
15 अगस्त के दिन, मोती और चिकारा स्कूल भ्रमण पर निकले.
मोती: (छात्रों को देखते हुए) बच्चों ! आज हम देशभक्ति, विकास और आत्मनिर्भरता पर चर्चा करेंगे.
रोहित: (हाथ उठाकर) मोती जी, आपने 2 करोड़ रोजगार और 15 लाख खाते में आने का वादा किया था, लेकिन 11 साल बाद न बेरोजगारी घटी और न काला धन आया. ये कैसे ?
(मोती के चेहरे पर पसीना, दिमाग में ‘सूर्यपुत्र थापर’ इंटरव्यू की याद आ गई – जब वे पानी पीने के बहाने इंटरव्यू रोककर निकल गए थे.)
मोती: (मन ही मन) काश, यहां भी पानी पीने का बहाना बन पाता…
तभी अचानक – स्कूल लंच की घंटी बजती है, और वो भी आधा घंटा पहले !
मोती: (मौके का फायदा उठाते हुए) बच्चों ! लंच टाइम हो गया, बाद में मिलते हैं. (जल्दी से कक्षा से खिसक जाते हैं)
लंच के बाद, मोती फिर लौटते हैं.
मोती: बच्चों, अब मैं आपको बिना एग्जाम के अंतरराष्ट्रीय राजनीति में BA की डिग्री पाने की प्रेरणादायक कहानी सुनाऊंगा.
(छात्र चुपचाप सुनते हैं, लेकिन कोई सवाल नहीं करता.)
मोती: तो… कोई सवाल ?
(करीब एक मिनट की चुप्पी)
शेखर: जी, दो सवाल हैं—लंच की घंटी आधा घंटा पहले कैसे बजी ? और लंच से पहले रोहित ने जो सवाल पूछा था, वो रोहित कहां है ?
मोती: (घबराकर) भारत माता की जय !
(फिर से क्लास से नौ-दो ग्यारह हो जाते हैं)
चिकारा: (पीछे से आते हुए, फुसफुसाकर) चिंता मत करो मोती जी, मैं हूं न !
(एक बार फिर संकटमोचक बनकर मैदान संभाल लेते हैं)
- अजय आशु
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