Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

युद्ध की लालसा में सत्ता पर विराजमान युद्ध पिशाच

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 4, 2019
in ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

युद्ध की लालसा में सत्ता पर विराजमान युद्ध पिशाच

युद्ध पिशाच देश की सत्ता पर विराजमान है. युद्ध की लालासा लिये देश आज चुनाव के मुहाने पर खड़ा है. इस चुनाव में सत्ताधारी भाजपा-आरएसएस के पास गिनाने के लिए कोई काम नहीं है सिवा युद्ध की लालसा के. लाख जतन करने के बाद भी देश में दंगा नहीं छिड़ रहा है. सोशल मीडिया पर बिठाये दंगाई और मुख्य धारा की मीडिया के जी-तोड़ प्रयास के बाद भी देश में दंगा नहीं छिड़ पा रहा है. देश की सीमा पर सीआरपीएफ के 44 जवानों की हत्या के बाद पाकिस्तान का ही एक मात्र सहारा था, ताकि देश को युद्ध के नाम पर एकजुट कर एक बार फिर सत्ता पाई जा सके. मुख्यधारा की मीडिया ने ऐड़ी-चोटी का जोर लगाकर देश को युद्धोन्माद में झोंकने का प्रयास किया.




देश के प्रधानमंत्री पद पर विराजमान नरेन्द्र मोदी सीआरपीएफ के जवानों की हत्या के बाद विदेशी चैनल ‘डिस्कवरी’ के एक शूटिंग में व्यस्त थे. लोगों ने प्रधानमंत्री का चुनाव किया था, पर यह तो डिस्कवरी चैनल के लिए एक ‘जानवर’ बन गये, जिसे बेचकर डिस्कवरी चैनल वाले पैसे कमायेंगे. डिस्कवरी चैनल से मुक्ति पाने के बाद देश के प्रधानमंत्री सीआरपीएफ के जवानों की हत्या के कई घंटे बाद जमकर नाश्ता किये और फिर धुआंधार चुनाव प्रचार में निकल गये. देश को राष्ट्रवादी युद्धोन्माद में झोंकने के बाद पाकिस्तान ने भारतीय पायलट अभिनंदन को एक हवाई हमले में पकड़ लिया और इस राष्ट्रवादी युद्धोन्माद की हवा निकाल दी. लगे हाथ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खां ने पाकिस्तानी संसद में अपने 22 मिनट के स्पीच में एक ओर जहां नरेन्द्र मोदी और इस मुख्यधारा के इस चुनावी राष्ट्रवादी युद्धोन्माद पर कड़ा प्रहार किया, वहीं अभिनंदन को रिहा कर अपने शांति के पैगाम को पुरजोर तरीका से दुनिया के सामने रखा और देश की सत्ता पर विराजमान इस युद्धपिशाच को बेनकाब कर दिया.




इस युद्ध पिशाच को बेनकाब करने की इस कड़ी में सोशल मीडिया ने अपना शानदार भूमिका निभाया. यही कारण है कि सोशल मीडिया के जनवादी स्वरूप पर आरएसएस-भाजपा की भृकुटि तनी हुई है और इसको नियंत्रित करने के एक-से-एक तरीके आजमा रही है. सोशल मीडिया पर लिखने वाले लोगों को उठाकर जेलों में बंद करना, उसके खिलाफ अपने भक्तों की गाली-गलौज करने वालों की टीम को छोड़ना, दंगाईयों को उकसाना आदि जैसे कारनामे करने के बाद भी सोशल मीडिया पर युद्ध के खिलाफ लिख रहे लोगों की कमी नहीं है.

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

वक्त के ऐसे ही अंतराल में सोशल मीडिया पर अप्रवासी भारतीय अवि डांडिया ने एक खुलासा किया है, जिससे न केवल देशवासी थर्रा उठा है बल्कि इस युद्धपिशाच का खूनी चेहरा जगजाहिर हो गया है. हां, यह भी सच का एक आयाम हो सकता है कि अवि डांडिया द्वारा सोशल मीडिया पर खुलासा किया गया एक ऑडियो टेलिफोनिक बातचीत एडिटेड हो, पर अगर इसमें जरा भी सच्चाई का पहलू हो तो यह इस देश के लिए भयानक सच है, जिसका नंगा चेहरा उजागर हुआ है. यहां हम अवि डांडिया द्वारा दिये गये टेलिफोनिक ऑडियो बातचीत का लिखित स्वरूप प्रस्तुत कर रहे हैं, जिसे देश के लाखों-करोड़ों लोगों ने देखा है और लगातार शेयर भी किया है :




अमित शाह – देश की जनता को गुमराह किया जा सकता है और हम मानते भी है चुनाव के लिए युद्ध करने की ज़रुरत है.

अनजान महिला – आपके कहने से ये तो नहीं होता है अमितजी बिना मुद्दे के आप युद्ध कैसे करेंगे. अगर आतंकवादी हमला करते है तो आतंकवादी हमले की करवाई हो सकती है.

राजनाथ सिंह – जवानो के सवाल पर हमारी देश बहुत सेंसेटिव है, बहुत संवेदनशील है भावना उनके अंदर कूट कूट कर भरी है.

अनजान महिला – देश के जवानो को शहीद करवाना है ?

राजनाथ सिंह – काम के लिए कमज़ोर होते है ?

अनजान महिला – एक-दो से कुछ भी नहीं होगा, उरी किया था कुछ भी नहीं हुआ. अभी चुनाव है, देश की सुरक्षा को लेके आप बड़ा मुद्दा बना सकते है. उसपे राजनीति खेलिए.

राजनाथ सिंह – देश की सुरक्षा से जुड़े हुए सवालो पर इस तरह की राजनीती की जानी चाहिए.

अनजान महिला – राजनीति के लिए आप युद्ध करना चाहते है ? एक काम करते है कश्मीर में या कश्मीर के आस पास…




राजनाथ सिंह – जम्मू और श्रीनगर

अनजान महिला – वहा ब्लास्ट करेंगे, कुछ आर्मी डेड, कुछ पैरामिलिटरी फोर्सेज डेड, या कुछ CRPF डेड. एक 100-50 जवान मरेंगे तो सारे देश के देशभक्ति एक जगह हो जाएगी…

ट्रैक बदला … म्यूजिक

राजनाथ सिंह – बहादुर जवानो के शहादत पर इस तरीके की राजनीति आनी चाहिए.

अनजान महिला – क्या गन्दी पॉलिटिक्स है अमित जी ?

अमित शाह – नहीं, ये पॉलिटिक्स नहीं है भाई.

अनजान महिला – तो फिर है क्या ये ? पॉलिटिक्स ही है गन्दी पॉलिटिक्स.

अमित शाह – मुझे सीधा पूछ रहे हो ? सुनिए अब, क्यों हुआ कैसे हुआ.

अनजान महिला – मुझे नहीं सुनना है अमित जी, वैसे भी मैं नहीं करुंगी तो कोई और कर देगा. बॉम ब्लास्ट करवाना है बॉम ब्लास्ट करवा देते हैं. आप लोग जैसे चाहते है वैसा हो तो जाएगा. देश के जवान शहीद होंगे उनके घर का माहौल क्या होगा, आपने कभी सोचा है उसके बारे में ?




अमित शाह – देश के हर सैनिक घर का वातावरण क्या होगा ?

अनजान महिला – खौफ बैठ गया है और क्या ?

अमित शाह – डर बैठ रहा है, खौफ बैठ रहा है, और कोई रास्ते नहीं होते.

अनजान महिला – रास्ते तो बहुत होते है अमित जी, EVM था न आपके पास, ये सैनिकों को मरवाना जवानो को मरवाना ये मुझे समझ में नहीं आ रहा है. फिर भी आप चाहते हैं तो ब्लास्ट करवा देंगे. सौ पचास जवान मरेंगे, वैसे भी आप ही कहते हैं ना जवान सेना में भर्ती होते हैं शहीद होने के लिए लेकिन दुश्मन के साथ अब आप लोग भी दुश्मन बने हुए हैं सेना के तो कौन क्या कर सकता है ?

अमित शाह – ऐसा ही होगा हम कैसे बदल सकते हैं उसको ?

अनजान महिला – मुझे बहस नहीं करनी आपसे, काम कर देंगे, पैसे भिजवा दीजियेगा और 12, 13 फरवरी तक ये सारा कुछ ताम-झाम करके आपको मैं फिर फ़ोन करती हूँ. पैसे भिजवा दीजियेगा.

अमित शाह – मै बताता हूं.

https://www.youtube.com/watch?v=gcgT85nGKqA

अवि डांडिया द्वारा वायरल किया गया टेलिफानिक बातचीत का वीडिया

अगर सवाल उठ रहे हैं तो, उसका जवाब भी सम्बन्धित सत्ता को दिया जाना चाहिए. केवल फेक है, फर्जी है कहकर बातें टाली नहीं जा सकती क्योंकि अवि डांडिया जिस दृढ़ता से इस सवाल को उठा रहे हैं कि उन्हें खरीदने की कोशिश हो रही है, वह एक जांच के वगैर संभव नहीं है. अब यह अलग बात है कि हमारी जांच एजेंसियों की निष्पक्षता कितनी संदिग्ध है, यह अब किसी से छुपी नहीं है.




बोधसत्व की कविता में युद्ध की लालसा लिये शासकों का चेहरा देखा जा सकता है :

तुम मुझे वोट दो
मैं तुम्हें युद्ध दूंगा
लहू लुहान भव्य देश दूंगा
और विराट देश को झुकने नहीं दूंगा
मैं देश को बेच दूंगा लेकिन उसे बंटने नहीं दूंगा तिनका तिनका कर दूंगा
चिथड़े उड़ा दूंगा लेकिन मिटने नहीं दूंगा
बस ध्यान से तुम मुझे वोट दो
दो वोट दो!

तुम बूथ मजबूत करो और मुझे वोट दो
तुम मुझे खून दो खौलता हुआ खून
मेरे नाम का जयकारा लगाओ
मैं तुम्हें भाषण और नारे में लिपटा महायुद्ध दूंगा।

क्योंकि
युद्ध तुम्हारी समस्यायों का निदान है
युद्ध हमारी समस्यायों का निदान है
हर मुश्किल पर बारूद गिरा दो
हर विचार पर बारूद गिरा दो
हर बात पर बारूद गिरा दो
भविष्य पर बारूद गिरा दो
सपनों पर बारूद गिरा दो

और मिल कर बोलो
बारूद ही भविष्य है
युद्ध ही भविष्य है

तो लो
यह युद्ध लो युद्ध लो युद्ध लो लो लो युद्ध लो
वोट दो वोट दो वोट दो वोट दो वोट दो दो!



Read Also –

लाशों पर मंडराते गिद्ध ख़ुशी से चीख रहे हैं ! देशवासियो, होशियार रहो !
पुलवामा में 44 जवानों की हत्या के पीछे कहीं केन्द्र की मोदी सरकार और आरएसएस का हाथ तो नहीं ?



[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]



Previous Post

भगत सिंह के विचारों के खि़लाफ़ संघ ने हमेशा बुना है मकड़जाल

Next Post

बालाकोट : लफ्फाज सरकार और तलबाचाटू मीडिया

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

बालाकोट : लफ्फाज सरकार और तलबाचाटू मीडिया

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

आज के हालात कारगिल युद्ध से बदतर : पूर्व नौसेना प्रमुख रामदास

May 11, 2025

मोदी जी आए हैं …

October 10, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.