निराश नहीं हूं प्रिय
न ही है तुमसे शिकायत
कुछ ही दिनों में
जी लिया पूरा जनम
हमने साथ निभाने का वचन लिया था
तुम न रही तो क्या
मैं हूं न
अपनी लाश खुद के कांधे उठाये
चलूंगा
सृष्टि के अंत तक
ताकि छीन सकूं सृष्टिकर्ता से
तुम्हारे संग जियें हर पल को
अनंत विस्तार देने की ताकत !
- रोहित शर्मा/15.4.23
[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]
