Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

किसान आंदोलन : मोदी सरकार नरसंहार की तैयारी कर रही है ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 5, 2020
in ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

किसान आंदोलन : मोदी सरकार नरसंहार की तैयारी कर रही है ?

एक क्रिमिनल की सबसे बड़ी विशेषता होती है कि वह कभी भी माफी नहीं मांगता, और न ही अपने फैसले या कुफैसलों से पीछे पलटता है. चाहे उसकी गलतियों का स्तर किसी भी दर्जे का क्यों न हो. भले ही उसकी गलतियों या मूर्खता के कारण उसका पूरा गैंग ही क्यों न मिट जाये. केन्द्र की क्रिमिनल मोदी-शाह गैंग के पिछले छ: सालों का ट्रैक रिकॉर्ड को देखा जाये तो अपराधियों के इस विशेषता की झलक साफ दीख जायेगी.

You might also like

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

कॉरपोरेट घरानों की नुमाइंदगी करते हुए मोदी-शाह का यह क्रिमिनल गैंग भारतीय जनता की अबतक की सबसे बड़ी अनसुनी लूट को सुनिश्चित करने के लिए जिस तरह किसान विरोधी तीन काले कानूनों को देश में लागू किया है, उसका अन्यत्र मिशाल मिलना संभव नहीं है. परन्तु, समस्या तब खड़ी हो गई जब डेढ़ करोड़ किसानों ने इस काले कानून के खिलाफ अबतक की सबसे बड़ी प्रतिरोध शक्ति बनकर मोदी-शाह गैंग की सांस में जाकर अटक गई है, और अपनी मांगों पर मजबूती से डट गई है.

इसी दरमियान यह भी खबरें आ रही है कि मोदी-शाह गैंग ने महत्वपूर्ण प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और दूसरे सत्ता शीर्ष पर बैठे क्रिमिनल लोगों की व्यक्तिगत सुरक्षा से सिख सुरक्षाकर्मियों को हटा दिया गया है. अगर यह खबर सही है तो यह तय है कि किसानों के पीछे न हटने की सूरत में मोदी-शाह गैंग किसान आंदोलन पर सीधे खूनी खेल खेलने का संकेत दे दिया है.

मोदी-शाह गैंग किसानों के इस महान आंदोलन को खून में डूबोकर खत्म करने की कोशिश के तौर पर ही इस महान किसान आन्दोलन को बदनाम करने के लिए कभी खालिस्तानी, कभी देशद्रोही, कभी आतंकवादी तो कभी गुमराह लोगों का असफल नामकरण देने की मुहिम को देखा जा रहा है.

मोदी-शाह गैंग की इस खूनी संभावना को रेखांकित करते हुए लोग सोशल मीडिया पर अपनी बात रख रहे हैं. इन्हीं में एक महत्वपूर्ण आवाज सुब्रतो चटर्जी लिखतेे हैैंं –

बड़ी-बड़ी प्रायोजित ख़बरें हमें छोटी-छोटी किंतु बहुत महत्वपूर्ण ख़बरें नहीं देखने देता. ये होती है शोर की ताक़त और हमारी विश्लेषण करने की शक्ति का अभाव.

आज जो सबसे ज़्यादा ट्रेंड होने वाली ख़बर रही, वह है कंगना का एक ट्वीट, जिसमें उसने किसानों के आंदोलन की तुलना शाहीनबाग के आंदोलन से कर दी. आप इससे असहमत होंगे, आक्रोशित होंगे, और अगर विकृति की हर संभव सीमा पार किए हुए भक्त होंगे, तो इसका समर्थन भी करेंगे. मज़ेदार बात ये है दोनों में से कोई भी पक्ष इस ट्वीट के असल कारण पर नहीं जाएंंगे क्योंकि शोर ने आपकी सोचने की शक्ति को हर लिया है.

एक दूसरी ख़बर आ रही है कि प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और दूसरे सत्ता शीर्ष पर बैठे क्रिमिनल लोगों की व्यक्तिगत सुरक्षा से सिख सुरक्षाकर्मियों को हटा दिया गया है. ये ख़बर अभी अपुष्ट है. इस कायर-हत्यारों को अपनी ग़लीज़ जिंदगी को बचाने की ज़्यादा फ़िक्र होती है, ये सच है इसलिए इस ख़बर पर विश्वास करने को मन करता है.

तीसरी ख़बर ये है कि 96 हज़ार ट्रैक्टर ट्रक के साथ क़रीब डेढ़ करोड़ किसान दिल्ली को हर तरफ़ से घेरे हुए हैं, जो सोमवार से दिल्ली की सप्लाई लाईन काटने की तैयारी में हैं, ताकि दिल्ली के मध्यमवर्गीय चोर, दोगले और दल्ले भी आंदोलन के समर्थन में सड़क पर आने को मजबूर हो जाएंं. दिल्ली के मध्यम वर्ग का नब्बे प्रतिशत यही है, यक़ीन मानिए. उदारीकरण के दौर के पहले के दिल्लीवासियों को जिन्होंने देखा है, वे मुझसे सहमत होंगे.

चलिए, देखते हैं कि क्या स्थिति सोमवार से बनने वाली दिखती है. एक, सरकार बिल्कुल पीछे नहीं हटेगी, किसान बिल पर एकाध मामूली संशोधन को छोड़ कर. दूसरे, किसान बिल्कुल अपनी मांंगों से पीछे नहीं हटेंगे, क्योंकि यह उनके लिए जीवन मरण का प्रश्न है. नतीजा – टकराव. और इस बार टकराव शायद सिर्फ़ विचारों का न रहे. जो अब तक नहीं हुआ वो अब हो सकता है – बलप्रयोग, जो फ़ासिस्ट क्रिमिनल सरकार का आख़िरी हथियार है.

अब इन संभावनाओं के मद्देनज़र पहले की दो ख़बरों की महत्ता को समझिए. शाहीनबाग हिंदू बनाम मुस्लिम बना दिया गया, किसान आंदोलन को सिख बनाम हिंदू बनाने की कोशिश है. गोलियांं सरकार की तरफ़ से चलेगी और इसीलिए बेअंत और सतवंत के डर से सिख सुरक्षाकर्मियों को हटाना लाज़िमी है. ऐसे में कंगना के कथन का अर्थ स्पष्ट हो जाता है. देश के सबसे बड़े नरसंहार की तैयारी चल रही है, आप मानें या न मानें. बस एक समस्या है, आप सिख बॉडीगार्ड तो मारे जाने के भय से हटा देंगे, लेकिन, रातोंरात आप सिख, जाट, राजपूत राइफ़ल को कैसे भंग और नि:शस्त्र कर देंगे ?

शायद वो दुर्भाग्यपूर्ण दिन हमें न देखना पड़े जब भारतीय सेना खुल कर राजनीति में हस्तक्षेप करे, लेकिन 2014 से अब तक अपने हरेक फ़ैसले से भाजपा और विकृत संघ ने भारत का पाकिस्तानीकरण करने की जो निर्लज्ज मुहिम चलाई है, क्या सैनिक शासन उसी मुहिम की तार्किक परिणती नहीं है ?

फ़िलहाल, तड़ीपार और बंदर के लिए हैदराबाद से बुरी ख़बर आ रही है. क्रिमिनल बुरी तरह से स्थानीय निकाय चुनाव हार चुके हैं. निजामियत मिटी नहीं. बेहतर है कि रविवार को मेरे मुहल्ले में पांंच साल के बच्चों का टेनिस बॉल क्रिकेट कॉमिटी के पदाधिकारियों का चुनाव होने वाला है, भाजपा की पूरी टीम को मैं आज से ही प्रचार में जुट जाते देखना चाहता हूंं.

सोमवार से लेकर साल के अंत होने तक सारा खेल है. विश्वास है कि नए साल में न क्रिमिनल इन चीफ़ बचेगा, न उसके गुर्गों. देश को पैसे की ताक़त दिखाने वाले को अब जनता अपनी ताक़त दिखाएगी.

Read Also –

भारत के अर्थव्यवस्था की सच्ची तस्वीर
नोटबंदी के चार साल बाद भारतीय अर्थव्यवस्था : मोदी ने भारत को कपोल-कल्पनाओं का देश बना दिया है
APMC मंडी सिस्टम पर मक्कार मोदी का आश्वासन कितना भरोसेमंद
मोदी सरकार के तीन कृषि अध्यादेश : किसानों के गुलामी का जंजीर
जनता अपने सपनों को ढूंढने में लगी है और प्रधानमंत्री नई जनता 

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Tags: किसान आंदोलननरसंहारमोदी सरकार
Previous Post

आदिवासियों का धर्म

Next Post

अंधधार्मिक लोग देश की बर्बादी का असली कारण

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

by ROHIT SHARMA
March 22, 2026
ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
Next Post

अंधधार्मिक लोग देश की बर्बादी का असली कारण

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

दलित राजनीति का सेफ्टी वाल्व

March 12, 2020

खतरे में जनतंत्र: नौकरशाहों का विधायिका पर हमला, कितना जनतांत्रिक ?

February 23, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.