Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

भाड़े का टट्टू उर्जित पटेल का भी इस्तीफा : गंभीर संकट की चेतावनी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 11, 2018
in ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

भाड़े का टट्टू उर्जित पटेल का भी इस्तीफा : गंभीर संकट की चेतावनी

कुछ तो खतरनाक होने वाला है अर्थव्यवस्था में, नोटबन्दी और जीएसटी से भी ज्यादा खतरनाक. उर्जित इसीलिए भागा है, और इस डर से चुप है कि कहीं उसका भी “मॉर्निंग वॉक“ न करा दिया जाए. उसने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में धन्ना सेठों की लूट की व्यवस्था के प्रबंधन की पढ़ाई ज़रूर की थी, पर ऐसे छटे हुए बदमाशों के नीचे काम करने का कोई कोर्स तो वहां भी न होता शायद.

मोदी सरकार की जनविरोधी और अर्थव्यवस्था के लिए आत्मघाती कदमों से ऊब कर भाड़े का टट्टू उर्जित पटेल भी मोदी का दामन छोड़ का पलायन कर गया. पिछले 15 महीनों में उर्जित पटेल का यह तीसरा बड़ा इस्तीफा है. इससे पहले नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया, मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम इस्तीफा दे चुके हैं. उर्जित पटेल जैसे भाड़े का टट्टू भी जब मोदी का साथ छोड़कर पलायन कर चुका है, तो इसका देश के लिए साफ संदेश है कि देश की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है और यह संकट आने वाले दिनों में भयावह स्वरूप लेने वाली है.

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

भारतीय रिजर्व बैंक और भारत सरकार के बीच पिछले दिनों आई तनाव की खबरों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुख्य अर्थशास्त्री मौरिस ओब्स्टफील्ड ने भी कहा था कि वित्तीय स्थिरता के लिए आरबीआई के संदेशों पर सरकार का ध्यान देना जरूरी है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष कभी नहीं चाहेगा कि सरकार अपने सियासी मकसद के लिए केंद्रीय बैंक के कामकाज में हस्तक्षेप करें. केंद्रीय बैंक के पास कहीं ज्यादा शक्तियां हैं. वह वित्तीय स्थिरता और मौद्रिक नीतियों के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है.




इसके वाबजूद मोदी सरकार द्वारा रिजर्व बैंक के कामकाज में लगातार हस्तक्षेप और उसके रिजर्व धन से 3 लाख करोड़ रूपये से अधिक की मांग को रिजर्व बैंक देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक कदम मान रही है. परन्तु मोदी सरकार अपने कॉरपोरेट घरानों की सेवा करने के लिए इस कदर केन्द्रीय बैंक पर दबाव डालना शुरू किया कि भाड़े का टट्टू उर्जित पटेल भी बदनामी के इस दाग को अपने गिरेवां पर लगाने को तैयार नहीं हुआ और भाग खड़ा हुआ. सोशल मीडिया पर कुछ लोगों के विचार इस संबंध में इस प्रकार है.




श्रवण यादव : कुछ तो खतरनाक होने वाला है अर्थव्यवस्था में, नोटबन्दी और जीएसटी से भी ज्यादा खतरनाक. उर्जित इसीलिए भागा है, और इस डर से चुप है कि कहीं उसका भी “मॉर्निंग वॉक“ न करा दिया जाए. उसने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में धन्ना सेठों की लूट की व्यवस्था के प्रबंधन की पढ़ाई ज़रूर की थी, पर ऐसे छटे हुए बदमाशों के नीचे काम करने का कोई कोर्स तो वहां भी न होता शायद.

मरता क्या न करता. चुपचाप इस्तीफा देकर खिसक लिया. अब क्या विध्वंसक योजनाएं हैं इस रंगा बिल्ला सरकार की ? क्या अर्थव्यवस्था डूबने वाली है ? या बैंक कंगाल होने वाले हैं ? या रुपया भरभराकर क्रैश होने वाला है ? या कुछ और ? ये तो समय ही बताएगा. पर फिलहाल के लिए तो किसी संबित पात्रा, गजेंद्र चौहान, राखी सावंत, रामदेव, गुरुमूर्ति जैसे किसी को आरबीआई गवर्नर का पद सौंपा जाएगा, जो चुपचाप सब बात माने, कोई किन्तु-परन्तु न करे. अगले गवर्नर का बस एक काम होगा, “मैं धारक को दस रुपए अदा करने का वचन देता/ देती हूं“ के नीचे हस्ताक्षर करना.




मुकेश असीम : नोटबंदी को चुपचाप हजम कर जाने वाले ऊर्जित पटेल को भी इस्तीफा देना पड़ गया, मतलब कहीं तो टू-मच हो गया. आर्थिक सलाहकार वाले मामले की तरह यही समझना होगा कि पूंजीवादी आर्थिक संकट के अंतर्विरोध इतने तीव्र हो गए हैं कि उनके समाधान के लिए मोदी सरकार जिस रास्ते जाना चाहती है, वह बुर्जुआ अकादमिक जगत में थोड़ा बहुत नाम मगर मौकापरस्त चरित्र रखने वाले ’विशेषज्ञों’ के लिए भी गिरने की हद पार करने जैसा है. इसलिए ऊर्जित पटेल ने इस ’शहादत’ के जरिये अपनी इज्जत बचाने की कोशिश की है.

जैसे मौकापरस्त आर्थिक सलाहकार की जगह भक्त अर्थवेत्ता ने ली, वैसे ही मौकापरस्त रिजर्व बैंक गवर्नर की जगह भी कोई भक्त गवर्नर ही लेने वाला है, जो नोटबंदी जैसी चीजों पर सिर्फ चुप रहने के बजाय खुलकर मोदी चालीसा पढ़ने के लिए तैयार हो. नोटबंदी के दौरान रोज प्रेस वार्ता में नए-नए नियम-कायदे बताने और हवाई दावे करने वाले मोदी सिपहसालार हसमुख अधिया या शक्तिकांत दास संभवतः सबसे बड़े उम्मीदवार हैं.




आज की ही एक और खबर ध्यान देने वाली है – कोटक महिंद्रा बैंक ने उदय कोटक की शेयरहोल्डिंग के मामले में रिजर्व बैंक के आदेश को मानने से इंकार कर उसे हाईकोर्ट में चुनौती दी है. शायद यह पहला ऐसा मामला है. आईसीआईसीआई, ऐक्सिस, यस, कोटक महिंद्रा सारे बड़े निजी बैंक ऐसे ही मामलों में उलझे हैं, सार्वजनिक बैंकों की हालत तो सबको मालूम ही है.

Read Also –





[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

भारतीय किसानों का घोषणा पत्र

Next Post

चुनाव नतीजे, भक्त गवर्नर, और वामपंथी

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

चुनाव नतीजे, भक्त गवर्नर, और वामपंथी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

महान गणितज्ञ लियोनार्ड ऑयलर

April 15, 2021

मत कहो आकाश में कुहरा घना है

June 25, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.