Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

मोदी द्वारा 5 साल में सरकारी खजाने की लूट का एक ब्यौरा

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 3, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

ये आंकड़े एक RTI के जरिये इकठ्ठा किये गए हैं. जिन्हें लगता है कि ये आंकड़े गलत हैं वो इसे कोर्ट में चैलेंज कर सकता है. इस डिसक्लेयर के साथ यह खबर सोशल मीडिया पर डाली गयी है. यह रिपोर्ट मोदी द्वारा सरकारी धन का दुरूपयोग करने का सबसे बड़ा उदाहरण है, जो खुद को फकीर बताते नहीं थकता.

मोदी द्वारा 5 साल में सरकारी खजाने की लूट का एक ब्यौरा

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

यहां नरेंद्र मोदी से जुड़े पिछले 5 साल के कुछ आंकड़े दे रहा हूंं जिसे भारत का संविधान हर भारतीय को जानने का मौलिक अधिकार देता है.

नरेंद्र मोदी 60 महीने प्रधानमंत्री रहे. जिसमें 565 दिन यानि 18 महीने 25 दिन विदेश यात्रा पर रहे. 101 दिन यानि 3 महीने 11 दिन पॉलिटिकल यात्राओं पर थे. यानी 565 दिन में कुल 226 दिन वो केवल यात्रा करते रहे.

15 जून, 2014 से 3 दिसम्बर, 2018 तक मोदी ने 92 देशों की यात्रा की. एक देश की यात्रा पर औसतन 22 करोड़ रूपये खर्च हुआ. 92 देशों की यात्रा पर कुल खर्च 20 अरब 12 करोड़ रूपये हुए.

देश में चुनावी रैलियों में मोदी वायुसेना का विमान उपयोग करते हैं. जबकि ये सरकारी यात्रा नहीं होती. इसमें वे वायुसेना के विमान का कमर्शियल रेट (1999 के बाद से रेट रिवाइज नहीं हुए) के हिसाब से मात्र 31000 रूपये भुगतान करते हैं. बताइए देश में इनके अलावा किसे इतने रूपये में चार्टेड प्लेन किराये पर मिलता है ??

सत्ता में रहते हुए मोदी सरकार ने 15 मई 2018 तक अलग-अलग योजनाओं के मिडिया में प्रचार-प्रसार पर 43 अरब 43 करोड़ 26 लाख रुपये खर्च किये.

2014-2015

प्रिंट मिडिया —— 4,24,8500000 (4 अरब 24 करोड़ 85 लाख रूपये)
डिजिटल मिडिया —- 4,48,9700000 (4 अरब 48 करोड़ 97 लाख रूपये)
आउटडोर ऐडवरटाइजिंग —- 79,7200000 (79 करोड़ 72 लाख रूपये)

2015-2016

प्रिंट मिडिया —– 5,10,6900000 (5 अरब 10 करोड़ 69 लाख रूपये)
डिजिटल मिडिया —– 5,41,9900000 (5 अरब 41 करोड़ 99 लाख रूपये)
आउटडोर ऐडवरटाइजिंग —– 1,18,4300000 (1 अरब 18 करोड़ 43 लाख रूपये)

2016-2017

प्रिंट मिडिया —– 4,63,3800000 (4 अरब 63 करोड़ 38 लाख रूपये)
डिजिटल मिडिया —– 6,13,7800000 (6 अरब 13 करोड़ 78 लाख रूपये)
आउटडोर ऐडवरटाइजिंग —– 1,85,9900000 (1 अरब 85 करोड़ 99 लाख रूपये)

अभी सरकारी चैनलों के अलावा नमो टीवी और कंटेंट चैनल आ गया है. इसमें सिर्फ मोदी के विज्ञापन चल रहे हैं. बाकि आपके पास सरकारी चैनलों में DD न्यूज, किसान, मेट्रो, DD इंडिया, DD नेशनल, DD भारती, लोकसभा, राज्यसभा और अरुणप्रभा जैसे चैनल तो हैं ही. देश के हर प्रान्त में हर भाषा के साथ DD का चैनल चलता है. इनके जरिये सरकार अपने काम बताकर खुद की ब्रांडिंग करती है. इसका बजट 44 अरब 9 करोड़ रूपये सरकार ने तय किया है. इसके अलावा खासतौर पर दूरदर्शन और आल इण्डिया रेडियो के लिए अलग से 28 अरब 20 करोड़ 56 लाख रूपये का बजट रखा गया.

दूरदर्शन और ऑल इण्डिया रेडियो में DAVP (डॉयरक्ट्रेट ऑफ एडवर्टीजमेंट एंड विजुअल पब्लिसिटी) और DFP (डॉयरक्ट्रेट ऑफ फिल्म पब्लिसिटी) नामक सरकारी एजेंसियां विज्ञापन बांटने का काम करती हैं. इन्हें ये विज्ञापन देने के लिए 140 करोड़ रूपये का अलग बजट रखा गया.

मोदी जी इन 60 महीने में 22 महीने सफ़र करते रहे. यानी वे इन 60 महीने के हर 10वें दिन एक चुनावी रैली करते बरामद हुए. यानी हर 9वें दिन एक सरकारी योजना का ऐलान करते पाए गए.

जबकि 10 साल की सरकार में मनमोहन सिंह 614 दिन विदेश यात्रा पर रहे और 75 दिन रैलियां की. वहीं मोदी 5 साल में 565 दिन विदेश यात्रा पर रहे और 101 दिन रैलियां करते रहे.

मोदी सरकार ने इन 60 महीनों के दौरान कुल 161 योजनाओं का ऐलान किया. पूरी योजना का जितना बजट नहीं था, उससे कई गुना ज्यादा इन योजनाओं के प्रचार पर खर्च कर दिया. मोदी ने 50 योजनाओं के प्रचार पर 97 अरब 93 करोड़ 20 लाख रूपये खर्च कर दिया. जबकि इस देश में रजिस्टर्ड डिग्रीधारी बेरोजगार की संख्या 12 करोड़ है. ये आंकड़े खुद सरकार के हैं.

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने स्पष्ट रूप से बताया है कि चुनाव के समय जो पॉलिटिकल फंडिंग हो रही है, उसमें 46% फंडिंग के बारे में हमें पता ही नहीं है कि ये कहां से आ रही है और कौन कर रहा है ? इस फंडिंग का 90% पैसा BJP के पास आ रहा है. ये सीधे तौर पर ब्लैकमनी है.

देश में 17 वीं लोकसभा सीटों के लिए 7 चरणों में चुनाव खर्च के ब्योरे कुछ इस प्रकार हैं-

1. 91 सीट (50 हजार करोड़ रूपये खर्च)
2. 97 सीट (80 हजार करोड़ रूपये खर्च)
3. 115 सीट (82 हजार करोड़ रूपये खर्च)
4. 71 सीट (90 हजार करोड़ रूपये खर्च)
5. 51 सीट (2 लाख करोड़ रूपये खर्च)
6. 59 सीट (2 लाख करोड़ रूपये खर्च)
7. 59 सीट (2 लाख करोड़ रूपये खर्च)

यानी चुनाव के दौरान हर सेंकेंड 1 करोड़ रूपये खर्च होंगे. यानी 5 साल से एक मदारी हमें आंंकड़ों के इस मकड़जाल में फंसाकर सत्ता के मजे लूटता रहा. जब भी किसी ने सवाल पूछने की कोशिश की उसे सत्ता की पावर से धराशायी कर दिया. हम पिछले 5 साल से एक लोकतंत्र नहीं बल्कि मदारियों के बनाये ‘लोकतंत्र’ में जी रहे हैं. अब अगले 5 साल का फैसला आपके हाथ में है.




Read Also –

मोदी जी का विकल्प कौन है ? – विष्णु नागर
हे राष्ट्र ! उठो, अब तुम इन संस्थाओं को संबोधित करो
शुक्रिया इमरान ! भारत में चुनावी तिथि घोषित कराने के लिए
मोदी देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान से खिलवाड़ को चौकीदारी बता रहे हैं
मोदी की ‘विनम्रता’ !




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]




Tags: नरेंद्र मोदीमनमोहन सिंहलोकसभासरकारी चैनलोंसरकारी यात्रा
Previous Post

चुनाव किसके लिए और किसके द्वारा ?

Next Post

भाजपा-आरएसएस के मुस्लिम विरोध का सच

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

भाजपा-आरएसएस के मुस्लिम विरोध का सच

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मार्क्सवाद की समस्याएं

March 16, 2020

सेना में इंजीनियरिंग के 9304 पद समाप्त, युवाओं में उत्साह

July 13, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.