Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

कैमूर : पुलिसिया गैंग द्वारा 30 वर्षीय आदिवासी महिला की बलात्कार और हत्या के खिलाफ उबला पहाड़

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 12, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
कैमूर : पुलिसिया गैंग द्वारा 30 वर्षीय आदिवासी महिला की बलात्कार और हत्या के खिलाफ उबला पहाड़
कैमूर : पुलिसिया गैंग द्वारा 30 वर्षीय आदिवासी महिला की बलात्कार और हत्या के खिलाफ उबला पहाड़
विनोद शंकर

ड्रोन सर्वेक्षण के पायलट प्रोजेक्ट में शामिल बिहार के एक मात्र रोहतास जिले के कैमूर पहाड़ी, जंगल व जमीन की निगरानी वन विभाग ने ड्रोन से शुरू कर दी लेकिन यहां की आदिवासी महिलाओं के संग बलात्कारी पुलिसिया गैंग की निगरानी नहीं हो पाती. विदित हो कि रोहतास जिले के रोहतास पहाड़ी पर रोहतास थाना अंतर्गत नागा टोली गांव की 30 वर्षीय महिला का शव रोहतासगढ़ किला जाने वाले रास्ते के कठौतिया घाट के समीप घने जंगल से  बरामद किया गया.

कैमूर मुक्ति मोर्चा ने इस नृशंस घटना पर आक्रोश जाहिर करते हुए रोहतास जिले के नागाटोली गांव के एक आदिवासी महिला की वन विभाग के सिपाहियों द्वारा की गई हत्या को पूरे पहाड़ की जनता पर हमला बताया है. इसके साथ ही उसने जनता और जनवादी ताकतों से अपील की है कि वे इस जघन्य कुकृत्य के  खिलाफ आवाज़ उठाएं और जल-जंगल-ज़मीन पर अपने हक और अधिकार की लड़ाई तेज करें.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

4 जनवरी 2023 को सुबह दस बजे नागाटोली गांव की 10 महिलाएं जलावन की लकड़ी लेने जंगल में गई थीं, जहां जंगल में उनका सामना वन विभाग के सिपाहियों से हो गया और वे महिलाओं को पकड़ने के लिए उन्हें दौडाने लगे. भागने के चक्कर में महिलाओं का जंगल में एक-दूसरे से साथ छूट गया.

इसके बाद शाम में जब सभी महिलाएं गांव पहुंची तो उन्होंने देखा की एक महिला तो जंगल से लौटी ही नहीं है. इसके बाद गांव के सभी लोग उस महिला को खोजने जंगल में चले गये और देर रात तक तक उसे ढूंढते रहे, पर उसका कोई पता नहीं चला. इसके बाद गांव के सभी लोग 5 जनवरी को सुबह ही महिला को खोजने के लिए जंगल में चले गए.

जंगल में काफी तलाश करने के बाद दोपहर 2 बजे महिला का शव उन्हें 30 फुट गहरी खाई में मिला, जिसके चलते वे शव को बाहर भी निकाल नहीं पाए. इसके बाद गांव के लोगों ने इसकी सूचना रोहतास थानाध्यक्ष को दिया, पर उसने यह कह कर लाश उठाने से मना कर दिया की यह घटना वन क्षेत्र में घटी है, इसलिए वो मृतक महिला का शव नहीं उठायेगा.

इसके बाद गांव के लोगों ने नौहाटा थाना को इसकी सूचना दी और उसी ने 6 जनवरी को दोपहर में खाई में से लाश को बाहर निकाला, जिसे लेकर गांव के लोग रोहतास रेंज ऑफ़िस चले गए और वहीं महिला का शव रखकर धरने पर बैठ गए.

गांव के लोगों ने आरोप लगाया कि मृतक महिला का सामूहिक बलात्कार और हत्या करके वन विभाग के सिपाहियों ने खाई में फेंक दिया था इसलिए वन विभाग इस हत्या और बलात्कार की जिम्मेदारी ले और अपने दोषी सिपाहियों पर कार्रवाई करे. लेकिन इस हत्या की जिम्मेदारी लेना तो दूर रोहतास के रेंजर हेमचंद्र मिश्रा ने ये कह दिया कि महिला जंगल में लकड़ी चोरी कर रही थी, जिसे वन विभाग के सिपाहियों ने देख लिया और वो महिला उन्हें देख कर भागने लगी और अपने से खाई में गिर कर मर गई.

रेंजर के बात से गुस्साए लोगों ने रेंज ऑफ़िस में काफी तोड़फोड़ किया और रेंजर हेमचंद्र मिश्रा को भी पीट दिया. इस घटना की जानकारी होने पर और भीड़ को काबू करने के लिए रोहतास जिले के डीएम और एसपी उसी रात धरना स्थल पर चले आये और समझा-बुझा कर लोगों को शान्त किया व आश्वासन दिया कि जो भी दोषी होगा उसे बख्शा नहीं जायेगा.

अधिकारियों द्वारा मृतक के परिजनों को सरकारी नियम के अनुसार मुआवजा देने की बात कहते हुए शव को रात में ही पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. अधिकारियों द्वारा कहा गया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट एक हफ्ते बाद यानी 13 जनवरी को आयेगी. इसके बाद ही पता चलेगा कि मृतक महिला के साथ बलात्कार हुआ है या नहीं ? और उसकी मौत हत्या है या नहीं ?

अब तक पुलिस ने दो वन कर्मियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन उनका नाम मीडिया में जाहिर नहीं किया है. जब हमने इस मामले पर गांव वालों से बात किया तो उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक हमलोग चुप हैं, इसके बाद मृतक महिला को न्याय दिलाने के लिए बड़ा जनांदोलन किया जायेगा.

इस घटना से वन विभाग और आदिवासियों के बीच जंगल पर स्वामित्व के लिए चल रहा संघर्ष बहुत तीखा हो गया है. वन विभाग की इस हरकत से पूरे पहाड़ का माहौल गर्म हो गया है. यहां की जनता का साफ कहना है कि वन विभाग कौन होता है हमें जंगल में जाने से रोकने वाला ? हमारा पुरा जीवन जंगल से जुड़ा है. इसलिए कोई हमसे हमारा जंगल नहीं छीन सकता. आज नहीं तो कल वन विभाग को जंगल से जाना होगा क्योंकि जंगल हमारा है वन विभाग का नहीं.

उस महिला पर किया गया हमला पूरे आदिवासी समाज के साथ-साथ यहां रहने वाले सभी लोगों पर हमला है क्योंकि यहां की सभी महिलाएं चाहे वो आदिवासी हों या गैर आदिवासी, जरुरत पड़ने पर अकेले ही जंगल में चली जाती हैं. यहां उन्हें अपने साथ किसी अनहोनी की कोई चिंता नहीं होती है लेकिन इस घटना ने महिलाओं के साथ-साथ पूरे समाज की चिंता को बढ़ा दिया है और वो सोचने लगे हैं कि जंगल में हमें बाहरी लोगों का हस्तक्षेप किसी भी हाल में रोकना होगा, चाहे वो वन विभाग ही क्यूं न हो.

इस घटना पर स्थानीय मीडिया की चुप्पी भी हैरान करने वाली है. कैमूर पठार का बड़ा भाग कैमूर जिले में ही पड़ता है, पर यहां के अखबारों में इस घटना की रिपोर्टिंग भी ठीक से नहीं हुई. एक-दो अखबारों को छोड़ दें तो बाकी अखबार तो इस घटना पर चुप ही रहे. शायद वन विभाग के खिलाफ़ पूरे पहाड़ की जनता एकजुट न हो जाए, इसलिए वन विभाग मीडिया को मैनेज कर इस मामले को दबाने में लगा है.

ऐसे समय में सभी सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी बहुत बढ़ जाती है कि वे जनता तक सही सूचना पहुंचाएं. उन्हें जागरुक और संगठित करें. किसी भी परिस्थिति में संघर्ष करने के लिए तैयार करें क्योंकि ऐसे मामलों पर पूरे पहाड़ के जनता की एकजुटता बहुत जरुरी है, तभी हम अपना जल-जंगल-ज़मीन बचा सकते हैं और इज्जत तथा मान-सम्मान के साथ इस पहाड़ पर रह सकते हैं.

Read Also –

काला गुब्बारा उड़ाकर झारखंड की जनता ने किया अमित शाह के 2024 के चुनावी अभियान का प्रतिरोध
बीजापुर में आदिवासियों के शांतिपूर्ण आन्दोलन पर पुलिसिया हमला पर मानवाधिकार कार्यकर्ता सोनी सोरी से साक्षात्कार
आदिवासी इलाकों में स्थापित पुलिस कैम्प यानी आदिवासियों की हत्या करने की खुली छूट के खिलाफ खड़े हों !
छत्तीसगढ़ : आदिवासी क्षेत्र को बूटों से रौंदा जा रहा
आदिवासी तबाही की ओर
आदिवासी सुरक्षा बलों के कैम्प का विरोध क्यों करते हैं ?

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

हल्द्वानी-जोशीमठ : विनाशकारी परियोजनाओं पर सवाल के बजाय विनाश के बचाव में तर्क की तलाश

Next Post

नफरत से भरी मनुस्मृति, रामचरितमानस और बंच आफ थाट्स जैसी किताबों को जला देना चाहिए

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

नफरत से भरी मनुस्मृति, रामचरितमानस और बंच आफ थाट्स जैसी किताबों को जला देना चाहिए

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

वोल्गा नदी से मध्य एशिया तक आर्यों की यात्रा

January 20, 2021

फ़ासीवादी मोदी शासन का लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला…अंतिम रास्ता सड़क है…!

April 15, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.