Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

काकोरी ट्रेन डकैती अदम्य साहस की चिंगारी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 9, 2021
in ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

काकोरी ट्रेन डकैती अदम्य साहस की चिंगारी

96 साल पहले आज ही के दिन (9 अगस्त) डाली गई थी काकोरी ट्रेन डकैती. बात सन 1925 की है. आठ डाउन पैसेंजर गाड़ी के दूसरे दर्जे के डिब्बे में अशफ़ाकउल्ला, शतीद्रनाथ बख़्शी और राजेंद्र लाहिड़ी सवार हुये. उन्हें ये काम सौंपा गया था कि वो निश्चित स्थान पर ज़ंजीर खींच कर ट्रेन खड़ी करवा दें.

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

बाकी सात लोग जिसमें रामप्रसाद बिस्मिल, केशव चक्रवर्ती, मुरारी लाल, मुकुन्दी लाल, बनवारी लाल, मन्मथ नाथ गुप्त और चंद्रशेखर आज़ाद उसी ट्रेन के तीसरे दर्जे के डिब्बे में सवार थे. उनमें से कुछ को गार्ड और ड्राइवर को पकड़ने को काम सौंपा गया था जबकि बाकी लोगों को गाड़ी के दोनों ओर पहरा देने और ख़ज़ाना लूटने की ज़िम्मेदारी दी गई थी.

जिस समय गाड़ी की ज़ंजीर खींची गई, तब अंधेरा हो चला था. गार्ड और ड्राइवर को पेट के बल लिटा दिया गया और तिजोरी को ट्रेन से नीचे गिरा दिया गया. तिजोरी काफ़ी वज़नी और मज़बूत थी. हथौड़ों और छेनी से उसे तोड़ा जाने लगा. अशफ़ाकउल्ला के हथौड़ै की मार से ये मज़बूत तिजोरी भी मुंह खोलकर अंदर का ख़ज़ाना उगलने के लिए विवश हो गई.

काकोरी एक ऐतिहासिक विरासत
काकोरी एक ऐतिहासिक विरासत

तिजोरी में नक़द रुपये 4601 थी, जो उस वक्त के हिसाब से बहुत थे इसलिए उनको गठरी में बांधा गया और क्रांतिकारियों ने पैदल ही लखनऊ की राह पकड़ी. शहर में घुसते ही ख़ज़ाना सुरक्षित स्थान पर रख दिया गया. उन लोगों के ठहरने के जो ठिकाने पहले से तय थे, वो वहाँ चले गए. लेकिन चंद्रशेखर आज़ाद ने वो रात एक पार्क में ही बैठकर बिता दी.

सुबह होते ही ‘इंडियन टेली टेलीग्राफ़’ अख़बार बेचने वाला चिल्लाता सुना गया कि ‘काकोरी के पास सनसनीख़ेज डकैती.’ इस ट्रेन डकैती से ब्रिटिश शासन बौखला गया. गुप्तचर विभाग के लोग सजग होकर उन सभी लोगों पर निगरानी रखने लगे जिनपर क्रांतिकारी होने का शक़ था.

47 दिन बाद यानी 26 सितंबर, 1925 को उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर छापे मार कर गिरफ्तारियां की गईं. इनमें से चार लोगों को फांसी पर चढ़ा दिया गया. चार को कालापानी की उम्रकैद की सजा सुनाई गई और सत्रह को लंबी कैद की सजा मिली.

अंग्रेजों की नजर में उस वक्त यह घटनाक्रम हुकूमत से टक्कर लेने का खुला एलान था. उस वक्त जब ब्रितानी शासकों और उनके संसाधनों तक सीधी पहुंच बनाना आसान नहीं था, तब अंग्रेजी शासकों की रेल को बिना स्टापेज वाले स्थान पर रोककर उसमें मौजूद कैश लूटना तत्कालीन शासकों के लिए बड़ी चुनौती थी, इसीलिए अंग्रेजी हुकूमत ने इसके खिलाफ युद्ध स्तर पर कार्रवाई की थी.

सत्ता के खिलाफ केवल सत्ता ही खड़ा हो सकता है. काकोरी कांड के जरिए देश के क्रांतिकारी ताकतों ने अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ एक नई सत्ता की उपस्थिति का आगाज किया. यह ठीक उसी प्रकार अंग्रेजी सत्ता को हिलाकर रख दिया था, जिस प्रकार अंग्रेजी हुकूमत के भारतीय प्रतिनिधि भारत सरकार को सशस्त्र नक्सलबाडी किसान विद्रोह ने थर्रा दिया था.

काकोरी कांड की चुनौती से निपटने की कोशिश में अंग्रेजी हुकूमत ने जिस प्रकार दमन का सहारा लिया उससे काकोरी कांड अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ एक प्रतीक बनकर नौजवान हृदयों को ही न केवल उद्वेलित किया अपितु समूचे देश में साहस का संचार कर दिया, यह ठीक उसी तरह हुआ जैसे नक्सलबाड़ी सशस्त्र किसान विद्रोह के दमन ने नक्सलबाड़ी को ‘वसंत का बज्रनाद’ बना दिया, जिसकी चिंगारी आज सीपीआई माओवादी के रुप में समूचे देश में फैलकर पूंजीवादी सत्ता के प्रतिनिधि भारत सरकार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह की आग जलाये हुए है.

आज काकोरी कांड का महत्व इस बात में भी निहित है कि जिस प्रकार काकोरी से निकली चिंगारी ने अंग्रेजी हुकूमत को यहां से भागने पर विवश होना कर दिया था, उसी प्रकार नक्सलबाडी से उठी लाल चिंगारी भारतीय पूंजीवादी व्यवस्था को भी खत्म कर देगी.

(रेहान फजल के एक आलेख के साथ)

Read Also –

हिन्दू-मुस्लिम एकता के जबर्दस्त हिमायती अमर शहीद अशफाक और बिस्मिल का देशवासियों के नाम अंतिम संदेश
अमर शहीद अशफ़ाक़ उल्ला खान
भूमकाल विद्रोह के महान आदिवासी क्रांतिकारी गुंडाधुर : हैरतंगेज दास्तान</a
हर सम्भव तरीक़े से पूर्ण स्वतन्त्रता – भगत सिंह 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

मेरे देश की लड़कियां

Next Post

असम मिजोरम सीमा विवाद : संघियों का खंड खंड भारत

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

असम मिजोरम सीमा विवाद : संघियों का खंड खंड भारत

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मोदी सरकार द्वारा विश्व बैंक से लिये कर्ज

June 11, 2018

9.15 की बोरिवली चर्चगेट लोकल

February 29, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.