Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

सरकारी पुलिसिया हमले का विकल्प ‘आजाद गांव’

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 2, 2018
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

सरकारी पुलिसिया हमले का विकल्प ‘आजाद गांव’

गढ़चिरौली में पुलिस ने चालीस आदिवासियों को मार दिया. उनके पास से पुलिस ने आठ बंदूकें बरामद होने का दावा किया है. मतलब बाकी के बत्तीस लोग निहत्थे थे. आदिवासियों की हत्या, दलितों की हत्या, मुसलमानों की हत्या इसी तरह से भारत की पुलिस करती है. क्यों करती है इसे समझना जरूरी है. अगर आप बीमारी से मुक्ति चाहते हैं तो अपनी बीमारी को समझना जरूरी है.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

आपकी पुलिस क्रूर है. एक क्रूर समाज की पुलिस क्रूर ही होगी. जो समाज किसी से इसलिए नफरत करता है क्योंकि उसका जन्म किसी दलित मां के या मुसलमान मां के पेट से हो गया है, जो समाज किसी दलित के मूंछ रखने या शादी में घोड़ी पर बैठने की वजह से उसकी हत्या कर दे, जो समाज दलितों की जमीनें छीन कर ही बड़ा बना है, जो समाज मजदूर की मेहनत काट कर ही अमीर बना है, उस समाज की पुलिस क्रूर नहीं होगी तो क्या कानून के हिसाब से चलने वाली होगी ?

आपके घर की एक-एक ईंट खून में डूबी हुई है. आपके खाने का एक-एक निवाला किसान की आह से निकला है. आप उस इंसान को अपना प्रधानमंत्री बनाते हैं जो हत्याएं करवाता है ताकि आप खुद को बहुत महान धर्म वाले साबित कर सकें. आप क्या कानून और सही गलत को समझ सकते हैं ?

आप लूट नफरत और क्रूरता में डूबे हुए हैं. आपकी राजनीति आपका सामाजिक चिंतन आपकी अर्थव्यवस्था खून में तरबतर है. आपकी पुलिस जितनी हत्याएं करती है आप खुद को उतना सुरक्षित, उतना अमीर, उतना ऊंचा समझते हैं.

मैंने अपनी जीवन में बहुत लाशें देखी है. पुलिस द्वारा मारे गये आदिवासी बच्चों की लाशें, दलितों की लाशों के ढ़ेर देखे हैं. मुसलमानों के जलाए हुए घर और बिखरी हुई लाशें देखी हैं. यह सब आपकी जाति, साम्प्रदायिकता और आर्थिक लूट के शिकार लोग थे.

आपके सिपाही आपकी नफरत की शान की हिफाजत के लिए इस मुल्क के कमजोरों को मारने निकले हुए हैं. आपकी पूरी राजनीति इन सिपाहियों के साथ है. ये सिपाही ना हों तो ना आप अमीर रह पायेंगे, ना आप बड़ी जात के रह पायेंगे. आपकी सारी अमीरी और बड़ापन इन बन्दूकों के सहारे ही बचा हुआ है इसीलिये आपके इन सिपाहियों पर लोग हमला करते हैं क्योंकि वो एक दिन आप तक पहुंचना चाहते हैं ताकि आपका गिरेबान पकड सकें. वह दिन जरूर आयेगा.

– और वह दिन इस रूप में आ गया है –

एक बहुत जबर्दस्त घटना हो रही है, जिसके बारे में शहरी लोगों को पता नहीं है लेकिन इस घटना से सरकार बहुत डरी हुई है. आदिवासियों ने अपने गांव आजाद घोषित करने शुरू कर दिए हैं. मैंने गुजरात में जाकर इस तरह के गांव में आदिवासियों से मुलाकात करके पूरी जानकारी ली. आदिवासियों ने अपने गांव के बाहर सूचना लगा दी है कि भारत के संविधान की 5वीं अनुसूची के मुताबिक अब से इस गांव की जमीन, जंगल और विकास के बारे में इस गांव के आदिवासी खुद ही फैसला करेंगे. इस गांव में कोई भी सरकारी कर्मचारी, सरकारी अधिकारी, पुलिस वाले या वन विभाग के लोग प्रवेश ना करें. इस तरह की आजादी की घोषणा झारखंड और छत्तीसगढ़ के आदिवासियों ने भी करनी शुरू कर दी है. झारखंड और छत्तीसगढ़ के आदिवासियों ने अपनी परम्परा के मुताबिक आजादी की यह घोषणा पत्थर पर लिख कर गांव के बाहर लगा कर कर दी है. इससे सरकार पुलिस और कम्पनियां घबरा गई हैं.

भाजपा के लुटेरे नेता और गुंडे, कम्पनियों से रिश्वत खाकर काम करने वाले पुलिस के अधिकारी और उनके साथी भ्रष्ट अखबार के मालिक मिल कर आदिवासियों की इस घोषणा के खिलाफ मिल कर हमला बोल रहे हैं. हाल ही में कई आदिवासी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने जेल में डाल दिया है. भाजपा के गुंडों ने पत्थरों को उखाड़ दिया है और आदिवासियों पर हमला किया और पुलिस ने घायल आदिवासियों को ही जेल में डाल दिया है. मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल ने इस घटना के खिलाफ और आदिवासियों के पक्ष में बयान जारी किया है. पूर्व कृषि मंत्री और आदिवासी नेता अरविन्द नेताम ने भी पुलिस के इस हमलों का विरोध किया है.

इस महान क्रांति को हो सकता है गर्भ में ही मार दिया जाय लेकिन यह तो तय है कि इतिहास आदिवासियों के इस विद्रोह और आजादी के इस उद्घोष को बहुत महत्वपूर्ण घटना के रूप में दर्ज करेगा.

– हिमांशु कुमार के दो वाल पोस्ट से साभार

Read Also –

गढ़चिरौली एन्काउंटर: आदिवासियों के नरसंहार पर पुलिसिया जश्न
कालजयी अरविन्द : जिसने अंतिम सांस तक जनता की सेवा की
क्रूर शासकीय हिंसा और बर्बरता पर माओवादियों का सवाल
आदिवासियों के साथ जुल्म की इंतहां आखिर कब तक?

Previous Post

मोदी सरकार पर भारी दिल्ली सरकार

Next Post

हिंसा पर एक वैज्ञानिक नजरिया

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

हिंसा पर एक वैज्ञानिक नजरिया

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

‘माओवादियों’ का सरेंडर : किसकी जीत, किसकी हार ?

October 25, 2025

अडानी, मोदी सरकार और सुप्रीम कोर्ट

March 2, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.