Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

सेकुलर ‘गिरोह’ की हार और मुसलमानों की कट्टरता

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 26, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

सेकुलर 'गिरोह' की हार और मुसलमानों की कट्टरता

शादाब सलीम, अधिवक्ता, इंदौर

‘हिन्दू जाग गया है’ यह जुमला नहीं है बल्कि यह बड़ी सार्थक बात है. किसी ज़माने में हम ऊपर-ऊपर कह देते थे कि गंगा जमना तहज़ीब और अंदर से बिल्कुल काले थे.

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

श्री मोदी को प्रचंड बहुमत मिला है और मुस्लिम वोट अर्थहीन हुए है. जो दल मुसलमानों के नज़दीक गया, उसे खतरनाक तरीक़े से हंकाला गया है.

समीक्षा चल रही है. हार के कारण तलाशे जा रहे है. एक सबसे बड़ा कारण है, जिसे सब मिलकर छिपा रहे हैं, वह कारण है-कट्टरता.




हिन्दू को जिस रूप में हम देख रहे हैं, वह सदा से ऐसा कभी नहीं था. इस तरह के लोग थे तो सही, पर उनकी तादाद उंगलियों पर गिन लेने जितनी थी. अगर हिन्दू आज जैसा है ऐसा देश के संविधान बनते समय होता तो किसी की हिम्मत नहीं थी जो आप इस तरह का संविधान गढ़ लेता. आप देखिए कैसे कट्टर-से-कट्टर लोगों को आत्मसात किया जा रहा है. पहले योगी, फिर साध्वी, आगे और कोई भी है. जो ज़रा भी लिबरल था, उसे बाहर किया जा रहा है – अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, राजनाथसिंह.

हिन्दू में बदलाव आया है. यह लोग हिन्दू के जागने का अर्थ किस बात से लगा रहे ? हिन्दू के जागने का अर्थ है – हिन्दू का कट्टर हो जाना.




एक बहुत बड़ा प्रश्न है जो इस देश के तमाम धर्मनिरपेक्ष लोगों को मथ कर रख देगा. आख़िर हिन्दू इस रूप में आया कैसे ?

इसका एक ही जवाब है – मुसलमानो की कट्टरता. एक अरसे से मुसलमान अपनी कट्टरता को छिपाए-छिपाए बैठे हैं. यह सियासत में तो धर्मनिरपेक्षता चाह रहे थे और अपने सामाजिक जीवन में खतरनाक तरीक़े से कट्टर हो रहे थे.

इन लोगों ने किसी मुस्लिम औरत के माथे पर बिंदी लगा लेने और मांग में सिंदूर रख लेने तक पर सवाल पैदा किये है. दीवाली के दिए और होली के रंग तक को हराम करार दिया है. बीते पचास सालों में इन्होंने जी भर कर कट्टरता फैलाई है. एक तरफ यह सेकुलर गिरोह को राजनीति में वोट करते रहे और दूसरी तरफ यह लोग अपने आर्थिक सामाजिक जीवन में कट्टरता को फ़रोग़ देते रहे.




यह इतने भोले थे कि इन्हें यह भी ख़बर नहीं थी कि हमारी इस कट्टरता से कौन फ़ायदा उठा रहा है और हमारी इस कट्टरता से हमारा कितना नुकसान है ?

यह हर कट्टरता को अपना धर्म बताते रहे और उस कट्टरता पर अमल करना अपना संवैधानिक अधिकार बताते रहे. इन्होंने रत्ती भर यह प्रयास नहीं किया कि हम गंगा-जमना तहज़ीब को बराकर रखे, उसमें अपना योगदान दें. अगर इनके समुदाय का कोई आदमी गलती से किसी मंदिर में घंटी बजाता मिल जाए तो कोहराम हो जाता.

इनकी यह सारी सामाजिक और धार्मिक कट्टरता हिन्दुओं की राजनीतिक कट्टरता में तब्दील हो गयी. फिर आरएसएस ने अपना पत्ता फेंका और हिन्दुओं के घर-घर मुसलमानों की कट्टरता को भेजने का काम किया. ख़ासकर इंटरनेट क्रांति ने उनका यह काम आसान किया. इससे हुआ यह कि दूर दराज़ के देहात के रहने वाले हिन्दुओं तक यह बातें चली गयी और इन बातों को एक का चार करके पेश किया गया.




सबसे पहले सवर्ण वर्ग मुसलमानों से दूर हुआ. जो ब्राह्मण इनके लिए आवाज़ उठाया करता था, गांधीवाद पर ईमान रखता था, वह मस्ज़िद के सामने एहतराम से झुका करता था, उसे इनसे नफ़रत होने लगी और वह सीधे सावरकर और हेडगेवार की गोद में जाकर बैठने लगा. एक तरफ वह राष्ट्रवाद और दूसरी तरफ मुस्लिम द्वेष पर बल देने लगा. बाबरी मस्जिद के मुद्दे ने लगभग अस्सी फ़ीसदी सवर्ण को मुस्लिम से बिल्कुल दूर कर दिया और गुजरात दंगे ने इस आंकड़े को नब्बे फ़ीसदी कर दिया.

जब बाबरी को लेकर बातें चल रही थी, उस वक़्त भी मुसलमानों ने कोई ढंग का फैसला नहीं लिया और लगभग सारे सवर्ण को अपना दुश्मन कर लिया. एक मस्ज़िद इन्हें हमेशा का ज़ख्म दे गयी. हिन्दुओं के मन में यह धारणा को जन्म दिया गया कि जिन हिन्दुओं ने इन्हें समानता के साथ रहने के अधिकार दिए और इनकी तहज़ीब को अपने देश में जगह दी, उन ही हिन्दुओं की आस्थाओं के लिए इन्होंने एक मस्जिद तक नहीं छोड़ी. यह राग अलाप करते रहे कि ‘हमने एक मस्ज़िद छोड़ी तो यह सारी मस्जिदें ले लेंगे.’ और यहां कामयाब हुआ संघ. लगभग सारे सवर्ण वह अपने साथ ले गया, जहां उसने इन्हें सांप्रदायिकता की भट्टी में तपा कर नफ़रत का लोहा बनाया.




मुसलमानों के साथ बचा दलित और पिछड़ा. मुसलमानों ने इनके साथ भी कौड़ी भर का न्याय नहीं किया. जो दलित मुसलमान बने, उन्हें अशराफ मुसलमानों ने किस हद दर्जे का अपमानित किया है. सैय्यदवाद और पठानी अहंकार इनके सर पर था. इन्होंने अपने धर्म में आए दलितों के साथ कोई रोटी-बेटी का व्यवहार नहीं किए. जब हिन्दू दलित ने मुसलमानों की इन जातिगत भेदभाव को देखा, तो वह भी इनसे चिढ़ने लगा. वह दंगों में मुसलमानों के खिलाफ जमकर अभिव्यक्ति देता रहा. धीरे-धीरे वह कट्टर हुए सवर्णों के साथ शामिल होंगे लगा और अनन्तः वह लगभग सत्तर फ़ीसदी उनके साथ चला गया.

अब मुसलमानों के साथ रह गए थोड़े बहुत सेकुलर और नास्तिक लोग, जिनमें दलित, ब्राह्मण, क्षत्रिय, सिख, ईसाई सभी शामिल हैं. अगर अब यह लोग अपनी सामाजिक और धार्मिक कट्टरता पर अड़े रहते हैं और विचारों की विविधता पर पूरी तरह यकीन नहीं रखते, एक स्कर्ट और बुरखा पहनने वाली औरत को समान नज़र से नहीं देखते तो बहुत जल्द यह लोग भी इनसे टूट जाएंगे और यह पूरी तरह राजनीतिक सामाजिक और धार्मिक अछूत बना दिए जाएंगे.




मेरा यह लेख नीम की पत्तियों की तरह है. आपको इसे आत्मसात करना ही होगा. और हां, बुरी अभिव्यक्ति बिल्कुल न दीजिए और इस्लाम की तालीम भी बिल्कुल नहीं दीजिए. मेरे पास इस्लाम की बहुत तालीम है और इतनी है कि मैं टोपी लगाकर मज़हबी तकरीरें करने लग जाऊंं तो आप हाथ चूमेंगे.




Read Also –

आईये, अब हम फासीवाद के प्रहसन काल में प्रवेश करें
मोदी के सवाल पर बहुजन युवा भ्रमित क्यों ?
सिवाय “हरामखोरी” के मुसलमानों ने पिछले एक हज़ार साल में कुछ नहीं किया 




[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]




Previous Post

तंजानिया : अमीरों के लिये मुश्किल और ग़रीबों के लिये सुविधा

Next Post

मोदी में भाजपा : हिन्दूराष्ट्र की स्थापना के लिए संकल्पित वोटर ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

मोदी में भाजपा : हिन्दूराष्ट्र की स्थापना के लिए संकल्पित वोटर ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

2,00,000 पुरुष कंडोम, 20,000 महिला कंडोम और 10,000 डेंटल डैम पेरिस ओलंपिक विलेज में

August 8, 2024

मार्क्स के जन्मदिन पर विशेष : मार्क्स की स्‍मृतियां – पॉल लाफार्ज

May 6, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.