Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

मोदी के प्रचार अभियान की विशेषताएं

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 26, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
मोदी के प्रचार अभियान की विशेषताएं
मोदी के प्रचार अभियान की विशेषताएं
जगदीश्वर चतुर्वेदी

मोदी का प्रचार अभियान रेसकार में भाग लेने वाली कार की तेज गति से चला रहे हैं. यह कार इतनी तेज गति से दौड़ती है कि इसमें एक्सीडेंट भी उतना ही तेज होता है जितना तेज वह दौड़ती है. यह एक तरह का इनफार्मेशन शॉक पैदा करती है. मोदी ने भी यही किया है. उसने अनेक को इनफार्मेशन शॉक दिया है.

मोदी ने जिस गति से गुजरात को चलाया है उसमें कार रेस की तरह लगातार तगड़े एक्सीडेंट होते रहे हैं, किंतु उनके एक्सीडेंट की खबरें तो खबरें ही नहीं बन पायीं क्योंकि कार रेस का एक्सीडेंट कोई खबर नहीं होता बल्कि उसे सामान्य एक्सीडेंट के रूप में पेश किया जाता है. उसे सामाजिक खतरा नहीं माना जाता.

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

मोदी के शासन में जिस तरह की कार रेस चली है उसने यह बोध निर्मित किया है कि मोदी से कोई सामाजिक खतरा नहीं है क्योंकि मोदी हाइपररीयल है, कार रेस का हिस्सा है. कार रेस में एक्सीडेंट होना सामान्य बात है, इसे गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है.

मोदी की हाइपरीयल राजनीति की विशेषता है कि किसी को भी नहीं मालूम होता कि सूचनाएं जनता में कैसे जा रही हैं. हम सब जानते हैं कि कोई रिमोट कंट्रोल है, जो सूचनाओं और प्रचार को नियंत्रित कर रहा है किंतु कौन है इसका किसी को पता नहीं है. मोदी का नया रूप ट्रांसप्लांटेशन की पद्धति की देन है.

अभी तक हम संप्रेषण के जिस रूप के आदी थे वह रूप परिवहन और संचार के जरिए प्राप्त हुआ था. ठोस रूप हुआ करता था. किन्तु, पीएम मोदी हाइपररीयलिटी की देन है. उनका संप्रेषण ट्रांसप्लांटेशन की देन है. मुखौटा संस्कृति की देन है. वह वास्तव समय और स्थान के साथ जल्दी एकीकृत हो जाता है.

मोदी की हाइपररीयल प्रचार रणनीति मूलत: मैग्नेटिक निद्राचारी की रणनीति है. हाइपररीयल प्रौपेगैण्डा वातावरण बनाता है. यह निर्मित वातावरण है, स्वाभाविक वातावरण नहीं है. इसमें दाखिल होते ही इसकी भाषा बोलने के लिए मजबूर होते हैं. इसके स्पर्श में बंधे रहने के लिए अभिशप्त होते हैं.

एक बार इस वातावरण में दाखिल हो जाने के बाद वही करते हैं जो वातावरण निर्देश देता है. आप बातें नहीं करते, बहस नहीं करते सिर्फ निर्मित वातावरण के निर्देशों के अनुसार काम करते हैं. इस क्रम में धीरे-धीरे आपकी चेतना भी बदलनी शुरू हो जाती है. इसी को चुम्बकीय प्रचार अभियान का जादुई असर कहते हैं. इसी को ‘मोदी लहर’ और ‘मोदीमीनिया’ कहते हैं.

मोदी की मीडिया लहर एक तरह का ‘माइक्रोवेब डिसकम्युनिकेशन’ है. इलैक्ट्रिक संवेदना और भावों का निर्माण है. इसमें आंकड़े चकाचौंध करने वाले हैं. भाषण भ्रमित करने वाले हैं. प्रौपेगैण्डा के जरिए ‘सिंथेटिक कल्ट’ पैदा किया गया है. इसके परिणामस्वरूप बौने लोग बड़े नजर आने लगते हैं. महानायक नजर आने लगते हैं. यही वजह है कि बिना किसी ठोस सकारात्मक योगदान के बिना मोदी महानायक नजर आ रहा है.

मोदी की रणनीति है सोचो मत मानो ! बोलो मत मुझे कहने दो ! सच वह है जो मैं कहता हूं ! इस भावबोध को उसने कांग्रेस की जनविरोधी नीतियों से उपजे असंतोष के आख्यानों में लपेटकर गले उतारने की कोशिश की है.

मोदी की मीडिया रणनीति यह है कि मैं मैदान में हूं तो सिर्फ़ मेरे बारे में सोचो ! इसके लिए सबसे पहले मीडिया में समय और स्थान को घेरा गया, फिर बहसों को टीवी टाॅक-शो के ज़रिए अपदस्थ किया गया. फलत: चुनाव हो रहा है लेकिन ज़मीनी स्तर पर बहस नहीं हो रही. मीडिया निर्मित मोदी फेक है और उसे ही असली सच मानने के लिए बाध्य किया जा रहा है.

मीडिया निर्मित संघी सच ही एकमात्र सच है ! मीडिया के पब्लिक शो में संघी सच से भिन्न बोलोगे तो सुनियोजित जत्थों के हमलों और हंगामेबाजी के लिए तैयार रहो. मोदी सच के अलावा सार्वजनिक जीवन में अन्य सच कहोगे तो पिट सकते हो. बोलना है तो मोदी के पक्ष में बोलो वरना गाली खाओ, चांटे खाओ, कालिख झेलो, लात खाओ !

यानी मोदी की मीडिया प्रस्तुतियों के पूरक के तौर पर हर गली – मुहल्ले में संघ के आक्रामक जत्थे परंपरागत आतंक भाव के साथ सक्रिय हैं. यही वजह है कि एक तरफ़ मीडिया आक्रमण दूसरी ओर संघ के ‘ख़ाकी बटुकों’ के शारीरिक हमले जारी हैं.

नरेन्द्र मोदी की लहर ने एक काम किया है उसने ग़ैर-समस्यामूलक मध्यवर्गीय मन को आकर्षित किया है. जो लोग समस्याओं की जटिलताओं और देश के परिप्रेक्ष्य में सोचने के आदी नहीं हैं, उनको मोदी के मीडिया प्रचार ने आकर्षित किया है. नव्य-आर्थिक उदारनीति ने बड़े पैमाने पर जिस मध्यवर्ग की मनोदशा बनायी थी, उसका नायक मनमोहन न होकर मोदी है.

मनमोहन नीति ने ‘खाओ पीओ मौज करो’ की मनोदशा पैदा की, साथ ही परजीविता को मूल्यवान बनाया. इस परजीविता का मोदी ने बड़ी चतुराई के साथ दोहन किया है और परजीविता को आश्वासन दिया है – तुम मुझे वोट दो, मैं तुम्हारा काम करुंगा.’

परजीविता को विकास की चाशनी में कुछ इस तरह परोसा गया है कि सब कह रहे हैं मोदी मीठा है ! परजीविता और समस्याहीन मन का इस क़दर दोहन पहले कभी नहीं हुआ था. अब गौतम अदानी कह रहे हैं देस में कोई भूखा नहीं सोएगा. पूछो अदानी किस हैसियत से बोल रहा है ? देस को सरेआम सत्ता की मदद से लूटने वाला शख्स यह सब बोल रहा है. यानी भुखमरी आपके घर आने वाली है. आप मोदी को वोट दें, अदानी आपको राशन देगा. अदानी दानी, आप भिखारी और मोदी जी भिखारी और अदानी के संरक्षक.

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

ब्राह्मण राज्य स्थापित कर अपने ही पैरों में गुलामी की जंजीर पहनने के लिए बेताब शुद्र

Next Post

दक्षिणपंथी एलन मस्क के ट्विटर पर मालिकाना हक से दक्षिणपंथी ताकतों को बल मिलेगा

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

दक्षिणपंथी एलन मस्क के ट्विटर पर मालिकाना हक से दक्षिणपंथी ताकतों को बल मिलेगा

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

डॉ. लहरी का मुख्यमंत्री योगी से मिलने से इनकार

June 9, 2022

‘वीर’ सावरकर के 1913 और 1920 के माफ़ीनामों का मूलपाठ

June 14, 2019

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.