Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

‘हम सैनिकों को उतना डर आतंकियों से नहीं लगता जितना ऑफिसर का खौफ होता है’

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 12, 2021
in ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

'हम सैनिकों को उतना डर आतंकियों से नहीं लगता जितना ऑफिसर का खौफ होता है'

सेना में व्याप्त वर्ग विभाजन का प्रत्यक्ष नजारा अब अपने बहुत ही वीभत्स अंदाज में उभर का सामने आया है और लगातार आ रहा है. तेज बहादुर ने सोशल मीडिया के माध्यम से सेना में व्याप्त जिस गलीज को मयसबूत उकेरा है, उसे किसी भी हालत में झुठलाया नहीं जा सकता. पर बिडम्बना तो यह है कि सेना के अन्दर के व्याप्त भ्रष्टाचार और गंदगी को जिस प्रकार अनुशासन के नाम पर अफसरों द्वारा दबाने का प्रयास है, वह पूर्णतः न केवल गलत है बल्कि अनैतिक भी. इसकी अनदेखी सेना का विद्रोह का जमीन तैयार करेगी.

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

तेज बहादुर को फर्जी अनुशासन के नाम पर दण्डित करने के बाद भी अफसरों-आला अफसरों के अनैतिक हरकतों के खिलाफ सैनिकों को अंसतोष न केवल बढ़ ही रहा है बल्कि फर्जी अनुशासन को धता बताते हुए सैनिकों ने विभिन्न माध्यमों, खासकर सोशल मीडिया के माध्यमों से अपनी आवाज बलंद कर रहे हैं.

सोशल मीडिया के माध्यम से एक सैनिक अपना नाम और पता गुप्त रखने के शर्त पर अपनी समस्याओं और सेना के अफसरों के नैतिक पतन की पराकाष्ठा को न केवल बुरी तरह उकेड़ते ही हैं, वरन् सेना के अन्दर व्याप्त गंदगी को भी निकाल कर बाहर रख देते हैं. यहां हम उस सैनिक के बयान को हू-ब-हू उनके ही शब्दों में रखते हैं –

सेना अध्यक्ष विपिन रावत कहते हैं कि अगर सैनिकों को कोई परेशानी है तो वो मुझे सुझाव लिखित में भेजें … लेकिन सर जी, हमारे सुझाव और शिकायत आप तक पहुंचने कौन देगा … ?

आप भी यहीं से तो वहां तक पहुंचे हैं … जब सारे officers एक हो गये तो आप भी उन्हीं का साथ दोगे … मैंने ये देखा है tv डिबेट में … मैं यहां भारतीय सेना … Indian army की बात कर रहा हूं सिर्फ … चाहे बी.एस.एफ हो, आई.टी.बी.पी. हो, सब जगह सैनिकों का शोषण होता है, शारीरिक तौर पर भी और मानसिक तौर पर भी … ये कैसे होता है .. मैं आपको बताता हूं ….

  1. अगर सैनिक के घर पर सैनिक के मां-बाप बीमार होते हैं, और उस दौरान घर पर उस  सैनिक की जरूरत घरवालों को सेना से ज्यादा होती है, तो छुट्टी के लिए जब सैनिक ऑफिसर के सामने (interview)  में जाता है तो सवाल-जवाब कुछ यूं होते हैं …
    ‘ऑफिसर: क्या प्रोब्लम है ?
    ‘जवान: सर, मेरी मां बीमार है, मुझे छुट्टी चाहिए.
    ‘ऑफिसर: आपको किसने बताया कि मां बिमार है ?
    ‘जवान: सर पापा का फोन आया था।
    ‘ऑफिसर: तेरा बाप डाक्टर है क्या ?
    ‘(सोचिये जरा आप भी…)
  2. ऑफिसर: ठीक है, तू छुट्टी जा, अगर सच में तेरी मां बीमार है तो. तू छुट्टी से आने के बाद डाॅक्टर द्वारा जांच की पर्ची, दवाईयों के बिल, और क्या इलाज करवाया, सब लेते आना. हमें सबूत चाहिए कि तू सच बोल रहा है या झूठ.
    ‘(क्या ये सही है ?.. आप ही कहिये).
  3. अगर हमारे मां-बाप बीमार होते हैं तो इनसे छुट्टी मांगने पर ये कहते हैं कि ‘घर पर तेरे अलावा कोई भाई-बहन नहीं है जो देख-रेख कर सके’. लेकिन अगर इनके मां-बाप बीमार होते हैं तो हम में से किसी सिपाही को वहां भेज देते हैं उनकी टट्टी साफ करने के लिए. क्या ये सही है ?
  4. हम अगर सेना के अंदर family member बनते हैं तो हमारी wife को ये और इनकी wife, family welfare के नाम पर नचवाने के लिए मजबूर कर देते हैं, नहीं नाचती है तो हम सैनिकों को परेशान करते रहते हैं. फिर कहते हैं कि हम आपकी wife को सोशल बना रहे हैं. मेरी wife ने कई बार इसकी शिकायत की मुझ से, लेकिन मैं चुप रहा. मैं कहता हूं कि जब मुझे नहीं जरूरत कि मेरी वाइफ नाचे, तो तुम कौन होते हो नचाने और सोशल बनाने वाले ???
    ‘(क्या ये सही है…आप ही कहो ?)
  5. अगर एक ऑफिसर को गोली लगती है ऑपरेशन के दौरान तो वहां तुरंत हेलीकॉप्टर पहुंच जाता है, लेकिन अगर एक सिपाही को गोली लगती है तो 2.5 ton के पीछे डाल देते हैं, जिस कारण नजदीकी मेडिकल सेंटर तक पहुंचते-पहुंचते उसकी मौत हो जाती है.
  6. किसी यूनिट का अगर कोई जवान जैसे आज किसी ऑपरेशन में मर जाता है तो पूरे जवान उस दिन खाना नहीं खा पाते लेकिन अगर ऑफिसर मैस में पहले से उस दिन पार्टी का आयोजन होना होता है तो, वो होता ही है. कहते हैं हमारे लिए जवान मरा, कुत्ता मरा, बात बराबर है.
    ‘ऐसी सोच के लिए आप क्या कहेंगे ???
  7. यहां तक कि अगर एक ऑफिसर और एक जवान को एक जैसा बुखार या बिमारी हो तो MH में दवाईयों में भी फर्क होता है. ऑफिसर को दो दिन में ठीक कर वापस भेज देते हैं जबकि जवान को 10 दिन तक MH में पडाये रखते हैं, experiment करते रहते हैं.
  8. अगर किसी ऑफिसर की family members में किसी को खुन कि जरूरत होती है तो ये जवानों का blood group मैच कर उसको by force खुन देने के लिए भिजवाते हैं, चाहे उस जवान की इच्छा हो या ना हो. और डाक्टर खुन तो खुन, जवानों का प्लाज्मा तक निकाल देते हैं.
  9. RR hospital Delhi … जहां एक सैनिक को तब मेडिकल ग्राउंड में रेफर किया जाता है जब उसकी बीमारी नयी या unknown हो.  लेकिन वहां जा कर बेचारे सैनिक का इलाज कम, नये-नये टेस्ट किये जाते हैं, नये नौसिखिया डाॅक्टरों को प्रेक्टीकल के रूप में जवानों की body, object के रूप में दी जाती है क्योंकि अगर मर भी गया तो उसके घर वालों को 20-25 लाख पकड़ा कर चुप करवा देंगे…. मैं तो कहता हूं कि अगर कोई सैनिक मिलिट्री डाॅक्टर के इलाज के दौरान मरता है तो उस सैनिक का पोस्टमार्टम फिर से उस सैनिक के घर वालों को कराना चाहिए, ताकि ये पता चल सके कि कहीं सैनिक के शरीर के साथ फालतू छेड़छाड़ तो नहीं हुई, जिस कारण उसकी मौत हुई हो.
  10. सेना में 60 दिन सालाना अवकाश और 30 दिन अकाससमिक अवकाश का प्रबंध है लेकिन एक युनिट के अंदर सैनिकों की कम मौजूदगी के कारण ये अवकाश मात्र 60 दिन ही मिल पाता है क्योंकि युनिट के आधे सैनिक तो सेवा पर तैनात ऑफिसर और सेवानिवृत ऑफिसर के सहायक (नौकर), कुत्ते घुमाने, इनके मां-बाप की सेवा करने, बीवी के अंडरगारमेंट धोने पर लगे होते हैं. अगर सिपाही ये सब करने से मना करे तो उसके लिए शाररिक, मानसिक और फाइनेंशल दंड तुरंत लगवा देते हैं, साथ में और भी कई आर्मी एक्ट. सिपाही बेचारा गरीब घर का, बुड्ढे मां-बाप, बीवी-बच्चों का बोझ लिए चुपचाप सहता आ रहा है ये सब क्योंकि उसके पास सिर्फ यही नौकरी है. लेकिन आज जब तेज बहादुर यादव ने मंगल पांडे बनने का फैसला ले ही लिया है तो हम भी क्यों सच्चाई को दबाते रहें. देश को और साथ-साथ हमारे घरवालों को भी पता चले कि हम पर क्या बीत रही है !!!
  11. जब एक ऑफिसर और एक जवान दोनों ही मिलिट्री में सेवा दे रहे हैं तो ऑफिसर की मिलिट्री सर्विस-पे 6400 और जवान की 2000 क्यों ?… हैं तो दोनों सैनिक ही … ये भेदभाव क्यों ???
  12. सेना एक पिरामिड की तरह है, जिसमें सैनिक नींव की ईंट है और जरनल सर्वोच्च भाग. अगर सैनिक (नींव) में प्रोब्लम आने लगेगी तो पूरी बिल्डिंग गिरने पर मजबूर हो जायेगी, और हम सिपाही नहीं चाहते थे कि ऐसा हो, जिस कारण हम चुप बैठे थे लेकिन अब सह पाना मुश्किल-सा लगता है.
  13. LOC पर एक कंमाडिंग ऑफिसर अपने ACR (ANNUAL CONFIDENTIAL REPORT) में अपने अच्छे point के लिए 4 आतंकियों के बदले अपने एक जवान को मरवा देता है लेकिन बेचारे के घरवालों को लगता है, उनका बेटा शहीद हुआ है.
  14. हम सैनिकों को उतना डर आतंकियों से नहीं लगता जितना कि ऑफिसर का खौफ होता है. न जाने कौन-सी बात पर कौन-सा एक्ट लगा दें !!!
  15. अंत में मैं यही कहना चाहता हूं कि सेना के system में बदलाव होना चाहिए, क्योंकि ना हम इन ऑफिसर के लिए नौकरी कर रहे हैं, ना ये हमारे लिए नौकरी कर रहे हैं, हम-सब को मिलकर इस देश के लिए नौकरी करनी चाहिए लेकिन ये तब ही संभव होगा जब सेना से ये भेदभाव मिटेगा, ऑफिसरशाही, तानाशाही मिटेगी … सरकार से दरख्वास्त है कि कृपा कर के वोट-बैंक से ऊपर आ कर सोचें !! देश के जवानों के बारे में सोचें !!!
  16. हम जवान अगर किसी कारण बस छुट्टी से 1-2 घंटा लेट हो जाते हैं तो हमारे लिए बिना सोचे समझे क्वाटर गार्ड तैयार मिलता है. जबकि एक जवान सीमित समय में छुट्टी खत्म होने पर लगभग 1200-1300 किमी ट्रेन से यात्रा करते हैं, और कभी-कभी ट्रेन लेट हो जाती है, फिर कहते हैं यहां मुहर लगवाओ, वहां मुहर लगवाओ.

बहुत सी और भी खतरनाक और खौफनाक कमियां हैं सेना में … विस्तार करने पर पूरा दिन लग जायेगा, मैं मीडिया चैनल, न्यूज चैनल से दरख्वास्त करता हूं कि बात-विवाद के लिए न्यूज बाॅक्स में सेना के ऑफिसर्स को नहीं बल्कि एक सिपाही को बैठा कर पूछें लेकिन याद रहे उस सिपाही को पहले से ही इनके द्वारा हरासमेंट ना कर दिया गया हो कि ‘अगर तुने कुछ और कहा तो देख लेना.’

अपने पूर्ववर्ती के हश्र से भयभीत ये सैनिक आगे लिखते हैं, ‘दोस्तों मेरे द्वारा लिखा ये सच आप ज्यादा से ज्यादा शेयर कर सकते हैं लेकिन कृपा कर मेरा नाम मत लेना. मेरे भी छोटे-छोटे बच्चे हैं, जिनके लिए मुझे नौकरी तो करनी ही पड़ेगी, सहना तो पडे़गा … पर ना जाने कब तक सह सकुंगा … लेकिन कृपया इस मैसेज को जहां तक पहुंचना चाहिए वहां तक जरूर पहुंचा दिजियेगा.’

अन्त में, उक्त सैनिक देश के लिए ‘धन्यवाद’ और ‘जय हिंद’ का सलाम पेश करते हुए अपनी बात खत्म करते हैं. अगर हमारे देश के सेना की ये यर्थाथ हालत है तो सचमुच यह बहुत ही गंभीर मामला है. इस मुद्दे पर सरकार और देशवासियों को अपना ध्यान अवश्य देना चाहिए.

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

गोबर चेतना का विकास

Next Post

शिक्षा के संदर्भ में हमारे समय का सच

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

शिक्षा के संदर्भ में हमारे समय का सच

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

माफीवीर सावरकर ‘वीर’ कैसे ?

May 29, 2019

जब आप चुप रहोगे तो दूसरे तो बोलेंगे न !

February 4, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.