Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में न्यूनतम वेतन अधिनियम दलाल हाईकोर्ट की भेंट चढ़ी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 6, 2018
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

दिल्ली में न्यूनतम वेतन अधिनियम दलाल हाईकोर्ट की भेंट चढ़ी

दिल्ली हाइकोर्ट ने श्रमिकों का न्यूनतम वेतन बढ़ाने के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि ‘जल्दी प्रयास और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन के कारण दुर्भाग्यवश इस संशोधन को रोकना पड़ा’ क्योंकि इससे संविधान का उल्लंघन हो रहा था. हालांकि दिल्ली सरकार द्वारा तय की गई न्यूनतम मजदूरी भी खुद सरकार के वेतन आयोग द्वारा एक परिवार के गुजारे के लिए तय की गई आवश्यक न्यूनतम रकम के मुक़ाबले बहुत कम थी.
व्यापारियों, पेट्रोल व्यापारी और रेस्टोरेंट मालिकों ने दिल्ली सरकार के तीन मार्च, 2017 को न्यूनतम वेतन की अधिसूचना को ख़ारिज करने की मांग की थी. व्यापारियों का कहना है कि समिति ने उनका पक्ष जाने बिना ही फैसला ले लिया.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

हाईकोर्ट का यह भी कहना था कि ‘दिल्ली में न्यूनतम वेतन की दर को इसलिए नहीं बढ़ाया जा सकता क्योंकि दिल्ली में वेतन दर पड़ोसी राज्यों से ज़्यादा है.’ हाईकोर्ट के बात का एक ही अर्थ है कि पूंजीवादी समाज मेंं मालिकों की मर्जी से किया गया फैसला ही प्राकृतिक न्याय और संविधान सम्मत है क्योंकि क्या श्रमिकों की श्रम शक्ति की कीमत के अलावा किसी और वस्तु/सेवा के बाजार मूल्य में वृद्धि के पूंंजीपतियों के फैसले को इस आधार पर रद्द किया गया है कि उन वस्तुओं/सेवाओं के ख़रीदारों की सहमति मूल्य तय करते हुए नहीं ली गई थी ?

पेट्रोल के दाम बढ़ते हुए, स्कूल-अस्पताल की फ़ीज़ बढ़ते हुए, खाद्य पदार्थों से दवाइयों तक की कीमतें बढ़ाते हुए कभी फैसला आम मेहनतकश लोगों की राय लेकर होता है ? लेकिन श्रम शक्ति का न्यूनतम मूल्य निर्धारित करते हुए मालिकों की राय न लेना अप्राकृतिक और संविधान का उल्लंघन है !

फिर कितनी हास्यास्पद बात है कि पड़ोसी राज्यों में मजदूरी कम है तो दिल्ली में भी कम होनी चाहिए ? इसके बजाय पड़ोसी राज्यों को भी मजदूरी बढ़ाने के लिए क्यों न कहा जाना चाहिए ? और किसी मामले में ऐसा कुतर्क सुना गया है ?

पर सच यही है कि मालिकों और मजदूरों के बीच वर्ग विभाजित समाज में सत्ता के सब अंग – संसद से पुलिस-न्यायालय तक सब मालिकों के हितों की सुरक्षा में ही कार्य करते हैं. वही उनके लिए ‘न्याय’ की परिभाषा है. उनसे मेहनतकश जनता के लिए इंसाफ की उम्मीद ही भ्रम है.

सवाल तो यह भी पूछा जाना चाहिए कि जजों से लेकर सांसद-मंत्री और अधिकारी अपने घरों पर जिन श्रमिकों को रखते हैं क्या उन्हें न्यूनतम मजदूरी देते हैं ? क्या वे बाल श्रमिकों का शोषण करते हैं ?

एक खबर यह भी कि फैसला सुनाने के बाद जज महोदया पदोन्नत होकर मुख्य न्यायाधीश बन गईं हैं!

– मुकेश असीम

Read Also –

 

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

[ प्रतिभा एक डायरी ब्लॉग वेबसाईट है, जो अन्तराष्ट्रीय और स्थानीय दोनों ही स्तरों पर घट रही विभिन्न राजनैतिक घटनाओं पर अपना स्टैंड लेती है. प्रतिभा एक डायरी यह मानती है कि किसी भी घटित राजनैतिक घटनाओं का स्वरूप अन्तराष्ट्रीय होता है, और उसे समझने के लिए अन्तराष्ट्रीय स्तर पर देखना जरूरी है. प्रतिभा एक डायरी किसी भी रूप में निष्पक्ष साईट नहीं है. हम हमेशा ही देश की बहुतायत दुःखी, उत्पीड़ित, दलित, आदिवासियों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों के पक्ष में आवाज बुलंद करते हैं और उनकी पक्षधारिता की खुली घोषणा करते हैं. ]

Previous Post

अन्तर्राष्ट्रीय फ्रेंडशिप-डे के जन्मदाताः महान फ्रेडरिक एंगेल्स

Next Post

बालिका गृह के बलात्कारियों को कभी सजा मिलेगी ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

बालिका गृह के बलात्कारियों को कभी सजा मिलेगी ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

डॉ नरेंद्र दाभोलकर – एक अविस्मरणीय व्यक्तित्व

December 9, 2021

बैंकों का निजीकरण एक अमानवीय अपराध

December 9, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.