Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

BHU : पकौड़ा रोजगार की अपार सफलता के बाद पेश है कंडा पाथो योजना

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 7, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
BHU : पकौड़ा रोजगार की अपार सफलता के बाद पेश है कंडा पाथो योजना
BHU : पकौड़ा रोजगार की अपार सफलता के बाद पेश है कंडा पाथो योजना
कृष्णकांत

मोदी जी बेरोजगार युवाओं को पकौड़ा तलना सिखा रहे हैं. उन्होंने नाले पर भगोना उलट कर गैस का भी आविष्कार कर लिया था. गैस जलाने से प्रदूषण भी नहीं होता. रोजगार का पूरा सिस्टम तैयार था. नाली पर भगोना उलट दो, उसमें पाइप लगाकर चूल्हे से जोड़ दो. अखंड ज्योति की तरह गैस भभककर जल उठेगी, फिर मस्त पकौड़ा तलो लेकिन बीएचयू के प्रोफेसर युवाओं को कंडा (गोयठा) पाथना सिखा रहे हैं.

बिना लकड़ी के कंडा जलता नहीं, सिर्फ सुलगता है. उसे लकड़ी के साथ इस्तेमाल करने के लिए चूल्हे में घुसाइए, तभी जलता है, वरना सुलग सुलग कर धुआं फैलाता है. लब्बोलुआब ये कि कंडे पर पकौड़ा नहीं तला जा सकता. बीएचयू के गोबर वैज्ञानिक प्रोफेसर मोदी जी की पकौड़ा योजना और नाला गैस योजना को विफल करने का षडयंत्र रच रहे हैं ?

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

पकौड़ा रोजगार की अपार सफलता के बाद पेश है कंडा पाथो योजना. दिलचस्प तो ये है कि यह काम मुझे पांच छह साल की उम्र से आता है, उसे कोई प्रोफेसर सिखाएगा ? मतलब क्या ? उसमें क्या सिखाएगा ? और वे कौन लोग हैं जो कंडा पाथना सीखेंगे ?

कंडा या उपला हमारी पहली स्मृतियों में दर्ज है. जब से हमने होश संभाला तो कंडे की छवि हमारे दिमाग में पहले से मौजूद थी. दादी कंडा पाथती थीं तो हम बच्चे वहीं पर, कभी कभी उनके गोबर के ढेर से खे​ला करते थे. कभी कभार हम भी हाथ आजमा लेते थे. गोल वाली पोपरी तो आराम से बना लेते थे, जो दीवार में चिपका दी जाती है.

हमारी अनपढ़ दादी इतने सुंदर, लंबे-लंबे, गोल-गोल कंडे पाथती थीं। ये फूहड़ प्रोफेसर लोग डेढ़-दो लाख सैलरी लेकर इतने बेडौल, इतने घटिया कंडे पाथ रहे हैं. गांव के लोग बताएं ये मूस जइसा कंडा कौन पाथता है भाई ?

BHU के कंडा (गोयठा) पाथो पाठ्यक्रम में बनाये गये कंडा (गोयठा)

खबर कह रही है कि उपले बनाने में देसी गाय का गोबर प्रयोग में लाया गया. हे गोबरगणेश ! अगर आप व्यावसायिक दृष्टि से कंडा पाथना सिखा रहे हैं तो भी आप मूर्ख हैं. गाय के मुकाबले भैंस एक बार में ज्यादा गोबर करती है.

भारत की आम जनता जो काम बिना किसी प्रशिक्षण के सदियों से कर रही है, उसके नाम पर बीएचयू जैसे बड़े विश्वविद्यालय में करोड़ों रुपये क्यों फूंके जा रहे हैं ? यह कोई कोर्स नहीं है. यह कोई पढ़ाई नहीं है. यह एक विश्वविद्यालय में चल रहा घोटाला है.

भारत में गोबर गैस इसलिए लोकप्रिय नहीं हो पाया क्योंकि गोबर गैस की तकनीक काफी महंगी है. हमारी दादी के बाद कंडा पाथना बंद कर दिया गया ​क्योंकि कंडा जलता नहीं, सिर्फ सुलगता है. घर की दीवारें काली पड़ जाती हैं और बरसात में छतों से टार टपकता है. कंडे से ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले किसी ईंधन के बारे में मुझे नहीं मालूम है.

आज पूरी दुनिया प्रदूषण मुक्त ईंधन पर काम कर रही है, तब भारत के टॉप विश्वविद्यालय गाय पालना और कंडा पाथना सिखा रहे हैं, जो हम मध्ययुग में भी करते थे. क्या हम सबसे प्रदूषक ईंधनों में शुमार कंडे को वापस लाना चाहते हैं ? यह कोर्स शुरू करने का मकसद क्या है ?

जो सरकार उज्ज्वला योजना का फटा ढोल पीट रही है, वह युवाओं को कंडा पाथना सिखा रही है ? यह जिस गधे का आइडिया है, वह विशुद्ध पागल है. उसका तत्काल प्रभाव से सरकार इलाज कराए. वह युवा भारत के लिए खतरा है.

वे कौन गदहे प्रोफेसर और छात्र हैं जो सिखा रहे हैं और सीख रहे हैं ? मैं जानता हूं कि मैं अपमानजनक और कड़े शब्दों का इस्तेमाल कर रहा हूं, लेकिन मैं सायास ऐसा कर रहा हूं. किसी दिन कोई और बड़ा गदहा कहेगा कि ‘आओ गोबर और माटी लीपना सिखाएं.’

जानवर खड़ा दाना खाते हैं तो वह पचता नहीं. गोबर के साथ खड़ा खड़ी ही बाहर आ जाता है. किसी दिन कोई चूतिया कहेगा कि ‘आओ गोबर से दाना बीनकर रोटी बनाना सिखाएं !’ ये हमारे टॉप के संस्थानों में हो क्या रहा है ? कौन इन्हें बर्बाद करने का अभियान चला रहा है ?

विश्वविद्यालय में कंडा पाथने का कोर्स चलाना जिस महापुरुष का आइडिया है, वह भारतीय युवाओं को अक्ल का अंधा बनाकर तीन चार सदी पीछे ले जाने की देशद्रोही परियोजना पर काम कर रहा है. ऐसे लोगों से, ऐसे विचारों से, ऐसे संस्थानों से सतर्क रहें. वायरल वीडियो में योगी जी के कथनानुसार, ‘ये क्या चूतियापना है ?’

पढ़ लिखकर प्रोफेसर बन गए, पाथ रहे हैं कंडा,
रोजी मांग रहे थे लौंडे, हाथ में आया अंडा.

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें]

Previous Post

‘देश के संसाधनों पर पहला हक मुसलमानों का है’ – इस कथन की सच्चाई क्या है ?

Next Post

आज बचेंगे तो कल सहर देखेंगे

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

आज बचेंगे तो कल सहर देखेंगे

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

भारतीय सत्ता का चरित्र जनविरोधी क्यों है ?

February 28, 2021

सावित्रीबाई फुले की बेटी (शिष्या) मुक्ता साल्वे, पहली दलित लेखिका का निबंध : ‘मंग महाराच्या दुखविसाई’

January 10, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.