Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

जो इतिहास को जानता है, वह भविष्य भी जानता है…

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 20, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
जो इतिहास को जानता है, वह भविष्य भी जानता है...
जो इतिहास को जानता है, वह भविष्य भी जानता है…

इतिहास में मेरी रुचि बचपन से रही. पहला परिचय तो छठवीं-सातवीं की सामाजिक अध्ययन की किताबों से ही था. पर ये जल्द छूट गया क्योंकि औरो की तरह मैंने भी साइंस लिया. आगे चलकर बीए तो करना नहीं था मुझे लेकिन खुशकिस्मत था कि घर में कुछ और लोगों ने बीए किया. तो उनकी किताबें उपलब्ध थी, जिन्हें पढ़ा. फिर एक दौर आया जब एग्रीकल्चर से लेकर मैनेजमेंट तक की किताबें पढ़ने का शौक हुआ. उन कोर्स में चलने वाली किताबें बाकायदा खरीद लेता.

पर हिस्ट्री अकेले नहीं आती. उसके साथ पोलिटीकल साइंस जुड़ा है, सोशोलोजी जुड़ी है, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन जुड़ा है, धर्म और दर्शन जुड़ा है. याद कीजिए. एक राजा के जन्म-युद्ध-विजय-उत्तराधिकार की कहानी के अलावे, आप यह भी तो पढ़ते हैं कि उसके राज्य में सामाजिक व्यवस्था कैसी थी. उसने कर किस प्रकार के लगाए थे. उसने मन्दिर बनवाये या विहार, उसके शिलालेख उसके किन धार्मिक विचारों को दिखाते हैं.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

आप यह जानने लगते हैं कि किसी वंश, या सभ्यता की नींव कैसे रखी गयी. क्या नीतियां उसे शिखर तक ले गयी. किन गलतियों की वजह से पराभव हुआ. उठाव, और गिरावट के हर बार वही आधे दर्जन कारण मिलेंगे. वंश, काल, देश, नाम बदल जाएंगे. बार बार किस्सा वही मिलेगा.

तो मानव सभ्यता का चार हजार साल का इतिहास, नजर उठाकर देखिए. दर्शन का इतिहास, धर्म का इतिहास, राजवंशों का, तानाशाहों का, धनवानों का इतिहास, साधुओं का इतिहास, देशों का इतिहास, हिंदुस्तान का इतिहास, चीन का, मिस्र का… मंगोलों का, मुगलों का, फ्रांस का, हिटलर का, स्टालिन का…, आपको राजकाज के खेल समझ आते हैं.

और आपको समझ आता है कि तमाम पोलटिकल फिलॉसफी क्या रही. क्या है वामपन्थ. दक्षिणपंथ शब्द का मूल क्या है. नेशनलिज्म क्या था, कैपिटलिज्म क्या है, कम्युनिज्म क्या है, सोशलिज्म और फासिज्म क्या है ?? कॉन्स्टिट्यूशन क्या होता है. इन अलग-अलग तरह के सिस्टम की इन्हेरेंट डाइनेमिक्स क्या है लेकिन इनके भीतर पॉवर ग्रेब के एक समान बेसिक फंडे क्या हैं.

इसमें रिलीजन कैसे घुसा हुआ है. कैसे पुजारी, राजा, धनिक और प्रभुत्वशाली वर्ग अपने खेल खेलता है. वर्चस्व कायम रखता है. और आप पाएंगे कि ये सारे खेल वही हैं. वक्त की शिला पर, एक चेसबोर्ड सजा है. उसी चेसबोर्ड पर वही गोटियां सजी है. खिलाड़ी बदलते हैं, हर कदम पर चार सम्भावित चालें है.

इतिहास के झरोखे से आपने यह सेटिंग बीसियों बार देखी है. तो आप अच्छे से, तो अभी समझ जायेंगे की मौजूदा सेटिंग में चली जा रही, इस चाल के बाद की पांचवी, आठवी या बारहवीं चाल में क्या चला जायेगा.

सत्ता का खेल सदा से एक सा है. पर लोकतन्त्र में खूबी यह कि इस खेल में हम भी भागीदार बने हैं. एक चाल हम दर्शकों को भी मिलती है. तब हम चेसबोर्ड रिसेट कर देते हैं या नहीं करते हैं, ताकि हमें टैक्स कम देना पड़े.

जितना दे, उसके बदले राजा से ऐसी ऐसी सुविधाएं मिलें, कि हमें अपनी जेब का खर्च न करना पड़े. यानी, बच्चों की पढ़ाई, सस्ती चिकित्सा, सस्ता ट्रांसपोर्ट, रोजगार के अवसर, सड़क, बिजली, पानी, आजादी और डिग्निटी..

राजा मुझ पर हेकड़ी झाड़ने की हिम्मत न कर सके. मेरी जान न ले सके, जेल में न डाल सके, मेरा मुंह न बन्द करवा सके. और चेसबोर्ड रिसेट करने की मेरी पॉवर छीन न सके. जब तक उसकी चेस को पलट देने की ताकत हमारी मुट्ठी में है, तब तक हम गेम में हैं.

हमें गेम से हटाने को कई इमोशनल फंदे हैं- धर्म, नेशन, लैंगवेज, प्रजाति, गर्व…सब के सब फर्जी कॉन्सेप्ट. राजा ने, पुजारी ने, धनिकों ने, मुफ्त में हमसे अपनी पालकी ढोने के लिए इनका आविष्कार किया है. वह इन्हीं चालों का हर दौर में इस्तेमाल करते आये हैं. और इतिहासबोध से नावाकिफ कीड़े, इनके लिए, बन्धु बांधवों के साथ, मरने मारने के लिए रेडी रहते हैं.

यही सेम टू सेम खेल रामायण-महाभारत से लेकर अमृतकाल तक खेला गया है. देवता हों, दानव हों, दक्षिणपंथी हों, वामपन्थी हों, राजा हों, या राजनीतिक दलों के लीडर्स…, अपनी चेस खेल रहें हैं. आप भी अपने हिस्से का खेलिए. खिलाड़ी बनिये, मोहरा नहीं. और जब मोहरे की जगह खिलाड़ी बन जाएंगे, तो चेसबोर्ड से ऊपर उठ जाएंगे. वहां से अपना, और शत्रु का पूरा व्यूह दिखेगा. कब किसके साथ एलाई बनना है, किसकी कमर तोड़नी है, दिख जायेगा क्योंकि आपने इतिहास पढ़ा है.

किताबो के झरोखे से आपने यह सेटिंग बीसियों बार देखी है. अगर आप अच्छे से, खुले दिमाग से यह शतरंज देख चुके हैं…तो अभी समझ जायेंगे की मौजूदा सेटिंग में इस चाल के बाद की पांचवी, आठवी या बारहवीं चाल में खिलाड़ी कौन सी चाल चलेगा. जो इतिहास को जानता है, वह भविष्य भी जानता है…!

  • मनीष सिंह

Read Also –

प्राचीन भारत के आधुनिक प्रारंभिक भारतीय इतिहासकार
भारत का इतिहास पराजयों का इतिहास क्यों है ?
इतिहास लुगदी नहीं है !
बोल्शेविक क्रांति – समकालीन इतिहास में उसका महत्व
‘यूटोपिया’ : यानी इतिहास का नासूर…

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Tags: #इतिहास#कॉन्स्टिट्यूशन#फासिज्म#रिलीजन#लोकतन्त्रमानव सभ्यता
Previous Post

वित्तीय शक्तियों और राजनीति के अनैतिक गठजोड़ ने संगठित ठगी के दौर को जन्म दिया है

Next Post

‘लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करो’ – फुनशुक वांगरु (सोनम वांगचुक)

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

'लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करो' - फुनशुक वांगरु (सोनम वांगचुक)

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

कहां तक समझी पारोमिता

December 18, 2021

कोरोना काल : घुटनों पर मोदी का गुजरात मॉडल

May 9, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.