Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

बदहाल उत्तर भारतीय

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 28, 2018
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
[ नरेन्द्र मोदी सरकार की लगातार चल रही जनविरोधी नीतियों के कारण देश का न केवल खजाना ही खाली हो गया, जिसके परिणामस्वरूप रिजर्व बैंक में रखे रिजर्व धनराशि को मोदी सरकार ने छीन ली है, वरन् विरोध करने वाले अपने ही कठपुतली उर्जित पटेल को धकियाकर बाहर का रास्ता दिखा दिया है. वहीं देश के तमाम मेहतनकश लोगों की संचित धनराशि को भी नोटबंदी और जीएसटी जैसी जनद्रोही नीतियों के कारण लूटकर कंगाल बना डाला है. इसी विषय पर साथी रविन्द्र पटवाल का आलेख पाठकों के लिए प्रस्तुत है. ]

बदहाल उत्तर भारतीय

उत्तर भारतीय पिछले 18 सालों से बड़ी तेजी से रोजगार की तलाश में औद्योगिक प्रदेशों और महानगरों की ओर भाग रहे हैं. पहले यह प्रश्न महाराष्ट्र और कुछ हद तक पंजाब में उठते थे, लेकिन आज यह सवाल गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और यहां तक कि मध्यप्रदेश से भी उठने लगे हैं, जिसका खुद का ट्रैक रिकॉर्ड ऐसा नहीं है, जो रोजगार उत्पादन करता हो.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

योगी जी ने गाय की सुरक्षा के लिए गौशाला बनाने के लिए पिछले साल बुंदेलखंड को छोड़ हर जिले में कोष बंटवाया और इस साल सभी नगर निगमों को कुल 160 करोड़ गौशाला बनाने और रखरखाव के लिए आवंटित किया है. इंसानों का क्या है, वे तो अपने पेट के जुगाड़ और परिवार के लिए देश में कहीं भी धक्के खा सकते हैं. मार खा कर वापस आकर फिर कुछ महीने बाद जा सकते हैं.




अयोध्या में मंदिर बनेगा, उसके लिए सड़क और दीपावली में दिए और रौशनी में कुछ रोजगार मिल सके तो वही सबसे बड़ी बात है. उत्तर भारतीय समाज में एक लेवल प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी और सफलता से जुड़ा था, बाकी बड़ा हिस्सा तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के सरकारी रोजगार और घर में किसी एक के रेलवे, फ़ौज, अध्यापन या मुंबई कोलकता और दिल्ली गुड़गांव में प्राइवेट नौकरी में पा जाता था.

लेकिन हाल के दशक में स्थिति विकट हुई है. सरकारी नौकरियों के स्रोत सूख चुके हैं. खेती अब दिन-प्रतिदिन घाटे का सौदा हो चुकी है. नोटबंदी ने छोटे और मझौंले उद्योगों खासकर कालीन बुनकर और बनारसी साड़ी जैसे उद्योगों को मारने का काम किया है.




पिछले 15 वर्षों के दौरान चीनी उत्पाद के बहिष्कार के नाम पर चीनी झालर का विरोध और असलियत में बीसियों गुना चीन से आयात कर भारतीय व्यापारियों ने अपने परम्परागत उद्योग-धंधों को जिसमे कम मुनाफा और ज्यादा श्रम शक्ति लगती थी, साथ ही लाइसेंस, प्रोविडेंड फण्ड, पॉलुशन बोर्ड, उत्पाद-कर सबसे छुटकारे के रूप में चीनी माल का विकल्प चुन लिया है.




सरकारें बनती हैं, बिगड़ती हैं. देश गड्ढे में जा रहा है. लेकिन खासकर उत्तर भारत के राज्यों को इससे कभी अधिक सरोकार रहा भी नहीं. उत्तर प्रदेश और बिहार नामक दो राज्य जिनके पास 115 सांसद भेजने की कुव्वत है, वे इसी बात से अभी तक मग्न हैं कि वे देश का प्रधान और रेल मंत्री चुनते हैं. भले ही वे मुंबई में बैठे सेठ के इशारों पर चलते हों.

अब स्थिति विस्फोटक हो रही है, देखते हैं शायद यह सवाल भी उत्तर भारतीय पूछे कि गंगा जमुना के उस जग प्रसिद्द बेसिन पर जहां सदियों से सभ्यताएं जन्मी, दुनिया भर से आईं वह आज इस बदहाल स्थिति में क्यों और कैसे है ?




Read Also –

बैंकों में हड़ताल आखिर क्यों ?
फर्जी सरकार के फर्जी आंकड़े
क्या देश और समाज के इस हालत पर गुस्सा नहीं आना चाहिए ?




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

हिंदुस्तान को कांग्रेस मुक्त बनाना मोदी जी के बूते की बात नहीं है

Next Post

सही विचार आखिर कहां से आते हैं ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

सही विचार आखिर कहां से आते हैं ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

धर्मनिरपेक्ष राजनीति के पैरोकार अतीक अहमद : आरंभ से अंत तक

May 16, 2023

हेडलेस सेंट…

July 13, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.