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नील डीग्रास टायसन के वीडियो के विज्ञान से जुड़े सवाल-जवाब का हिन्दी अनुवाद

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
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नील डीग्रास टायसन के वीडियो के विज्ञान से जुड़े सवाल-जवाब का हिन्दी अनुवाद
नील डीग्रास टायसन के वीडियो के विज्ञान से जुड़े सवाल-जवाब का हिन्दी अनुवाद

नील डीग्रास टायसन का एक वीडियो देखा, कुछ प्रश्नों के मनोरंजक जवाब दिए थे, उन्हें हिंदी में अनुवाद कर प्रस्तुत कर रहा हूं.

जीवन के मूल तत्त्व, हाइड्रोजन, हमारे शरीर में है, जिसका जन्म बिग बैंग में हुआ था. और हमारे पास कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, सिलिकॉन, लोहा है, ये तत्व बिग बैंग से नहीं, बल्कि तारों से आए हैं. यह सिर्फ़ उपमा या साहित्यिक रूप से ही नहीं, बल्कि यह सच है कि ‘हम तारों की धूल हैं.’

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सवाल : क्या कोई धूमकेतु पृथ्वी को नष्ट कर देगा ? ‘क्या कोई धूमकेतु या क्षुद्रग्रह पृथ्वी को नष्ट कर सकता है ?’

यह सच है कि एक धूमकेतु और क्षुद्रग्रह पृथ्वी से टकराकर जीवन को नष्ट कर देंगे, लेकिन पृथ्वी को ज्यादा कुछ नहीं होगा. इसलिए जब लोग, खासकर ‘ग्रीन रेवॉल्यूशन’ के लोग, कहते हैं, ‘हमें पृथ्वी को बचाना है, पृथ्वी ग्रह को बचाना है,’ तो आपको अंदाज़ा नहीं होता कि पृथ्वी इतनी नाजुक नहीं है. पृथ्वी मंगल ग्रह के आकार के एक आदिम ग्रह से टकरा चुकी है, जिससे चंद्रमा बना है, और पृथ्वी अभी भी बची हुई है.

अगर आपका असल प्रश्न यह है कि क्या धूमकेतु पृथ्वी पर जीवन को नष्ट कर सकता है ? तो इसका जवाब है – हां, पहले भी ऐसा हो चुका है, यह भविष्य में भी होगा. जब तक हम धूमकेतु या क्षुद्रग्रहों का रास्ता बदलने का कोई तरीका नहीं खोज लेते, यह हो सकता है. मैं आकाशगंगा में हंसी का पात्र नहीं बनना चाहता कि मैं ऐसी प्रजाति से हूं जो धूमकेतु की टक्कर से विलुप्त हो गई जबकि हमारे पास अंतरिक्ष कार्यक्रम भी था, यह शर्मनाक होगा !

सवाल : क्या एलियंस होते हैं ?

पता नहीं. हम उन्हें ढूंढ रहे हैं.

मुझे पूरा यकीन है कि वे अभी तक पृथ्वी पर नहीं आए हैं क्योंकि अगर आते भी, तो यह अजीब होगा कि वे केवल अमेरिकी सरकारी स्थानों , कार्यालयों पर ही आते हैं. हो सकता है कि वे मौजूद हों और वे पृथ्वी पर आये हो, लेकिन उनकी सारे तस्वीरें धुंधली क्यों होती है ? वे केवल अमेरिकी सरकार के प्रतिबंधित नौसैनिक हवाई क्षेत्र को ही निशाना क्यों बनाते हैं ?

सवाल : साबित करें कि पृथ्वी चपटी नहीं है.

साबित करें ? हम्म…

ठीक है. क्या आपके आस पास ऊंची इमारतें हैं ? अगर हैं, तो लोगों को सबसे ग्राउंड फ्लोर से लेकर सबसे ऊपरी मंजिल तक एक एक व्यक्ति को खिड़की पर बिठाएं और एक को छत पर. और उन सभी व्यक्तियों को बस इतना करना है कि सूर्यास्त के समय, जब पश्चिमी क्षितिज का स्पष्ट दृश्य दिखाई दे, तो वे सभी खिड़की से बाहर देखें.

जब वे क्षितिज के नीचे सूर्यास्त देखें, तो उन्हें अपना हाथ उठाने को कहें, या ज़ोर से चिल्लाने को कहें, और आप देखेंगे कि एक-एक करके, क्रम से, हर व्यक्ति ग्राउंड फ्लोर से छत तक अपना हाथ ऊपर उठाएगा. सबसे पहले ग्राउंड फ्लोर वाले को सूर्यास्त दिखेगा, उसके बाद प्रथम फ्लोर और सबसे आखिर में छत वाले को. इससे आपको पता चलता है कि सूर्य एक घुमावदार सतह के पीछे लुप्त हो रहा है. और अगर पृथ्वी चपटी होती, तो जब सूर्य उस किनारे के नीचे डूबता, तो सभी एक साथ अपना हाथ उठाते. आप नासा की तस्वीरें भी देख सकते हैं !

सवाल : ब्रह्मांड में ऐसा क्या है जो आपको भावुक कर देता है ?

सब कुछ. लेकिन खास तौर पर यह तथ्य कि जीवन के मूल तत्व, हाइड्रोजन, हमारे शरीर में है, जिसका जन्म बिग बैंग में हुआ था. और फिर हमारे पास कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, सिलिकॉन, लोहा है.

वे तत्व बिग बैंग से नहीं आए थे, वे तारों से आए थे, जो थर्मोन्यूक्लियर फ़्यूज़न से उनके केंद्र में बने थे. और वे तारे संयोग से ऐसे विशाल तारे थे जो विस्फोटित भी हुए, उन तत्वों को आकाशगंगा में बिखेर दिया, जिससे तारों की अगली पीढ़ियों में ऐसे ग्रह बने, जिनमें से कुछ ग्रहों में जीवन के लिए आवश्यक तत्व मौजूद हैं.

जीव विज्ञान क्या है ? अत्यधिक जटिल रसायन विज्ञान ! और भौतिकी के बिना रसायन विज्ञान की कोई समझ नहीं है. यह सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. और ये तत्व जिनसे हम बने हैं, वो इन तारों में बने हैं.

यह केवल साहित्यिक रूप से ही सच नहीं है, यह सार्वभौमिक सच है कि हम तारों की धूल हैं. हम ब्रह्मांड में जीवित हैं, और ब्रह्मांड हमारे भीतर जीवित है. यह 20वीं सदी के खगोल भौतिकी की ओर से आधुनिक सभ्यता को एक ऐसा उपहार है जो आध्यात्मिकता की सीमा पर है. यह मुझे भावुक कर देता है.

सवाल : एक गिलास पानी में कितने अणु होते हैं ?

ओह.

एक गिलास पानी में अरबों अणु होते हैं. मैं आपको बस इतना बताऊंगा कि एक गिलास पानी में जितने अणु होते हैं उनकी संख्या दुनिया के सभी महासागरों में जितने भी गिलास पानी हैं, उससे भी ज़्यादा हैं. ज़रा सोचिए.

जब आप एक गिलास पानी पीते हैं और वे अणु आपके शरीर से छह तरीकों में से किसी एक तरीके से बाहर निकलते हैं, तो वे पानी के अणु वापस पर्यावरण में चले जाते हैं.

आपके शरीर से निकले पानी के इतने अणु होते हैं कि वे दुनिया के हर दूसरे गिलास में बिखर जाते हैं. लम्बे समय में वे सारे विश्व में बिखर कर वैश्विक रूप में पूरी तरह से मिल जाते हैं. इसका मतलब है कि आप जो भी पानी पीते हैं, उसमें ऐसे अणु होते हैं जो राजा हेनरी अष्टम, विंस्टन चर्चिल, या आपके पसंदीदा ऐतिहासिक चरित्र के गुर्दे से होकर गुज़रे हैं.

तो आप पृथ्वी पर सभी जीवन की एकता के बारे में बात करना चाहते हैं ? आपके शरीर से गुज़रने वाले पानी के अणु इस तथ्य को दर्शाते हैं.

सवाल : प्लूटो को ग्रह से पदावनत क्यों किया गया ?

ये तो होना ही था. मतलब, चलो, ज़्यादातर लोग जो प्लूटो प्रेमी हैं, उन्हें ये तथ्य नहीं पता. तैयार हैं ? ठीक है.

प्लूटो के आधे से ज़्यादा आयतन में बर्फ़ है. अगर प्लूटो पृथ्वी के स्थान पर होता, तो उसकी एक पूंछ होती, क्योंकि सूर्य की गर्मी उस बर्फ़ को वाष्पित कर देती. ग्रह की पूंछ ? यह किसी ग्रह के लक्षण नहीं है. इतना ही नहीं, प्लूटो की कक्षा किसी दूसरे ग्रह की कक्षा को काटती है. कोई और ग्रह ऐसा नहीं करता.

जानते हैं ऐसा कौन करता है ? धूमकेतु. जानते हैं धूमकेतु किससे बने होते हैं ? बर्फ़ से. ज़रूरी नहीं कि प्लूटो अपनी कक्षा में सबसे बड़ा हो. आकार में प्लूटो को टक्कर देने वाले और भी पिंड हैं. इसका अपना कक्षीय स्थान नहीं है. दरअसल, हमने निष्कर्ष निकाला कि प्लूटो ब्रह्मांड में खोजी गई नई श्रेणी के पिंडों के एक बड़े हिस्से में से एक है, जिसे कुइपर बेल्ट कहा जाता है, बर्फीले पिंडों का, धूमकेतुओं का कुइपर बेल्ट. तो, हां, प्लूटो वहां ज़्यादा खुश है, क्योंकि यह धूमकेतुओं का राजा है, न कि सबसे छोटा ग्रह.

सवाल : क्या बुद्धिमान जीवन एक संयोग है ? क्या बुद्धिमान जीवन एक विकासवादी संयोग है या एक अनिवार्यता ?

ओह. खैर. अगर हम पृथ्वी पर अकेले बुद्धिमान जीवन हैं और पृथ्वी 4.8 अरब वर्षों से अस्तित्व में है, तो जीवन में बुद्धिमत्ता कितनी आवश्यक हो सकती है ? अगर यह आवश्यक होती, तो आप मानते कि यह जीवन के वृक्ष में कई बार दिखाई देनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है.

तो, यह स्पष्ट नहीं है कि यह कितनी आवश्यक है. अगर एलियंस बुद्धिमान जीवन की तलाश में आए और वे पांच लाख साल पहले आए, जो पृथ्वी के इतिहास की तुलना में बहुत कम है,और उन्हें कोई बुद्धिमान जीवन नहीं मिला होगा. तो, यह स्पष्ट नहीं है कि बुद्धिमत्ता कितना आवश्यक है.

ऐसे में एलियंस पृथ्वी पर आएं और वे अपने ग्रह पर जाकर रिपोर्ट कर सकते हैं कि पृथ्वी पर बुद्धिमान जीवन का कोई संकेत नहीं है.

सवाल : ब्रह्मांड का अंत कब होगा ?

ब्रह्मांड का अंत आग में नहीं, बल्कि बर्फीले रूप में होगा. और धमाके के साथ नहीं, बल्कि फुसफुसाहट के साथ. हम एकतरफ़ा ब्रह्माण्ड के विस्तार की यात्रा पर हैं, जो कभी नहीं रुकेगी, कभी धीमी नहीं होगी. और डार्क एनर्जी के कारण 10 से 22 अरब वर्षों में, ब्रह्मांड का विस्तार इतनी तेज़ी से बढ़ जाएगा कि यह अंतरिक्ष और समय के ताने-बाने को ही चीर देगा, और हम इसे बिग रिप कहते हैं.

मैं यह जानना भी नहीं चाहता कि यह कैसा दिखेगा !

सवाल : मरने पर क्या होता है ?

मैं इसका उत्तर दे सकता हूं, अगर आप धार्मिक हैं, तो आप स्वर्ग जाएंगे हैं और अपने सभी रिश्तेदारों के साथ मौज करेंगे ! मैं एक भौतिक विज्ञानी के रूप में इसका उत्तर दे सकता हूं. हम गर्म रक्त वाले जीव हैं, मतलब मेरी त्वचा का तापमान लगभग सौ डिग्री फ़ारेनहाइट है और जिस कमरे में मैं हूं उसका तापमान 70 डिग्री फ़ारेनहाइट है, ठीक है ?

तो सेल्सियस में, शरीर का तापमान लगभग 37 डिग्री होता है, लेकिन आपके लिए कमरे का तापमान लगभग 20, 23 डिग्री होता है. तो आप अपने जीवन के हर पल तापमान के इस अंतर को बनाए रखते हैं. अगर आप मर जाते है, तो आपका शरीर हवा के तापमान तक ठंडा हो जाएगा. इसीलिए, अगर आपने कभी किसी ताबूत में रखी लाश को छुआ हो, तो सबसे पहले आपको यही लगेगा कि यह ठंडी लगती है.

नहीं, यह असल में हवा का तापमान है. यह मृत शरीर की ठंडक उस उष्णता की तुलना में है जब आप आमतौर पर किसी इंसान के शरीर को छूने पर पाते हैं.

ठीक है, शरीर का तापमान क्यों गिरता है ? क्योंकि मृत शरीर अब ऊर्जा का चयापचय नहीं कर रहे होते हैं. पोषण के अलावा, हम भोजन इसलिए करते हैं ताकि शरीर के तापमान में इस अंतर को बनाए रखने के लिए ऊर्जा मिल सके.

इसके अलावा, हमारे मस्तिष्क में न्यूरोसिनेप्टिक गतिविधियां होती हैं, ये चेतना के लक्षण हैं. मान लीजिए कि कोई व्यक्ति छोटे-छोटे ब्रेन स्ट्रोक (मस्तिष्क आघात) की एक श्रृंखला से मर जाता हैं. यदि आप उस व्यक्ति को जानते हैं जिसके साथ ऐसा हो रहा है, और तब पायेंगे कि धीरे-धीरे, उनका व्यक्तित्व खत्म हो जाता है, वे आपको पहचानने की क्षमता खो देते हैं, उन्हें बोलना नहीं आता, उन्हें पता नहीं होता कि वे कहां हैं, उनकी चेतना फीकी पड़ जाती है, और आप इसके साक्षी होते हैं.

अगर आप उनके मस्तिष्क का स्कैन करें, तो आप देखेंगे कि मस्तिष्क के कुछ हिस्से बंद हो रहे हैं, वे ऑक्सीजन की कमी से सक्रिय नहीं हो रहे हैं. ब्रेन स्ट्रोक का यही असर होता है. फिर व्यक्ति मर जाता है और चयापचय रुक जाता है.

आप उन्हें धरती में दफना देते हैं. अणुओं में अभी भी ऊर्जा होती है, और उन अणुओं को धरती में मौजूद सूक्ष्मजीव खा जाते हैं और वे पारिस्थितिकी तंत्र में वापस आ जाते हैं, आप जीवन चक्र में वापस आ जाते हैं.

मैं इसी कारण से दफन होना चाहता हूं. मैंने अपना पूरा जीवन वनस्पतियों और जीवों का भोजन करते हुए बिताया है. अब समय आ गया है कि मैं मृत्यु में उन्हें कुछ वापस दूं. इसलिए जब हम मरते हैं, तो मुझे यह सोचने का कोई कारण नहीं दिखाई देता है कि मृत्यु के समय आपकी मनःस्थिति आपके जन्म से पहले की मनःस्थिति से अलग होती है.

जन्म से पहले, क्या आप सोच रहे थे, मैं कहां हूं. मैं कैसे हूं ? नहीं ! यह अस्तित्वहीनता की स्थिति है. मरने के बाद भी, अस्तित्वहीनता की स्थिति. तो, विज्ञान मृत्यु के बारे में यही कहता है. लेकिन मृत्यु बहुत से लोगों के लिए बहुत डरावनी होती है. हम मृत्यु से इसलिए डरते हैं क्योंकि हम सिर्फ़ जीवन को जानते हुए जीवित हैं.

सवाल : क्या टेलीपोर्टेशन संभव है ?

आपको क्या करना होगा, आपको डी-मॉलिक्युलर होना होगा, ऊर्जा की एक किरण में बदलना होगा और वे ऊर्जा को किसी अन्य स्थान पर भेजेंगे, और आपके बारे में सारी जानकारी अपने पास रखेंगे, क्योंकि पदार्थ को ऊर्जा में बदलने पर आप वह जानकारी खो देंगे.

लेकिन आपको उस जानकारी को किसी तरह बनाए रखना होगा और फिर अपने परमाणुओं को गंतव्य पर फिर से जोड़ना होगा. मैं उस भविष्य का इंतज़ार कर रहा हूं, जहां हम वर्महोल का आविष्कार करेंगे. फिर आप बस गंतव्य तक पहुंच जाएंगे. न तो तोड़ना होगा, न ही अपने परमाणुओं को फिर से जोड़ना और न ही अपने सभी न्यूरोसिनेप्स की जानकारी को वापस रखना जो आपको आपके दिमाग में आप बनाती है.

आप बस वर्महोल से गुज़रेंगे और पहुंच जाएंगे. तो टेलीपोर्टेशन, हां, मुझे नहीं लगता कि यह कभी होगा, क्योंकि इससे सूचना स्थानांतरण की समस्या पैदा होती है. या फिर जहां आप जा रहे हैं वहां पहुंचने के लिए बस वार्प ड्राइव का तरिका है, बस अंतरिक्ष को वार्प (मोड़ें) करें.

क्या आप जानते हैं कि वार्प ड्राइव कैसे काम करते हैं ? मैं यहां हूं और मैं आकाशगंगा के दूसरे छोर पर जाना चाहता हूं, और इसमें बहुत समय लगता है, इसलिए आप अंतरिक्ष को मोड़ते हैं और फिर उस छोटी दूरी को पार करते हैं और फिर उसे मोड़ते हैं. इसी तरह आप छोटे से समय में ही दौरान ही आकाशगंगा को पार कर सकते हैं.

सवाल : क्या मंगल ग्रह पर जीवन है ?

‘क्या मंगल ग्रह पर जीवन है ?’ हम खोज रहे हैं. यह सतह पर नहीं होगा. मंगल पर सतह तक सूर्य से शक्तिशाली पराबैंगनी विकिरण आता है. जबकि पृथ्वी पर ओज़ोन परत उसे रोक देती है. मंगल ग्रह पर ऐसी कोई सुरक्षा नहीं है. पराबैंगनी विकिरण जीवों के लिए खतरनाक है. अगर मंगल ग्रह पर जीवन है, तो शायद वह सतह के नीचे के पानी में हो सकता है.

सवाल : पृथ्वी कैसे घूमती है ?

सब कुछ घूमता है, सब कुछ. कण, ग्रह, तारे, आकाशगंगाएं, सब कुछ. जब वे बनते हैं, तो वे ब्रह्मांड में बड़े गैस बादलों से बनते हैं. अगर गैस बादल में थोड़ी भी गति होती है, चाहे वह कितनी भी छोटी क्यों न हो, जैसे-जैसे वह सिकुड़ता है, वह गति बढ़ती जाती है. इसे कोणीय संवेग संरक्षण कहते हैं. हम सब यह जानते हैं, हम सबने इसे देखा है.

हमने इसे आइस स्केटर्स के साथ देखा है, जहां वे घूमते हैं और उनकी बाहें फैली हुई होती हैं, और जैसे ही वे अपनी बाहें अंदर लाते हैं, क्या होता है ? वे तेज़ी से घूमते हैं, और तेज़ी से, और तेज़ी से. और वे अपनी बाहें उठाकर अपने सिर के ऊपर रख सकते हैं ताकि उनकी बाहें उनके घूर्णन अक्ष के और भी करीब आ जाएं और वे बहुत तेज़ी से घूमते हैं.

अगर आप इसे उलटना चाहते हैं, तो बस अपनी बाहें वापस फैलाएं, उनकी घूमने की गति कम होगी. इसलिए जब आप किसी आइस स्केटर को ऐसा करते देखें, तो बस इसे ध्यान में रखें. हर चीज़ घूमती है.

और जब वह घूमती है, तो उसे रोकने के लिए कुछ न कुछ तो चाहिए ही होता है, अन्यथा मूल रूप से वह हमेशा घूमती रहेगी. या जब आप किसी लट्टू या किसी भी चीज़ को घुमाते हैं, तो उसके और सतह के बीच घर्षण होता है, इसलिए वह अंततः धीमी हो जाती है. अंतरिक्ष में ऐसा कुछ नहीं है !

सवाल : विज्ञान का GOAT कौन है ? विज्ञान का सर्वश्रेष्ठ कौन है ?

सर्वकालिक महानतम, आइज़ैक न्यूटन.

ओह !

वह है, आइज़ैक न्यूटन. वेस्टमिंस्टर एब्बे में दफ़न. उसने प्रकाशिकी के नियम, गुरुत्वाकर्षण के नियम खोजे, अकेले ही समाकलन और अवकलन कलन का आविष्कार किया, वह भी एक चुनौती पर.
क्योंकि किसी ने कहा था, ‘ग्रह पूर्ण वृत्तों के बजाय दीर्घवृत्त में क्यों परिक्रमा करते हैं ?’

‘मुझे नहीं पता. मैं इस विषय पर आपसे बाद में चर्चा करूंगा.’

और फिर न्यूटन को जब कारण पता चलता है और उसका दोस्त पूछता है, ‘अच्छा, तुमने यह कैसे पता लगाया ?’

‘अच्छा, इसका उत्तर देने के लिए मुझे कलन (कैलकुलस) का आविष्कार करना पड़ा.’

खैर, उसने यह सब 26 साल की उम्र तक कर लिया था. और न्यूटन के जीवन के सारे उपलब्ध सभी प्रमाणों की रोशनी में, अगर आप सोच रहे हैं कि क्या आप स्वयं कभी यह कर पाएंगे ? तो आपकी जानकारी के लिए न्यूटन आजीवन कुंवारा रहा था और अकेला ही मृत्यु को प्राप्त हुआ था. कुछ चीज़ों की भारी कीमत चुकानी पड़ती है. लेकिन आइज़ैक न्यूटन सबसे महान थे, इसमें कोई शक नहीं.

सवाल : क्या समय यात्रा संभव है ?

हम समय यात्री है, हम पहले से ही एक-एक सेकंड करके भविष्य की ओर समय यात्रा कर रहे हैं. समस्या यह है कि हम अपने वर्तमान के कैदी हैं, और हमेशा अपने दुर्गम अतीत और अपने अज्ञात भविष्य के बीच संक्रमण करते रहते हैं. इसलिए आपकी उम्र हमेशा एक सेकंड प्रति सेकंड की दर से बढ़ेगी.

सवाल यह है कि आपके आस-पास के स्थानों की तुलना में आपकी उम्र बढ़ने की दर क्या है ? क्योंकि हर कोई एक ही समयरेखा का अनुभव नहीं करता, हर कोई समय की प्रगति की समान दर का अनुभव नहीं करता.

यदि आप एक प्रबल गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में हैं, तो आपके लिए समय धीमी गति से चलता है. यदि आप तेज़ी से यात्रा करते हैं, तो आपके लिए समय धीमी गति से चलता है, दूसरों की तुलना में जो आपको देख रहे हैं. तो हमारे पास समय यात्रा के लिए बस इतना ही है कि समय प्रवाह की गति निरीक्षक के सापेक्ष है.

हालांकि, यदि आप एक वर्महोल बना सकते हैं, तो वर्महोल के माध्यम से समय यात्रा करने का एक तरीका है, लेकिन अभी तक हमारे पास वर्महोल बनाने का कोई उपाय नहीं हैं.

स्टीफन हॉकिंग ने सुझाव दिया था, ‘अगर आप समय में पीछे जाकर अपनी टाइमलाइन पर जाएं, तो आप गलती से अपनी टाइमलाइन को बिगाड़ सकते हैं, अपने माता-पिता को मिलने से रोक सकते हैं, और फिर आप कभी पैदा ही नहीं होंगे, इसलिए आप वापस जाकर अपनी टाइमलाइन को बिगाड़ने के लिए मौजूद ही नहीं रहेंगे.’

तो यह एक विरोधाभास है. इसलिए स्टीवन हॉकिंग ने कहा कि हमारे पास ये विरोधाभास नहीं हो सकते. तो शायद एक दिन हम कुछ ऐसा खोज लेंगे जिसे उन्होंने समय यात्रा अनुमान कहा था, जो हमें समय में यात्रा करने से रोकता है, बस उसी परिणाम से बचने के लिए.

तो, वैसे, यह विज्ञान कथा लेखकों का एक पसंदीदा विषय है और उनमें से शायद सबसे बेहतरीन विषय है.

मैं कहूंगा, फिल्मों के संदर्भ में, निश्चित रूप से ‘बैक टू द फ्यूचर’ एक अच्छा उदाहरण है. अगर आपने इसे नहीं देखा है, तो ज़रूर देखें.

सवाल : क्या यूएफओ असली हैं ?

अगर आप आसमान में कुछ देखते हैं और आपको नहीं पता कि यह क्या है, वह एक असली यूएफओ है, क्योंकि U का मतलब अज्ञात, यू-एफ-ओ है.

मुझे एक उड़ती हुई वस्तु दिखाई देती है, मुझे नहीं पता कि यह क्या है, तो वह UFO है.

तो यह सवाल, क्या वे असली हैं, लगभग बेमानी है. UFO असली है. बस आपको नहीं पता कि आप क्या देख रहे हैं. यह एक यूएफओ है, ठीक है ?

आप जानना चाहते हैं कि क्या यूएफओ एलियन हैं, यह अलग बात है, और मुझे अब तक कोई ठोस सबूत नहीं दिखता कि यूएफओ द्वारा हम पर कभी कोई हमला हुआ हो.

और इतने सारे यूएफओ क्यों दिखाई देते हैं ? क्योंकि ज़्यादातर लोगों को नहीं पता कि उनके सिर के ऊपर क्या चल रहा है. अगर आप शौकिया खगोलविदों के समुदाय में जाएं, जो हर रात अपनी दूरबीन लेकर बाहर जाते हैं, तो उनसे पूछें कि उन्होंने कितने यूएफओ देखे हैं. संभावना है कि आपने जो यूएफओ देखा है, वह उनके लिए एक आईएफओ, यानी पहचानी गई उड़ने वाली वस्तु हो.

मैं यूएफओ से उतरते हुए एलियंस की हाई रेज़ोल्यूशन वाली तस्वीर का इंतज़ार कर रहा हूं. तब हम इस विषय पर बात कर सकते हैं. तब तक, मुझे अंधेरे में या दिन के किसी भी समय आकाश में रोशनी की धुंधली तस्वीरें मत दिखाओ … मुझे इससे बेहतर सबूत चाहिए.
माफ़ करना, आप तलाश जारी रखो.

सवाल : क्या ज़्यादा ज़रूरी है, अंतरिक्ष की खोज या पृथ्वी की मरम्मत ?

चलो गुफाओं में वापस चलते हैं. 20,000 साल पहले, हम सब गुफा में थे, और गुफा में रहने वाले लड़के सामने के दरवाज़े से झांकते हैं, और बाहर देखते हैं और उन्हें पहाड़, घाटियां, पहाड़ियां, फल लगे पेड़ और आकाश दिखाई देता है, और वे गुफा के बाहर जाकर देखना चाहते हैं, लेकिन उनके पास अनुमति नहीं है.

तो वे गुफा में वापस जाते हैं और गुफा के बुजुर्गों से बात करते हैं. उस समय, गुफा के बुजुर्ग 30 साल के रहे होंगे. उस दिन वहां मौजूद आधे लोग 30 साल की उम्र से पहले ही मर जाते थे. इसलिए वे गुफा के बुजुर्गों के पास जाते हैं और कहते हैं, ‘हम बाहर जाकर खोज करना चाहते हैं.’

और गुफा के बुजुर्ग, वे दूसरे गुफा के बुजुर्गों से मिलते हैं और वापस आकर निष्कर्ष निकालते हैं, ‘नहीं, आप गुफा से बाहर नहीं जा सकते क्योंकि हमारे पास गुफा की कुछ समस्याएं हैं जिन्हें आपको पहले हल करना होगा. उसके बाद ही आप गुफा के दरवाज़े से बाहर जा सकते हैं.’

आपकी बात तो यही है. हल यह है कि आप दोनों काम करते हैं. आप सिर्फ़ एक या दूसरा काम नहीं करते. आप पृथ्वी को ठीक कर सकते हैं और खोज भी कर सकते हैं. ऐसे समाधान हो सकते हैं जो पृथ्वी पर समस्याओं को हल करने में मदद कर सकते हैं.

आप यह न सोचें कि पृथ्वी इतनी बड़ी और अद्भुत है कि हमारे सभी समाधान यहीं समाहित हैं, पृथ्वी के बाहर भी पृथ्वी की समस्या के समाधान हो सकते है. लेकिन अगर आप ब्रह्मांड का अध्ययन करें… यह पृथ्वी है और यह ब्रह्मांड है, और आप कह रहे हैं, ‘इसका अध्ययन मत करो, सिर्फ़ इसका अध्ययन करो, फिर हम सभी समस्याओं का समाधान कर देंगे.’ आप सच कहिये, क्या यह उचित है ?

सवाल : क्या आपको कुछ भी डराता है ?

हां. मुझे डर है कि हमारी प्रजाति, जैसी कि इस दुनिया में वर्तमान में दिखाई देती है, उसमे अपनी प्रकृति की रक्षा के लिए आवश्यक बुद्धि की कमी है, जोकि हमें यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि दुनिया अभी भी हमारे वंशजों के लिए बची रहे. बुद्धिमत्ता की यह कमी मुझे डराती है.

सवाल : क्या अधिकांश मनुष्य ब्रह्मांड के मूल सिद्धांतों को समझने में असमर्थ हैं ?

‘क्या आपको लगता है कि अधिकांश मनुष्य ब्रह्मांड के मूल सिद्धांतों को समझने में असमर्थ हैं ?’ मैं एक अलग प्रश्न पूछने वाला हूं. क्या मानव मन इतना बुद्धिमान है कि ब्रह्मांड को पूरी तरह से समझ सके ?

हो सकता है कि जो लोग इसे सबसे अच्छी तरह समझते हैं, वे इस बड़े सत्य का एक छोटा सा अंश समझते हों और मानव मस्तिष्क इतना मूर्ख हो कि उसे कभी समझ ही न सके. मैं इस बात पर रातों की नींद हराम कर देता हूं, सोचता हूं कि क्या हम कभी यह सब समझ पाएंगे, या हम बस किसी पहाड़ की तलहटी में हाथ मार रहे हैं, और जो हमारे सामने है उसकी महिमा को नहीं देख पा रहे हैं ?
मैं आइज़ैक न्यूटन को उद्धृत करता हूं.

‘कभी-कभी मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं किनारे पर बैठा एक बच्चा हूं, जो एक से ज़्यादा चमकदार कंकड़ उठा रहा हूं, फिर भी मेरे सामने अनदेखे सत्य का विशाल सागर है.’

सवाल : ब्रह्मांड की सबसे अजीब बात क्या है ?

कि यह जानने योग्य है. आपकी जिज्ञासा को पूरा करने में मुझे खुशी है. जब आप पृथ्वी को बर्बाद कर पृथ्वी के बाहर जाकर बच सकने के लिए अंतरिक्ष में जाने, चांद और मंगल तक जाने, अंतरिक्ष स्टेशन वगैरह बनाने की कोशिश नहीं करते है, यह मेरी सोच के विपरीत है.

मेरा विचार यह है कि अंतरिक्ष में जाकर, बुनियादी ढांचा बनाकर, अंततः अंतरिक्ष में संसाधनों का उपयोग करके, आप पृथ्वी को बचायें , क्योंकि पृथ्वी ब्रह्मांड में सबसे अच्छी जगह है क्योंकि हम इस पर विकसित हुए हैं और यह अनोखी है.

  • आलेख के सम्पादक का नाम ज्ञात नहीं है.

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by ROHIT SHARMA
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सोनू-रुपेश का जनता को छोड़कर राज्य को हथियार सौंप देना - यही विश्वासघात है

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