Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

महाराष्ट्र की महाभारत

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 16, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

महाराष्ट्र की महाभारत

पं. किशन गोलछा जैन, ज्योतिष, वास्तु और तंत्र-मंत्र-यन्त्र विशेषज्ञ

महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लग चूका है और 4 जगह जोड़-तोड़ करके (एक जगह तो मात्र 2 सीट आने पर भी) सरकार बना चुकी बीजेपी महाराष्ट्र में जनमत की दुहाई दे रही है ! शिवसेना के ठाकरे परिवार की महत्वाकांक्षा के कारण बीजेपी- शिवसेना का गठ बंधन टूट गया लेकिन असल में तो बीजेपी से जुड़कर शिवसेना हमेशा नुकसान में ही रही. लोकमत न्यूज़ के आंकड़ों के हिसाब से देखे तो शिवसेना बीजेपी से जुड़कर हमेशा अपने पैरो पर कुल्हाड़ी मारती रही.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

1990 में जब सांप्रदायिकता को मुद्दा बनाकर बीजेपी (तब शिवसेना के साथ उसका गठबंधन नहीं था) तब के चुनाव में 42 सीट ही हासिल कर पायी थी, जबकि शिवसेना को तब 52 सीट मिली थी.

1995 में जब सांप्रदायिकता चरम पर पहुँच चुकी थी और राममंदिर मुद्दा उछालकर आडवाणी बीजेपी को मेंन फ्रंट में स्थापित कर चुके थे तब भी महाराष्ट्र में बीजेपी 65 सीट ही निकाल पायी जबकि शिवसेना ने उस समय 73 सीटों पर अपना वर्चस्व बनाया.

1999 के चुनाव में जब सांप्रदायिकता का दौर थोड़ा थम चूका था तब बीजेपी ने 56 और शिवसेना ने 69 सीट पर विजय पताका फहराई.

2004 के महाराष्ट्र चुनाव में भी बीजेपी 54 तथा शिवसेना 62 सीट पर थी.

2009 के चुनाव जब मनमोहन सिंह द्वारा नव उदारवाद स्थापित हो चूका था और लोग सांप्रदायिकता की जगह अपनी कमाई पर फोकस कर रहे थे, तब दोनों ही पार्टियों की अवनति हुई और गठजोड़ में नुकसान शिवसेना को ज्यादा हुआ क्योंकि बीजेपी 46 पर और शिवसेना 44 पर आ गयी.

2014 में मोदीवाद अपने चरम पर पहुँच चूका था और मोदी को एक राष्ट्रिय नेता के रूप में प्रचारित कर देश पर थोपा जा चूका था और इसके लिये वोट नहीं, मशीने खरीदी गयी थी और इसका नतीजा महाराष्ट्र में भी देखने को मिला, जिसमे बीजेपी 46 से सीधी 122 पर आ गयी अर्थात जो पार्टी हमेशा 50 के आसपास रही (आयोध्या कांड करवाने के बाद भी), वो मोदी काल में सीधा 150% तक उछाल मारकर 122 पर पहुँच गयी जबकि जिस शिवसेना का वर्चस्व ही ठाकरे परिवार की वजह से था, वो नीचे गिरकर 63 पर ही सिमट गयी जबकि आयोध्या कांड के बाद जब बीजेपी का वर्चस्व पुरे देश में सांप्रदायिक तौर पर स्थापित हो चूका था, उस समय भी शिवसेना ने 73 सीट निकाली थी.

अब 2019 में भी बीजेपी ने लगभग वही आंकड़ा मशीनों में सेट किया लेकिन पिछले चुनावो में मशीन का बवाल मच चूका था इसलिये जान सांसत में न आये उस हिसाब से आंकड़े को थोड़ा कम कर दिया गया क्योंकि बीजेपी शिवसेना को कम करके आंक रही थी और सोच रही थी कि आज के मोदियुग में सब उसके सामने झुकने को मजबूर होंगे. और इस तरह मिल-जुलकर सरकार बनाने से कोई बवाल भी नहीं मचेगा. लेकिन बीजेपी का ये गणित शिवसेना की महत्वकांक्षा के आगे धराशायी हो गया और शिवसेना 56 पर सिमटने के बावजूद कहीं न कहीं ये समझ चुकी है कि बीजेपी के साथ मिलकर उसने खुद के पैरो में कुल्हाड़ी मारी और स्वयं की वोट बैंक का नुकसान किया.

इसलिये अपने वर्चस्व की लड़ाई में उसकी महत्वकांक्षा स्वयं शासन में आने की हुई और मुखौटा बनाया गया आदित्य ठाकरे को. जबकि शिवसेना अच्छे से जानती थी कि कोई भी उसे स्वीकार नहीं करेगा मगर बीजेपी को गफलत में रखने के लिये ये मुखौटा जरूरी था. असल लक्ष्य तो उद्धव ठाकरे को ही भेदना था, मगर बीजेपी उसकी सीटों में कोई गड़बड़ी न करे इसलिये उसे परदे के पीछे तुरुप कार्ड बनाकर रखा गया ताकि बाद में सरप्राइज के तौर पर उसे खेला जा सके और यही हुआ भी. और इस तरह बीजेपी का सपना टूट गया और राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा लेकिन बीजेपी अब भी अपना मायाजाल रच रही है और किसी ऐसे जुगाड़ में लगी है, जिससे वो सरकार बना सके.

महाराष्ट्र की महाभारत का मजा लेने के लिये आपको थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा. मगर जितना मैंने समझा है उस हिसाब से आपको बता रहा हूँ कि महाराष्ट्र में शिवसेना का सपना सपना रहेगा और बीजेपी अपना जोड़-तोड़ बिठकार सरकार बनायेगी. दुबारा चुनाव नहीं होगा (अगर दुबारा चुनाव होता है इसका मतलब ये होगा कि बीजेपी से मोदि-शाह युग समाप्ति की ओर जा रहा है).

Read Also –

झूठ को गोदी मीडिया के सहारे कब तक छिपाया जाएगा ?
कमलेश तिवारी की हत्या : कट्टरतावादी हिन्दुत्व को शहीद की तलाश
कायरता और कुशिक्षा के बीच पनपते धार्मिक मूर्ख

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

ऊंची से ऊंची शिक्षा भी सबके लिए मुफ्त किया जाये

Next Post

कट्टरतावादी मूर्ख : मिथक को सत्य का रूप देने की कोशिश

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

कट्टरतावादी मूर्ख : मिथक को सत्य का रूप देने की कोशिश

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

टीपु के इतिहास के साथ तथ्यात्मक छेड़छाड़ का एक उदाहरण

September 12, 2018

कॉपरनिकस जिनकी आत्मा दुनिया भर की प्रयोगशालाओं में जीवित है

May 24, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.