Saturday, June 13, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

सवाल आया है- सुभाष तो चुने गए अध्यक्ष थे, तो गांधी ने काम क्यों नहीं करने दिया ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 11, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
सवाल आया है- सुभाष तो चुने गए अध्यक्ष थे, तो गांधी ने काम क्यों नहीं करने दिया ?
सवाल आया है- सुभाष तो चुने गए अध्यक्ष थे, तो गांधी ने काम क्यों नहीं करने दिया ?

सवाल आया है- सुभाष तो चुने गए अध्यक्ष थे, तो गांधी ने काम क्यों नहीं करने दिया ? जवाब यह है- पहली बार तो सुभाष, बिना चुनाव के सर्व सहमति से चुने गए थे. इतनी सर्वसहमति कि लन्दन में बैठे थे, तब तार मिला, आ जाओ अध्यक्ष चुन लिए गए हो.

साहेब की सवारी आयी. शपथ लिए. 51 वे अध्यक्ष थे. 51 स्वागत द्वार, 51 लड़कियों का नृत्य, 51 बैलगाड़ी में रैली. भीतर भीतर अपनी टीम बनाना (जिसने अगले साल चुनाव जितवा दिया), सीनियर्स को किनारे लगा देना. मने सॉरी टू से, सस्ती भाषा में इसे थेथरोलॉजी कहते हैं.

You might also like

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

सरदार पटेल से पुरानी अदावत थी. कोर्ट, प्रोपर्टी, फर्जी वसीयत का मसला था. पटेल साल भर काट लिए. लेकिन अगला साल, जब ये रिपीट होना चाहे, पूरे सीनियर खिलाफ खड़े हो गए. लेकिन जिद में एलेक्शन्स में खड़े हुए. जीत भी गए. उसी नेटवर्क से जो पिछले साल भर खड़ा कर रहे रहे.

जीत लिए तो थोड़ी नरमाई दिखाई, अपनी कार्यसमिति में सब सीनियरको लिया लेकिन खुद, नेहरू, और बड़े भाई शरद को छोड़ सबने रिजाइन कर दिया. इसके साथ काम हीं नहीं करना है. अड़े हुए थे.

सुभाष ने गांधी से मदद मांगी. गांधी अंदरूनी सेंटिमेंट समझ रहे थे. इस्तीफा देने की सलाह दी लेकिन इस्तीफा दिया नहीं. 5 माह खींचते रहे मगर नई कार्यसमिति न बना पाए.

नेहरू कलकत्ता गए. मीटिंग थी. ये नेहरू से सपोर्ट मांगने लगे. कुछ पार्टी स्प्लिट टाइप. नेहरू गहरे दोस्त थे, मगर गांधी के विरुद्ध जाने से मना कर दिया. ये आखरी उम्मीद थी. कांग्रेस में अलग थलग पड़ गए तो इस्तीफा दिया. ऑलमोस्ट 6 माह (आधा कार्यकाल) निकाल दिए थे.

पोलिटीशयन पोलिटीशयन होता है, सब कुछ कहलवाना नहीं चाहिए. पर अब कह देने का दौर है. दिल विल टूटा तो माफ़ करें.

2

इक सवाल तुम करो, इक सवाल मैं करूं
हर सवाल का जवाब, इक सवाल हो तो कित्ता मजा आये. हिहिहि…

तो सवाल ये कि 1946 में कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव हुआ. 15 प्रदेश समितियों में से 12 ने सरदार पटेल को चुना. नेहरू को मिला अंडा- बिग जीरो. हिहिहि…! नेहरू बने अध्यक्ष, देयरफॉर पीएम. बहुते अत्याचार हुआ !

इस इलेक्शन के 7 साल पहले एक इलेक्शन हुआ. सुभाषचंद्र और पट्टाभिसीतारमैया के बीच.

सुभाष को मिले 1580 वोट
पट्टाभिसीतारमैया को मिले 1377

याने टोटल वोट पड़े कोई 2957 वोट.

इस इलेक्शन के 90 साल बाद एक और इलेक्शन हुआ.

खरगे को मिले – 7897 वोट
थरूर को मिले- 1072 वोट

कांग्रेस के संविधान में अध्यक्ष के चुनाव में वोट, डेलीगेट्स डालते हैं, जो जिला से प्रदेश, और प्रदेश से नेशनल स्तर पर चुने जाते हैं. ये चुने गए लोग, अध्यक्ष पद के लिए वोट डालते हैं.

सुभाष-पट्टाभिसीतारमैया के एलेक्शन्स के समय, 3000 डेलीगेट रहे होंगे. खरगे-थरूर चुनाव के समय लगभग 9500 डेलीगेट थे. इनके वोटो का नतीजा, रिकार्ड पर है. डॉक्यूमेंट पर है. गूगल पे दसियों जगह है.

सुसरा, 1946 के चुनाव का नतीजा हजारों में नहीं, 12-0 कैसे आता है ?? 1946 में कांग्रेस के संविधान में डेलीगेट वाली व्यवस्था लुप्त कैसे हो गयी ?? कौन सी कमेटियां चुनाव करने लगी, वोट देने लगी. ये कांग्रेस की तो व्यवस्था ही नहीं है तो संघी सहित्यकारों ने, 12-0 से कांग्रेस में यह इलेक्शन करवाया कैसे ??

असल में एक प्रोफेसर हैं मक्खनलाल. खुर्राट संघी. आधुनिक काल के पीएन ओक. इन्होंने एक आर्टिकल लिखा ‘द प्रिंट’ पर. उसमें ये गप्प लिखी और उसे कोट करके 100 लोगों ने लिखा. उसे कोट करके एक लाख लोगों ने लिखा.

यहां तक कि BBC ने लिखा. अभी कल परसों के बीबीसी के नक्काल (पूर्व)एडिटर से मेरी बकझक हुई. लन्दन में रहता है. बकवास लिखता है. उसकी वाल पर बीबीसी का वही लेख मिला, जो मक्खनलाल के टैक्स्ट की कॉपी है.

प्रिंट और बीबीसी, प्रतिष्ठित संस्थान है. इसमे बैठे चंपू एडिटर्स ऐसे लेख आमंत्रित करते हैं. छापते हैं. नीचे एक लाइन छापते है – ‘ये लेखक श्री फलना ढेकना के पर्सनल व्यूज है.’ यह लाइन आप देखते नहीं. किसी की गपोडशंखी के अधकचरे प्रोपगंडा को, बीबीसी और प्रिंट का आधिकारिक रिसर्च मान लेते हैं.

अंतिम सवाल. तो नेहरू का इलेक्शन कैसे हुआ ? अरे भाई, वैसे ही, जैसे नड्डा का हुआ. बिना एलेक्शन, आम सहमति !!!

  • मनीष सिंह

Read Also –

अफवाहबाज जी-न्यूज एंकर पर कांग्रेस की आक्रामकता बेहतर संकेत है
‘कांग्रेस का डीएनए विभाजनकारी है’ – मोदी

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

गायब होता फिलिस्तीन, कब्जाता इस्राइल और लड़ता हमास

Next Post

अमेरिकी साम्राज्यवाद को ललकारता उत्तर कोरिया

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

by ROHIT SHARMA
June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

by ROHIT SHARMA
June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

by ROHIT SHARMA
June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
Next Post

अमेरिकी साम्राज्यवाद को ललकारता उत्तर कोरिया

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मोदी का अंबानीनामा : ईस्ट इंडिया कंपनी-II

April 8, 2024

गंभीर विमर्श : विभागीय निर्णयों की आलोचना के कारण पाठक ने कुलपति का वेतन रोक दिया

May 14, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

June 10, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

June 12, 2026

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

June 12, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.