Tuesday, June 16, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

क्या भारत गुलामी के नये दौर में प्रवेश कर रहा है ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 17, 2026
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
क्या भारत गुलामी के नये दौर में प्रवेश कर रहा है ?
क्या भारत गुलामी के नये दौर में प्रवेश कर रहा है ?
कृष्ण कांत

जो भी देश अमेरिका के इशारे पर नाचने लगा, तबाह हो गया. दुर्भाग्य की बात है कि आज हमारी सरकार यही डरावना काम कर रही है, जो पिछले 75 सालों में कभी नहीं हुआ. अमेरिका हमें आदेश दे रहा है और हमारी सरकार सिर झुकाकर हुकुम बजा रही है.

अमेरिका का डिप्टी सेक्रेटरी क्रिस्टोफर लैंडो रायसीन डायलॉग में शामिल होने दिल्ली आया. जिस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री शामिल हुए, उसी कार्यक्रम में उसने कहा, ‘भारत को समझना चाहिए कि हम वही गलती नहीं करने जा रहे हैं, जो हमने 20 साल पहले चीन के साथ की थी. हम भारत का मार्केट इतना बड़ा नहीं होने देंगे कि भारत भविष्य में हमसे मुकाबला कर सके.’ इस अपमानजनक बात पर भारत ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

You might also like

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

14 फरवरी को म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्री एस जयशंकर के सामने अमेरिका के मार्को रुबियो ने कहा- ‘सेकंड वर्ल्ड वॉर से पहले तक पश्चिम ने बड़े-बड़े साम्राज्य बनाए… लेकिन बाद में पश्चिम सिकुड़ने लगा. हमने उपनिवेशवाद का सपना छोड़ा नहीं है और डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में हम इस सपने को पूरा करने जा रहे हैं.’

हमने साम्राज्यवाद का अपमानजनक दंश झेला है, हम उसके पीड़ित रहे हैं, हमने लाखों कुर्बानियां देकर उससे मुक्ति पाई, हमारे सामने कोई देश ऐसी बात कैसे कर सकता है ? लेकिन विदेश मंत्री एस. जयशंकर इसपर एक शब्द नहीं बोले.

रूस से तेल लेने के मसले पर ट्रंप के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बयान दिया – ‘कल हमारा वित्त विभाग भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने पर सहमत हुआ है. भारतीय अच्छे एक्टर हैं. हमने उनसे रूस से तेल लेना बंद करने को कहा था, उन्होंने ऐसा ही किया. अब हमने उन्हें रूस से तेल खरीदने की ‘इजाजत’ दे दी है.’ ‘अच्छे एक्टर’, ‘इजाजत’ जैसे अपमानजनक शब्दों पर भारत ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

बाकी वह तथ्य तो देश के सामने है ही कि आपरेशन सिंदूर रोकने का ऐलान भारत के प्रधानमंत्री ने नहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति ने किया था. भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा, इसका ऐलान अमेरिका के राष्ट्रपति ने किया. भारत अब वेनेजुएला और अमेरिका से तेल खरीदेगा, इसका ऐलान ट्रंप ने किया. ईरान और अमेरिका युद्ध के बाद अमेरिका कह रहा है कि हमने भारत को एक महीने के लिए रूस से तेल खरीदने के इजाजत दे दी है, भारत कुछ नहीं बोला. सवाल उठता है कि भारत लगातार इतने अपमान क्यों झेल रहा है ?

नरेंद्र मोदी की ऐसी कौन सी नस ट्रंप ने दबा रखी है कि वे अमेरिका के सामने रेंगते दिख रहे हैं ? धमकी तो नेहरू को भी मिली थी, धमकी तो शास्त्री जी को भी मिली थी, धमकी तो इंदिरा जी को भी मिली थी, यहां तक कि पाकिस्तान के समर्थन में उन्होंने अपनी सेना रवाना कर दी थी… लेकिन नेहरू जी से लेकर मनमोहन सिंह तक कोई प्रधानमंत्री झुका नहीं.

अमेरिका का इतिहास है कि जो देश उसके आगे झुके, उन्हें उसने बर्बाद कर दिया. अमेरिका को दुनिया भर के व्यापार और संसाधनों पर कब्जा चाहिए. भारत उसके आगे झुका तो आगे क्या होगा, इसकी कल्पना बहुत भयानक है. जापान और कोरिया से लेकर वियतनाम, इराक, अफगानिस्तान, फिलिस्तीन, सीरिया, चिली, ब्राजील, उरुग्वे, पैरागुआ, अर्जेंटीना और ईरान के साथ अमेरिका ने क्या किया, यह सब दुनिया ने देखा है.

क्या कारण है कि आज अमेरिका भारत को आदेश दे रहा है और भारत अपने हितों से समझौता करके उसके आदेश को मान रहा है ? ऐसा क्या हुआ कि हमने अपने किसानों के हितों की कीमत पर, अपने आर्थिक हितों की कीमत पर एक आर्थिक तबाही लाने वाली डील कर ली ? अमेरिका कौन होता है हमारी विदेश और आर्थिक नीति तय करने वाला ? वह ऐसे क्यों व्यवहार कर रहा है जैसे हम उसके उपनिवेश हों ? सरकार अगर ऐसा होने देती है तो हर भारतीय के मन में यह सवाल उठेगा कि क्या भारत गुलामी के नये दौर में प्रवेश कर रहा है ?

मोदी ऐसा क्यों कर रहे हैं ? वे भारत की संप्रभुता की कीमत पर अमेरिका का अपमानजनक व्यवहार बर्दाश्त क्यों कर रहे हैं ? रोज रैली में डींगें हांकने वाले प्रधानमंत्री देश के सम्मान, देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता के साथ समझौता क्यों कर रहे हैं ? अगर वे इसके विरोध में तनकर खड़े नहीं होते तो हमें यही कहना चाहिए कि नरेंद्र मोदी एक कमजोर, नकारा, डरपोक और कायर प्रधानमंत्री साबित हुए हैं जो भारतीय संप्रभुता की रक्षा करने में नाकाम हैं. कहीं ऐसा न हो कि उनकी इस कमजोरी की कीमत आने वाली पीढ़ियों को चुकानी पड़े !

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लॉग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लॉग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
G-pay
Previous Post

कथाकार व उपन्यासकार कैलाश वनवासी का समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप

Next Post

जो यहूदी कौम ख़ुद दशकों तक सताई गई, वह इतनी कठोर और हिंसक कैसे हो गई ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

by ROHIT SHARMA
June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

by ROHIT SHARMA
June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

by ROHIT SHARMA
June 10, 2026
Next Post

जो यहूदी कौम ख़ुद दशकों तक सताई गई, वह इतनी कठोर और हिंसक कैसे हो गई ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

क्रांतिकारी नेताओं का तब और अब का आत्मसमर्पण…

November 10, 2025

बलात्कारियों के साथ, भाजपा की सरकार : संबित पात्रा

October 12, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

June 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

June 16, 2026

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

June 12, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.