
ईरान के पास 3000 किलोमीटर वाली मिसाइल है
इज़रायल के पास 5000 किलोमीटर वाली मिसाइल है
अमेरिका के पास 10000 किलोमीटर वाली मिसाइल होगी –
मेरे लिए तो
तीनों ही मिसाइलों की क़ीमत
दो कौड़ी की भी नहीं है.
क्या ईरान, इज़रायल और अमेरिका के पास
एक भी ऐसी मिसाइल है
जो मैं
यहां से अफ्रीका के बच्चे को चुम्बन दूं
तो वह गुलाब की ख़ुशबू के बम तरह फूटे –
अगर नहीं
तो फिर
मेरे लिए तो
तीनों ही मिसाइलों की क़ीमत
दो कौड़ी की भी नहीं है !
—
घंटा विज्ञान
चूतिया टेक्नोलोजी
गधे वैज्ञानिक
उनके नीच प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति
कमीना यूएनओ
मेरे भले सब कुएं में पड़ो
और पानी के कुएं में नहीं
पेट्रोल के कुएं में गिरो और ऊपर से गिरे
इनके सबके ऊपर
माचिस की जलती हुई तिल्ली
—
फूल ले जाने के काम आने चाहिए थे रोकेट्स
रोटियां ले जाने के काम आनी चाहिए थी मिसाइल्स
सब्ज़ियाँ गिराने के काम आने चाहिए थे F 35 विमान
और
परमाणु बम नहीं : हमें अनाज बम चाहिए थे मूर्खो !
—
यह क्या तमाशा लगा रखा है
कि पांच सौ इसने मार दिए
कि हज़ार उसने मार दिए
कि पंद्रह सौ इसने मार दिए
कि दो हज़ार इसने मार दिए
होता कौन है ट्रम्प
होता कौन है नेतान्याहु
होता कौन है मोज़तबा खामेनेई
इन गंडमरे मर्दों ने
कौन-से दिन देखी है
हॉस्पिटल में प्रसव पीड़ा झेलती हुई स्त्री ?
इन्हें क्या पता
हज़ार हाथियों के पेट पर से गुज़र जाने का
दर्द सहना होता है
तब जाकर पैदा होता है एक बच्चा –
बच्चों को मारना आसान है हरामखोरो !
बच्चों को जन्म देने में जान निकल जाती है !
—
यह क्या परमाणु बम, परमाणु बम लगा रखा है
हिम्मत है तो एक भी धमाका कर के दिखाओ !
डर तो तुम नेताओं को इतना लगता है
कि पास में बम फटते ही अंडरग्राउंड हो जाते हो
और बातें करते हो बड़ी बड़ी
कि यहां परमाणु बम फोड़ देंगे
वहां परमाणु बम फोड़ देंगे
नालायको !
तुम लोगों में इतनी हिम्मत भी नहीं
कि अपने घर की छत पर
सितारों को देखते हुए चैन की नींद सो सको
टूटते हुये तारों को देखकर
जिन फट्टू लीडरों को
मिसाइल के हमले का शक होता है :
वे साले बहादुर बने फिर रहे हैं !
–
काश !
मेरी मां के हाथ लग जाएं
यह ट्रम्प
यह नेतान्याहु
और यह मोजतबा खामनई
और मेरी मां
इनके मोटे ढूंगों पर चंपट मार मार कर
इनका पिछवाड़ा लाल कर दे !
–
गड़बड़ यही तो हुई है
कि ट्रम्प को
कि नेतान्याहु को
और ख़ामनई को
इनके मां-बाप ने बदमाशी करने पर
बचपन में कभी सूंता नहीं !
–
काश..
हमारे गणित वाले
ओम जी गुरुजी मिल जाते ट्रम्प को
वे इसके झीट पाड़-पाड़ कर
इसकी मखमली गुद्दी लाल कर देते –
काश..
हमारे अंग्रेजी वाले
महेश जी गुरुजी मिल जाते नेतान्याहु को
वे इसकी अंगुलियों में फंसाते पेन
और ऐसे पीन्चते
कि यह मिसाइल मारना तो दूर
गुलेल से पत्थर तक नहीं मार पाता !
–
बमों की
बंदूकों की
तोपों की
मिसाइलों की
रोकेटों की इस दुनिया में आग लगे
विज्ञान का साथ छोड़ जाए
टेक्नोलोजी
विज्ञान रंड़वा हो जाए
परमाणु बमों पर
उन देशों के छोटे बच्चे सुसू कर दें
इस दुनिया की लाइट चली जाए
चारों ओर अंधेरा हो जाए
–
हाथों में लालटेन लिए
धोरों पर टट्टी करते जाते देखूं
ट्रम्प, नेतान्याहु और खामनेई जैसे कमीनों को
और वहां पर
इन सबके लोटे उलट जाएं –
–
इन विदेशी हरामज़ादों का
ख़ालिस देसी इलाज चाहिए भगवान जी !
मुझ कवि ‘मनमीत’ की दुआ में
बस इतना-सा असर दो भगवान जी !
- मनमीत सोनी
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