Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

झूठ को गोदी मीडिया के सहारे कब तक छिपाया जाएगा ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 11, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

झूठ को गोदी मीडिया के सहारे कब तक छिपाया जाएगा ?

मूर्खता का प्रतिकात्मक तस्वीर

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

Ravish Kumarरविश कुमार, मैग्सेस अवार्ड प्राप्त जनपत्रकार

8 नवंबर, 2016 को भारत ने आर्थिक रूप से एक मूर्खता भरा ऐतिहासिक कदम उठाया था, जिसे आप नोटबंदी के नाम से जाने जाते हैं. अमरीका होता तो वहां की संसद में इस फैसले को लेकर महाभियोग चल रहा होता मगर भारत में आर्थिक मूर्खता के इस फ़ैसले ने नरेंद्र मोदी को एक के बाद एक प्रचंड राजनीतिक सफ़लता दी. नोटबंदी के समय कहा गया था कि इसके दूरगामी परिणाम होंगे. क्या हम नोटबंदी के तीन साल बाद नोटबंदी के दूरगामी परिणामों की चर्चा कर सकते हैं ?

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग के आंकड़े लगातार बता रहे हैं कि नोटबंदी के बाद करोड़ों की संख्या में नौकरियां गई हैं. ताज़ा आंकड़े भयावह हैं. मई से लेकर अगस्त, 2019 के बीच 59 लाख लोगों को फैक्ट्रियों और सेवा क्षेत्रों से निकाल दिया गया. मैं अपने गांव गया था. वहां मिलने आए कई नौजवानों ने बताया कि नोएडा की आईटी कंपनियों में सैलरी समय से नहीं मिल रही है. दो-दो महीने की देरी हो रही है. दो साल से सैलरी नहीं बढ़ी है. वह नौजवान गांव इसलिए आ गया क्योंकि कोई और जगह है नहीं. कम से कम सस्ते में रह तो सकता है. 7 नवंबर को एक सज्जन का मैसेज आया कि मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों से भी लोगों को धड़ाधड़ निकाला जा रहा है. एक आंकड़ा यह भी कहता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में काम मिला है लेकिन वहां मज़दूरी घट गई है. कम पैसे पर ज़्यादा काम करने वाले हैं.

बाकी नक्सल और आतंक समाप्त करने की बात फ्रॉड थी और कैश खत्म करने की भी. नक्सल समस्या ख़त्म हो गई होती तो चुनाव आयोग को झारखंड जैसे छोटे राज्य में पांच चरणों में चुनाव कराने की दलील नहीं देनी पड़ती. वो भी तब जब मुख्यमंत्री कह रहे हों कि झारखंड में नक्सल समस्या ख़त्म हो गई है. आतंकवाद का यह हाल है कि सरकार को नोटबंदी के तीन साल बाद कश्मीर में 90 से अधिक दिनों के लिए इंटरनेट बंद करना पड़ा है.

नोटबंदी ने एक बात साबित की है. भारत की जनता को बेवकूफ बनाया जा सकता है. अपना सब कुछ गंवा कर लाइन में लगी जनता प्रधानमंत्री मोदी के इस फैसले की वाहवाही कर रही थी. बैंकरों की आंखों पर भी चश्मा लगा था. वे अपनी जेब से नोटों की गिनती में हुई चूक की भरपाई कर रहे थे. उन्हें लग रहा था कि किसी क्रांतिकारी कार्य में हिस्सा ले रहे हैं. नोटबंदी के बाद सबसे पहले बैंक ही बर्बाद हुए. बैंकरों की सैलरी तक नहीं बढ़ी.

8 नवंबर को एक और ख़बर आई है. रेटिंग एजेंसी मूडी ने भारत के कर्ज़ चुकाने की क्षमता को निगेटिव कर दिया है. इसका कहना है कि पांच तिमाही से आ रहे अर्थव्यवस्था में ढलान से कर्ज़ बढ़ता ही जाएगा. 2020 में बजट घाटा जीडीपी का 3.7 प्रतिशत हो जाएगा जो 3.3 प्रतिशत रखने के सरकार के लक्ष्य से बहुत ज़्यादा है. भारत की जीडीपी 6 साल में सबसे कम 5 प्रतिशत हो गई है. इसके 8 प्रतिशत तक पहुंचने के चांस बहुत कम हैं. फित्च और एस एंड पी दो अलग रेटिंग एजेंसियां हैं. इनके अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था में स्थिरता है.

ज़ाहिर है अगर विदेशी निवेशकों को यह बताया जाए कि आप भारत में पैसे लगाएंगे तो रिटर्न का भरोसा नहीं तो इस रेटिंग से सरकार भी चिन्तित होगी. इसलिए सुबह ही वित्त मंत्रालय का बयान आ गया, जिसमें कहा गया कि मूडी ने ज़रूर निगेटिव किया है लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार और स्थानीय मुद्रा की श्रेणी की रेटिंग में बदलाव नहीं किया है. उसकी रेटिंग स्थिरता बता रही है. इसके बाद वित्त मंत्रालय से जारी बयान में कहा गया है कि भारत अभी भी दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है. हमारी जीडीपी 5 प्रतिशत पर आ गई है और सरकार दुनिया की तेज़ गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था बता रही है. वित्त मंत्रालय यह भी बता देता कि वह सेक्टर-सेक्टर पैकेज-पैकेज क्यों बांट रहा है ? क्या यही तेज़ गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था की निशानी है कि सरकार रियलिटी से लेकर बैंक सेक्टर को पैकेज देती रहे ?

दुनिया के 100 अमीर लोगों में से एक और ग्लोबल निवेशक रे डालियो (RAY DALIO) ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ में ट्वीट किया है. मगर आप इस आदमी का डिटेल देखिए. ट्वीट भारत को लेकर करता है और अपना अधिकांश निवेश चीन में करता है. इसी साल अगस्त में इसका बयान है कि निवेशकों को चीन की तरफ जाना चाहिए वरना वे साम्राज्य गंवा देंगे. ऐसे लोगों के खेल को समझना चाहिए. रेटिंग एजेंसियां भी भगवान नहीं हैं. 2008 की मंदी की भनक तक नहीं थी इन्हें लेकिन भारत के ज़मीनी हालात बता रहे हैं कि हमारी अर्थव्यवस्था प्रधानमंत्री मोदी के फैसलों के कारण पस्त हुई है. नोटबंदी उनमें से एक है. वैसे कहा तो उन्होंने यही था कि पाई-पाई का हिसाब देंगे लेकिन एक पाई का हिसाब नहीं दिया.

आप पाठक ही बता सकते हैं कि जिन सेक्टरों में आप काम कर रहे हैं, वहां कैसी ख़बरें हैं, सैलरी समय से मिल रही है या नहीं, सैलरी बढ़नी बंद हो गई और काम के घंटे बढ़ गए हैं, काम करने के हालात में तनाव का तत्व ज़्यादा हो गया है. किसकी नौकरी चली गई तो वह अपना समय कैसे बिता रहा है ? हम 59 लाख लोगों से तो मिल नहीं सकते, जिनकी मई से अगस्त के बीच नौकरी चली गई है. साढ़े पांच साल बीत गए हैं. कब तक झूठ को गोदी मीडिया के सहारे छिपाया जाएगा ?

Read Also –

8 नवम्बर, काली रात
वैज्ञानिक शोध : भारतीय मूर्ख होते हैं ?
हत्यारों की ‘टी’-पार्टी
रविशंकर प्रसाद : अर्थशास्त्र का एक नया मॉडल

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद का फैसला

Next Post

निजी होती अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार किसके लिए ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

निजी होती अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार किसके लिए ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

पुलवामा : घात-प्रतिघात में जा रही इंसानी जानें

February 16, 2019

मौत से गुफ्तगू

January 15, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.