Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

भगत सिंह के विचारों के खि़लाफ़ संघ ने हमेशा बुना है मकड़जाल

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 3, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

भगत सिंह के विचारों के खि़लाफ़ संघ ने हमेशा बुना है मकड़जाल

आई. जे. राय, सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्त्ता
आज भी संघ-भाजपा जैसी साम्प्रदायिक शक्तियां और गोदी मीडिया भगतसिंह के विचारों पर पर्दा डालकर खुलेआम हिन्दू-मुस्लिम दंगे करवाकर उनके विचारों का क़त्ल कर रहे हैं. युवा भी अब भगतसिंह को पढ़ने की बजाय उन्हें पूजने में लगे हुए हैं. ऐसे में क्रांतिकारियों के खिलाफ फैलाए गए दुष्प्रचार के जाल से लोगों को निकालने के लिए भाजपा और संघ की खिलाफत करने की सख्त जरूरत है.

आरएसएस की स्थापना करने वाले डॉ. हेडगवार ने आज़ादी की लड़ाई के समय युवाओं को भगत सिंह के प्रभाव से बचाने के लिए खूब मेहनत की थी. उनके बाद दूसरे सरसंघचालक गुरु गोलवलकर ने भी भगत सिंह के आंदोलन को कोसा था. संघ के पास ऐसे साहित्य की भरमार है जो युवाओं को भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों के बताए राह पर चलने से रोकता है. संघ के तीसरे प्रमुख बालासाहब देवरस ने खुद एक ऐसे किस्से के बारे में लिखा है, जिसमें डॉ. हेडगेवार ने उन्हें और दूसरे युवाओं को भगत सिंह और उनके विचारों के प्रभाव से बचाने के लिए प्रपंच रचा था.

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

‘कॉलेज की पढ़ाई के समय हम (युवा) सामान्यतः भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों के आदर्शों से प्रभावित थे. कई बार मन में आता कि भगत सिंह का अनुकरण करते हुए हमें भी कोई न कोई बहादुरी का काम करना चाहिए. हम आरएसएस की तरफ कम ही आकर्षित थे क्योंकि वर्तमान राजनीति, क्रांति जैसी जो बातें युवाओं को आकर्षित करती हैं, पर संघ में कम ही चर्चा की जाती है. जब भगत सिंह और उनके साथियों को फांसी दी गई थी, तब हम कुछ दोस्त इतने उत्साहित थे कि हमने साथ में कसम ली थी कि हम भी कुछ खतरनाक करेंगे और ऐसा करने के लिए घर से भागने का फैसला भी ले लिया था. पर ऐसे डॉक्टर जी (हेडगेवार) को बताए बिना घर से भागना हमें ठीक नहीं लग रहा था, तो हमने डॉक्टर जी को अपने निर्णय से अवगत कराने की सोची और उन्हें यह बताने की जिम्मेदारी दोस्तों ने मुझे सौंपी.




हम साथ में डॉक्टर जी के पास पहुंचे और बहुत साहस के साथ मैंने अपने विचार उनके सामने रखने शुरू किए. ये जानने के बाद इस योजना को रद्द करने और हमें संघ के काम की श्रेष्ठता बताने के लिए डॉक्टर जी ने हमारे साथ एक मीटिंग की. ये मीटिंग सात दिनों तक हुई और ये रात में भी दस बजे से तीन बजे तक हुआ करती थी. डॉक्टर जी के शानदार विचारों और बहुमूल्य नेतृत्व ने हमारे विचारों और जीवन के आदर्शों में आधारभूत परिवर्तन किया. उस दिन से हमने ऐसे बिना सोचे-समझे योजनाएं बनाना बंद कर दीं. हमारे जीवन को नई दिशा मिली थी और हमने अपना दिमाग संघ के कामों में लगा दिया. (देखें- स्मृतिकण- परम पूज्य डॉ. हेडगेवार के जीवन की विभिन्न घटनाओं का संकलन, आरएसएस प्रकाशन विभाग, नागपुर, 1962, पेज- 47-48)

साल 2018 त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद बीजेपी समर्थकों ने साउथ त्रिपुरा में बुलडोज़र से व्लादमीर लेनिन की मूर्ति को तोड़ दिया. मूर्ति गिरने के बाद भाजपा के नेता लेनिन के विचारों को भी निशाना बनाने लगे. अब इन मूर्खों को यह कौन समझाए कि लेनिन ने दुनिया भर के क्रांतिकारियों के प्रेरणा स्त्रोत थे और भगत सिंह भी उनके विचारों को मानते थे. भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु पर चल रहे मुक़दमे की एक सुनवाई 21 जनवरी को थी. इसी दिन लेनिन की पुण्यतिथि भी होती है.




उस समय के अख़बारों की रिपोर्ट्स के मुताबिक़ भगत सिंह और उनके साथी 21 जनवरी, 1930 को अदालत में लाल रुमाल बांध कर हाजिर हुए थे. जैसे ही मजिस्ट्रेट ने अपना आसन ग्रहण किया उन्होंने “समाजवादी क्रान्ति जिन्दाबाद,” “कम्युनिस्ट इंटरनेशनल जिन्दाबाद,” “जनता जिन्दाबाद,” “लेनिन का नाम अमर रहेगा,” और “साम्राज्यवाद का नाश हो” के नारे लगाये. इसके बाद भगत सिंह ने अदालत में तार का मजमून पढ़ा और मजिस्ट्रेट से इसे तीसरे इंटरनेशनल को भिजवाने का आग्रह किया.

लेनिन दिवस के अवसर पर हम उन सभी को हार्दिक अभिनन्दन भेजते हैं, जो महान लेनिन के आदर्शों को आगे बढ़ाने के लिए कुछ भी कर रहे हैं. हम रूस द्वारा किये जा रहे महान प्रयोग की सफलता की कमाना करते हैं. सर्वहारा विजयी होगा. पूंजीवाद पराजित होगा. साम्राज्यवाद की मौत हो. भगत सिंह ने कोर्ट में एक नारा लगाया था, “पूंजीवाद पराजित होगा.” लेकिन हमारे प्रधानसेवक इसी नारे के उलट पूंजीपतियों की गोद में जाकर बैठ गए हैं. कभी उनका अरबों-खरबों का क़र्ज़ माफ़ करते हैं, तो कभी बैंकों के कर्जदारों को देश से ही भगा देते हैं.




मोदी और संघ परिवार धर्म और भगवान के नाम पर जनता को गुमराह करते हैं, उनको आपस में लड़ाते हैं, दंगे करवाते हैं और फिर वोटों की भीख भी मांगते हैं. इसी के उलट भगत सिंह ने कहा था – “इन ‘धर्मों’ ने हिन्दुस्तान का बेड़ा गर्क कर दिया है. और अभी पता नहीं कि यह धार्मिक दंगे भारतवर्ष का पीछा कब छोड़ेंगे. इन दंगों ने संसार की नज़रों में भारत को बदनाम कर दिया है, और हमने देखा है कि इस अन्धविश्वास के बहाव में सभी बह जाते हैं. इन दंगों के पीछे साम्प्रदायिक नेताओं और अख़बारों का हाथ है.”

आज भी संघ-भाजपा जैसी साम्प्रदायिक शक्तियां और गोदी मीडिया भगतसिंह के विचारों पर पर्दा डालकर खुलेआम हिन्दू-मुस्लिम दंगे करवाकर उनके विचारों का क़त्ल कर रहे हैं. युवा भी अब भगतसिंह को पढ़ने की बजाय उन्हें पूजने में लगे हुए हैं. ऐसे में क्रांतिकारियों के खिलाफ फैलाए गए दुष्प्रचार के जाल से लोगों को निकालने के लिए भाजपा और संघ की खिलाफत करने की सख्त जरूरत है.




Read Also –

देश के आजादी के आंदोलन में भगत सिंह की शहादत और संघ के गोलवलकर
अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्षों में मुसलमानों की भूमिका (1763-1800)
आम लोगों को इन लुटेरों की असलियत बताना ही इस समय का सबसे बड़ा धर्म है
आरएसएस का देश के साथ गद्दारी का इतिहास




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]



Previous Post

राम मंदिर से शुरू होकर वाया पुलवामा पाकिस्तान के बालकोट तक

Next Post

युद्ध की लालसा में सत्ता पर विराजमान युद्ध पिशाच

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

युद्ध की लालसा में सत्ता पर विराजमान युद्ध पिशाच

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

आदिवासी समस्या

October 23, 2020

अंजन कुमार की कविता वैचारिक बोध से लैस, व्यवहारिक कविताएं है

July 10, 2025

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.