Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

आदिवासियों के साथ जुल्म की इंतहां आखिर कब तक?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 30, 2017
in ब्लॉग
1
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

सुकमा एन्काउंटर में 26 सी.आर.पी.एफ. के सिपाहियों के मौत की जांच में गये पत्रकारों के सामने एक जवान ने बातों ही बातों में कहा, ‘‘नक्सली क्या मारेंगे, सरकार ही हमारी सुपारी किलिंग करवा रही है.’’ एक सिपाही के इस उद्गार के गंभीर निहितार्थ हैं. सिपाही भी लड़ना नहीं चाहता, माओवादी भी लड़ना नहीं चाहता, फिर भी लड़ाई हो रही है और दोनों ही तरफ से लोग मारे जा रहे हैं, तो ऐसे भी सवाल उठता है कि ये कौन हैं जो इस हिंसा को जारी रखना चाहता है ? आखिर वह क्यों इंसानी जानों से खिलवाड़ कर रहा है ?

You might also like

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

बस्तर का पूरा इलाका 5वीं अनुसूची के क्षेत्र के अन्तर्गत आता है. इस क्षेत्र की एक इंच जमीन भी न तो राज्य सरकार की है और न हीं केन्द्र सरकार की. इस क्षेत्र में 5वीं अनुसूची के हिसाब से न पंचायत, न नगरपालिका, न विधानसभा और न हीं लोकसभा का चुनाव होना है परन्तु यह सब बेखटके हो रहा है. इस प्रावधान के अनुसार सिर्फ राष्ट्रपति और राज्यपाल के माध्यम से ही कानून व्यवस्था में संशोधन किया जा सकता है. अनुसूचित क्षेत्र पारंपरिक ग्राम सभा से संचालित होता है. ग्राम मुखिया के अनुसार ही वहां का कानून चलता है. वहां सबसे बड़ा ग्राम सभा होता है. ग्राम सभा के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट भी नहीं बदल सकता. परन्तु संविधान प्रदत्त चीजों का पालन कहीं भी नहीं हो रहा है.

दरअसल जितने भी आदिवासी क्षेत्र हैं वे सभी प्राकृतिक संसाधनों से भरे परे हैं. आदिवासी क्षेत्र में जमीन के नीचे कीमती खनिज-संपदा का अम्बार लगा हुआ है. दरअसल सरकार इस खनिज-संपदा और प्राकृतिक संसाधनों को कौड़ी के मोल राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय कम्पनियों को दे रखी है और वहां पर खुदाई करने के लिए हजारों की संख्या को गांवों को उखाड़ा जा रहा है. लाखों की तादाद में आदिवासियों को उनकी ही जमीन से विस्थापित पर पलायन करने पर मजबूर किया जा रहा है. जब आदिवासियों ने इसका विरोध करना शुरू किया तब जाकर सरकार की पूंजीपतियों की दलाली का चेहरा साफ सामने आया. सरकार ने आदिवासियों के इस विरोध को कुचलने के लिए पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों का इस्तेमाल किया और आतंक की काली चादर फैला दिया. आदिवासियों की बहन-बेटी का इज्जत उतारने लगा. उनके घरों को जला कर खाक किया जाने लगा. उन्हें फर्जी केशों में जेलों की चाहरदिवारी में डाला जाता है. यहां रोज ही फर्जी मुठभेड़ के जरिये आदिवासियों को मारा जाता है, उनकी महिलाओं से बलात्कार किया जाता है, गांव के 300 घरों को माओवादियों को बदनाम करने के लिए ‘‘सुरक्षा बलों’’ ने जला डाले. 5000 से अधिक आदिवासी जेल में बंद हैं. 90 लाख एकड़ जमीन सरकार के कब्जे में है. जमीन से बेदखल किये गये 300 स्कूल घोषित रूप से और 500 से अधिक स्कूल अघोषित रूप से बंद कर दिये गये. कितने ही आदिवासी गांवों को खाली कराया जा चुका है और यह आज भी जारी है. अघोषित रूप से न जाने कितने गांव खाली हो गये हैं. लोग कैंपों में रह रहे हैं. न जाने कितने लोग उड़ीसा और आंध्र प्रदेश की ओर पलायान कर गये हैं.

यहां की दुर्दशा ज्यादा भयानक और रौंगटे खड़ा कर देने वाली है. रायपुर जेल की डिप्टी जेलर वर्षा डोंगरे ने अपने सोशल मीडिया पेज पर रौंगटे खड़ा कर देने वाली वारदात शेयर की है. उनके अनुसार, आदिवासियों को ‘‘उनकी जल, जंगल, जमीन से बेदखल करने के लिए गांव का गांव जलावा देना, आदिवासी महिलाओं के साथ बलात्कार, आदिवासी महिलायें नक्सली हैं या नहीं, इसका प्रमाण-पत्र देने के लिए उनका स्तन निचोड़कर दूध निकालकर देखा जाता है. टाईगर प्रोजेक्ट के नाम पर आदिवासियों को जल, जंगल, जमीन से बेदखल करने की रणनीति बनती है जबकि संविधान की 5 वीं अनुसूची में शामिल होने के कारण सैनिक सरकार को कोई हक नहीं बनता आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन को हड़पने का.’’ सुरक्षा बलों के द्वारा आदिवासी महिलाओं के साथ किये जा रहे भयानक कृत्य को उजागर करते हुए वर्षा डोंगरे आगे लिखती है, ‘‘मैंने स्वयं बस्तर में 14 से 16 वर्ष की मुड़िया माड़िया आदिवासी बच्चियों को देखा था, जिनको थाने में महिला पुलिस को बाहर कर पूरा नग्न कर प्रताड़ित किया गया था. उनके दोनों हाथों की कलाईयों और स्तनों पर करेंट लगाया गया था, जिसके निशान मैंने स्वयं देखे. मैं भीतर तक सिहर उठी थी … कि इन छोटी-छोटी आदिवासी बच्चियों पर थर्ड डिग्री टार्चर किसलिए ?’’

आखिर यह सबकुछ क्यों हो रहा है के जवाब में वर्षा डोंगरे साफ तौर पर कहती है, ‘‘सारे प्राकृतिक खनिज संसाधन इन्हीं जंगलों में है, जिसे उद्योगपतियों और पूंजीपतियों को बेचने के लिए खाली’’ करवाया जा रहा है. और इस लूट के खिलाफ जो भी सामाजिक जनवादी कार्यकत्र्ता, पत्रकार, आमजन, मानवाधिकारवादी कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी इन आदिवासियों के हित में आवाज उठाता है उसे या तो माओवादी समर्थक कहकर जेलों में डाल दिया जाता है अथवा फर्जी मुठभेड़ों में मार गिराया जाता है ताकि यहां की दुर्दशा की जानकारी बाहर के लोगों तक न पहंुच सके. अगर सरकार आदिवासी क्षेत्र में सब कुछ ठीक मान रही है तो फिर वह इतना डरती क्यों है ? क्या कारण है कि वहां की सच्चाई जानने के लिए किसी को वहां जाने नहीं दिया जाता ?

वहीं दूसरी ओर इसके उलट जिस सुरक्षा बलों को सरकार आदिवासियों पर जुल्म ढाने को भेजती है यह सरकार उसकी भी इज्जत नहीं करती. बस्तर में मारे जाने वाले जवानों को शहीद का दर्जा और उसके परिवार वालों को शहीद की तरह क्षतिपूर्ति नहीं दी जाती. अखबारों जिसकी विश्वसनीयता शून्य पर पहुंच चुकी है, शहीद-शहीद कहकर ढ़ोल पीटती है, पर उसके लिए भी सरकार कुछ नहीं करती. यहां तक कि उसके शव को दफनाने के लिए दो गज जमीन तक देने को तैयार नहीं होती. ऐसी स्थिति में एक ही वर्ग से आने वाले और दोनों को ही मुर्गे की तरह लड़ाने वाले काॅरपोरेट घरानों और उसकी दलाली में दण्डवत् इस सरकार से सैन्य बलों के द्वारा यह सवाल जरूर पूछा जाना चाहिए कि आखिर हम तुम्हारे और काॅरपोरेट घरानों के हित के लिए खुद की और आदिवासियों की बलि क्यों चढ़ायें ?

Previous Post

सोशल मीडिया पर अन्ना हजारे की जम कर उड़ी खिल्ली

Next Post

सुकमा एन्काउंटर का माओवादियों द्वारा जारी वायरल जीवन्त विडियो

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

by ROHIT SHARMA
March 22, 2026
ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
Next Post

सुकमा एन्काउंटर का माओवादियों द्वारा जारी वायरल जीवन्त विडियो

Comments 1

  1. Sumit yadav says:
    9 years ago

    Shi baat hai…yeh sarkare sirf punjipatiyo ke talwe chaatti hai or garib aadiwasiyo ke upper julm dhaati hai….

    Reply

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

झूठ के आसमान में रफाल की कीमतों का उड़ता सच – द हिन्दू की रिपोर्ट

January 18, 2019

बढ़त के आधार पर आये चुनावी परिणामों का एक सरल, सपाट विश्लेषण 

December 12, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.