Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

‘लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करो’ – फुनशुक वांगरु (सोनम वांगचुक)

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 21, 2024
in ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
‘नमस्कार, आज चौथा दिन शुरू हो रहा.है हमारे अनशन का. खुले आसमान के नीचे माइनस 16 डिग्री सेल्सियस तापमान में हम बैठे हैं. आप देख रहे हैं कि यह गिलास जो पानी से भरा हुआ था पूरा जम गया है. इस गिलास से तो विज्ञान का अनुसंधान हो गया कि जमने पर पानी का वोल्यूम बढ़ जाता है. ऐसे में हम आमरण अनशन कर रहे हैं.
‘मगर सबसे हैरानी मुझे यह है कि भारत की मेनस्ट्रीम मीडिया में इस आंदोलन का, सीमा पर जो कुछ हलचल उथल-पुथल हो रहा है, उसका जरा भी जिक्र नहीं है. सीमा पार से एक सीमा हैदर आती है तो उस पर सैकड़ों घंटा चर्चा होती है, मगर भारत-पाकिस्तान की सीमा लद्दाख पर जीरो चर्चा होती है.
‘आपको पता है मेरे ख्याल से आज इस सीमा पर हमारे सैनिक सबसे कमजोर स्थिति में हैं. क्योंकि यहां पर सबसे बड़े लड़ाकू माने जाते हैं लद्दाख स्काउट्स, सिख रेजिमेंट और गोरखा रेजिमेंट. आज लद्दाख के सैनिकों का मनोबल टुटा है. ठेस पहुंचा है क्योंकि लद्दाख में न लोकतंत्र दिया गया है और न ही संरक्षण. दूसरी तरफ सिख रेजिमेंट का भी मनोबल कमजोर है क्योंकि पंजाब में जो किसानों का आंदोलन हो रहा है उसका असर उन पर भी पड़ता है.
‘और गोरखा रेजिमेंट तो अग्निवीर के चलते, वे चार साल को नकार रहे हैं. उससे भी बुरा यह हो रहा है कि वे चीन की सेना में भर्ती होने जा रहे हैं. वही सैनिक जो हमारी शक्ति थी. जिनके बारे में कहा जा रहा था कि अगर कोई यह बोले कि उसे मरनै से डर नहीं लगता है तो या तो वह झूठ बोल रहा है या वह गोरखा है. अब वही गोरखा चीन की ओर से हमसे लड़ेंगे.
‘ऐसा उथल पुथल हो रहा है लेकिन हमारी मेनस्ट्रीम मीडिया जरा भी चर्चा ने कर रही है. मेरी आपसे विनती है कि आप मीडिया बने और मेरी वीडियो को शेयर करें. और कहें हमारे भारत की मीडिया चैनल से जो कि आप देश का चौथा स्तम्भ हैं, पीलर हैं हमारी डेमोक्रेसी का, कि वे अपना फर्ज निभायें.
‘मेरी समझ में नहीं आता कि वे रात को सोते कैसे होंगे इस तरह की दोगलापंथी में. मुझे उम्मीद है कि आप सब समर्थन करेंगे लद्दाख के इस आंदोलन का, भारत के सीमा के रक्षा का समर्थन करेंगे क्योंकि लद्दाख सीमा की सुरक्षा में ही देश की सुरक्षा है. नमस्कार.’

– सोनम वांगचुक,

सोनम वांगचुक ने अपने आयरण अनशन के चौथे दिन दो मिनट के अपने वीडियो में उपरोक्त बातें कही है. अपने इस दो मिनट के वीडियो में सोनम वांगचुक ने भारत की फासिस्ट भाजपा सरकार के देश विरोधी, किसान विरोधी, सैनिक विरोधी नीतियों का पोस्टमार्टम करके रख दिया है, जो देश के बड़े बड़े कलमघीस्सूओं और घंटों भाषण देने वाले भाषणवीर नहीं कर पाते.

You might also like

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

फासिस्ट भाजपा की मोदी सरकार ने विकास के नाम पर विनाश का एक ऐसा दौर पिछले दस सालों से देश में चला रखा है, जिस कारण देश के तमाम समुदाय त्राहिमाम कर रहा है. किसान, मजदूर, स्त्री, आदिवासी, दलित, पिछड़ा, अल्पसंख्यक समेत नौकरशाह तक परेशान हैं. ऐसे मेंं ही लद्दाख से एक जोरदार आवाज उठी है -अमिर खान की धमाकेदार बनी फिल्म थ्री इडियट्स का मुख्य किरदार हैं फुनशुक वांगरु की, जिनका असली नाम सोनम वांगचुक है.

धमाकेदार फिल्मी करैक्टर फुनशुक बांगरु काल्पनिक नहीं एक वास्तविक करैक्टर है, जिनका वास्तविक नाम है – सोनम वांगचुक. लद्दाख के मशहूर क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक आज लद्दाख के साथ साथ समूचे देश के पीड़ित समुदाय का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, उनकी आवाज बन गये हैं. वे और उनके साथ 1500 सहयोगी विगत 14 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं, और मोदी सरकार कान में रुई ठूंसे कभी मंदिर तो कभी समुद्र के नीचे मुजरा कर रही है.

आज सोनम वांगचुक के आमरण अनशन को 14 दिन बीत चुके हैं. उनके साथ 1500 लोग सोमवार को एक दिवसीय भूख हड़ताल पर थे. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए बताया कि कैसे 250 लोग उनके समर्थन में रात को भूखे सोए. वांगचुक लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं, जो प्रदेश के स्थानीय लोगों को आदिवासी इलाके में एडमिनिस्ट्रेशन का अधिकार देगा.

सोनम वांगचुक ने कहा कि जब विविधता में एकता की बात आती है तो छठी अनुसूची भारत की उदारता का प्रमाण है. यह महान राष्ट्र न सिर्फ विविधता को सहन करता है बल्कि उसे प्रोत्साहित भी करता है. उन्होंने 6 मार्च को ‘#SAVELADAKH, #SAVEHIMALAYAS’ के अभियान के साथ 21 दिनों का आमरण अनशन शुरू किया था. उन्होंने कहा था कि यह अनशन जरूरत पड़ने पर आगे भी बढ़ाया जा सकता है.

END OF DAY 13 OF #CLIMATEFAST
Some 1500 People gathered here for one day fast today.
And 250 sleeping in the open with me.
6th Schedule is a proof of generosity of India when it comes to Unity in Diversity. This great nation not only tolerates diversity but also encourages it.… pic.twitter.com/jHKxTvA9cv

— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) March 18, 2024

सोनम वांग्चुक ने वीडियो जारी कर सोशल मीडिया पर चल रहे भ्रम को दूर करने की कोशिश की है. उन्होंने बताया कि छठी अनुसूची का मकसद सिर्फ बाहरी लोगों को ही रोकना नहीं है, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील इलाके या संस्कृतियां-जनजातियां सभी को स्थानीय लोगों से भी बचाने की जरूरत है. उन्होंने बताया कि इसके लागू होने के बाद से स्थानीय लोगों से भी इन्हें बचाया जा सकेगा.

मशहूर सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने विस्तार से बताया कि आखिर उनके आमरण अनशन की क्या वजह है. उन्होंने कहा कि जहां तक उद्योग की बात है तो जो इलाके संवेदनशील नहीं हैं, उन्हें इकोनॉमिक जोन बनाया जा सकता है, ताकि उद्योग लगे, देश-दुनिया से निवेश हो. इसमें लद्दाख के लोगों को कोई मसला नहीं है.

सोनम वांगचुक और स्थानीय लोग लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं. धारा 370 खत्म किए जाने के बाद लद्दाख एक केंद्रशासित प्रदेश बन गया है, और जम्मू कश्मीर में विधानसभा की तरह यहां कोई स्थानीय काउंसिल नहीं है. छठी अनुसूची में शामिल किए जाने के बाद लद्दाख के लोग स्वायत्त जिला और क्षेत्रीय परिषदें बना सकेंगे, जिसमें शामिल लोग स्थानीय स्तर पर काम करेंगे. इनके अलावा उनकी केंद्रीय स्तर पर लोकसभा में दो सीट और राज्यसभा में भी प्रतिनिधित्व की मांग है. असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम छठी अनुसूची में पहले से शामिल हैं, जो आदिवासी समुदाय को विशेष सुरक्षा प्रदान करता है.

मोदी एक जिद्दी और सनकी राक्षस है, वोट पाने के बाद झूठे वादे के अलावा ये जनता को सिर्फ भाषण देता है रैलियों में

— राहुल सिंह सूरवार (@Rahulsurvar2) March 18, 2024

जैसा कि राहुल सिंह सूरवार (राजपूत) अपने एक ट्वीट में कहते हैं ‘मोदी एक जिद्दी और सनकी राक्षस है. वोट पाने के बाद झूठे वादे के अलावा ये जनता को सिर्फ भाषण देता है रैलियों में’ मोदी सरकार का एक सटीक मूल्यांकन है.

https://www.pratibhaekdiary.com/wp-content/uploads/2024/03/VID-20240312-WA0020.mp4

वहीं, ए. के. ब्राईट लिखते हैं कि आखिर लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता द्वारा चुनी गई सरकार इतनी निर्दयी कैसे हो सकती है ! हम सब जानते हैं लद्दाख निवासियों की मांगें विधिक प्रक्रियाओं का हिस्सा हैं और ये मांगें दो चार दिन के अंदर पूरी नहीं की जा सकती हैं. सरकार की तरफ से अधिकृत मंत्री या विशेष प्रतिनिधि को लद्दाख में आमरण अनशन पर बैठे प्रख्यात पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक से बातचीत करते हुए उनका अनशन समाप्त करने की कोशिश करनी चाहिए.

गौरतलब हो कि सोनम वांगचुक को ब्लड शुगर की समस्या है. पानी को जमा डालने वाली माइनस 16 डिग्री सेल्सियस पर यह आमरण अनशन खतरनाक साबित हो सकता है. सरकार को समय रहते हुए त्वरित हस्तक्षेप के साथ लद्दाख निवासियों की जो भी राजनीतिक समस्याएं हैं, उनके निस्तारण के लिए समय-सीमा तय कर इस आमरण अनशन को समाप्त किया जाना चाहिए.

Read Also –

लद्दाख में चीन और मोदी सरकार की विदेश नीति
मोदी को वोट देने के पहले कश्मीर की जनता के बारे में सोचो !
बिना पथ का अग्निपथ – अग्निवीर योजना
किसान आंदोलन को जालियांवाला बाग की तरह खून में डूबो दिया है मोदी सत्ता ने
वित्तीय शक्तियों और राजनीति के अनैतिक गठजोड़ ने संगठित ठगी के दौर को जन्म दिया है

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

जो इतिहास को जानता है, वह भविष्य भी जानता है…

Next Post

मुस्लिम प्रतिनिधित्व का मसला (1906-31)

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

by ROHIT SHARMA
March 22, 2026
ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
Next Post

मुस्लिम प्रतिनिधित्व का मसला (1906-31)

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

बोल्शेविक क्रांति – समकालीन इतिहास में उसका महत्व

February 25, 2024

‘आपकी कलम हथियार के अधिक खतरनाक है’ – NIA

September 7, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.