहिए.

वहीं, आम आदमी पार्टी की कार्यकर्ता सोनी सोरी का कहना है कि वहां किसी भी माओवादी से मुठभेड़ या क्रॉस फायरिंग की घटना घटित नहीं हुई है. घटना के प्रत्यक्षदर्शी इस मामले में न्यायालय में अपनी बात भी कहने के लिए तैयार हैं.

जवानों ने सुक्की और एक अन्य महिला देवे को हत्या के उद्देश से जानबूझकर गोली मारी थी, जिससे दोनों महिलायें घायल हो गई. सुक्की को सीने में एवं देवे को जांघ में गोली मारी गई, जबकि तीसरी महिला हुंगी पर जवानों का निशाना चुक गया और वह बच गई.

सुक्की को गोली लगने के बाद गांव की महिलाओं ने पानी पिलाने की कोशिश की पर जवानों ने उसे पानी पीने नहीं दिया, जबकि सुक्की अंतिम वक्त में भी बोल रही थी “मां, मैं मर रही  हूं…”

यह घटना करीब खड़ी महिलायें देखती रह गई. फ़ोर्स के लोग सुक्की को वर्दी पहनाने लगे तो महिलाओं ने विरोध करते हुए कहा कि “यह चार बच्चों की मां है, इसे वर्दी पहनाकर नक्सली मारकर लायें हैंं, यह दिखाकर पैसा खाओगे क्या ?”

इसके बाद वर्दी पहनाना छोड़ जवान घायल सुक्की को पॉलीथीन में बांध कर ले गये. सुक्की को गोली लगने से अधिक रक्तस्राव और बाद में पॉलीथीन में बांधने के कारण घुटन से उसकी मौत हुई होगी.

लेकिन, इस मामले में एसपी सुकमा ने यह दावा किया है कि घायल महिला देवे को हम लेकर आये थे और उसका इलाज करवा रहे हैं जबकि सुक्की को जिन्दा रहते पॉलीथीन में बांधते समय उनकी मानवता कहां थी ?

जवानों ने महिलाओं को यह भी कहा कि दूसरी महिला देवे को पूसवाड़ा कैम्प लेकर आ जाओ. हम उसका इलाज करेंगे और वहां से सुक्की को पॉलीथीन में बांधकर लेकर वे लोग चले गये. इस घटना के बाद तीसरी महिला बच निकली थी, जो अभी गांव में है. बस्तर में आदिवासियों की हत्याएं सुरक्षा बल के जवान अवार्ड पाने के उद्देश्य से कर रहे हैं.

सुकमा जिले के मंत्री कवासी लखमा ने 8 दिनों में कारवाई का आश्वासन दिया है. ग्रामीणों और हमारी मांग है कि पहले मंत्री कवासी लखमा गोडेलगुड़ा गांव जाएंं और ग्रामीणों से मिलकर घटना के बारे में जानकारी लें.

छत्तीसगढ़ सरकार पीड़ित परिवार की पूरी जिम्मेदारी ले. जिन हत्यारे जवानों ने गोली मारकर सुक्की और देवे को घायल किया और पॉलीथीन में बांधकर सुक्की की हत्या की, उन्हें शीघ्र गिरफ्तार किया जाए.

ऐसी घटना की पुनरावृति को रोकने के लिए सरकार ठोस कदम उठाये, इन मांगों को आठ दिनों के भीतर सरकार पूरी नहीं करती है तो मैं (सोनी सोरी) पीड़ितों के परिवार और सैकड़ों ग्रामीणों के साथ अनशन पर बैठूंगी.

(प्रभात सिंह, हिमांशु कुमार व अन्य की रिपोर्ट के आधार पर)

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Tags: पुलिससुकमासुक्की
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