Wednesday, July 29, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

पाखंड का फलक : पैसे वाला पेड़

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 28, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

पाखंड का फलक : पैसे वाला पेड़

पं. किशन गोलछा जैन, ज्योतिष, वास्तु और तंत्र-मंत्र-यन्त्र विशेषज्ञ

धार्मिक अंधविश्वासों और पाखंडी ढोंगों का कोई अंत नहीं है. ये सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में अलग-अलग रूपों में मौजूद है. कत्तई जरूरी नहीं कि सिर्फ भारतीय ही ढोंगों और ढकोसलों को पोषित करते हैं. ये तो दुनियाभर में अलग-अलग रूपों में फैला एक ऐसा अंंधेर का जाल है जिसमें एक बार आप फंसे तो फिर इससे निकल नहीं सकते.

You might also like

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

ढोंग और पाखंड की श्रृंखला में आज ब्रिटेन के एक ऐसे पेड़ में बारे में बता रहा हूंं जिसमे पैसे ही पैसे लगे हैं आपने वो कहावत तो सुनी ही होगी कि ‘पैसे क्या पेड़ पर उगते हैं’, पैसे भले ही पेड़ पर उगते न हो लेकिन लगाये तो जा ही सकते है न.

ब्रिटेन के स्कॉटिश हाईलैंड के पीक डिस्ट्रिक्ट फॉरेस्ट में. वेल्स के पोर्टमेरियन गांव में मौजूद ये पेड़ अब अंधविश्वासियों के लिये एक मशहूर टूरिस्ट स्पॉट बन चुका है, जहांं विकसित देशों के उच्च शिक्षित मुर्ख अंधविश्वासी आकर सिक्के लगाते हैं. वैसे शिक्षा का अंधविश्वास से कोई ताल्लुक नहीं है और इसका एक उदाहरण- सेटेलाइट और उपग्रह प्रक्षेपित करने वाले पढ़े-लिखे वैज्ञानिक भी उन्हें अंतरिक्ष में भेजने से पहले क्रियाकांड करवाते हैं. ये सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में हो रहा है (अपवादों को छोड़कर). वे सभी अपने-अपने धर्म के अनुसार क्रियाकांड करते हैं.




सिक्को वाला पेड़ ब्रिटेन का ऐसा अंधविश्वास है जिसके बारे में ब्रिटेन में आने वाले विदेशी सैलानियों के लिये भी सरकारी तौर पर इसको टूरिज्म बुक में निर्दिष्ट किया गया है. (हो सकता है ये प्रोपेगेंडा ब्रिटेन सरकार ने ही चलाया हो, टूरिस्ट बढ़ाने के लिये. आखिर 200 साल भारत में राज किया है इतना तो वे हमसे सीख ही गये होंगे.)

पेड़ के बारे प्रचारित किया गया है कि ये पेड़ 1700 साल पुराना है जबकि दुनिया के सबसे पुराने पेड़ों के संकलन में इसका कोई नाम नहीं है. विश्व के अब तक के सबसे पुराने ज्ञात पेड़ों में ओल्ड टीजिक्को में है, जो स्वीडन के डलारना प्रांत में है, जो 9550 वर्षो से जीवित है अर्थात हरा-भरा है. इसके बाद 9000 वर्ष, 5660 वर्ष और 375 वर्ष पुराने पेड़ों (सभी स्वीडन में ही) की भी पहचान की जा चुकी है. इससे पहले अर्थात इन पेड़ों की खोज और जांंच से पहले दुनिया के सबसे पुराने पेड़ो के रूप में उत्तरी अमेरिका के देवदार के 5000 वर्ष और 4000 वर्ष वाले थे लेकिन इसमें ब्रिटेन का 1700 वर्ष वाला पेड़ कहीं भी नहीं है (सभी वृक्षों की जांंच अमेरिका के फ्लोरिडा और मियामी शहर की प्रयोगशालाओं में की गई थी).




वक़्त के साथ ब्रिटेन का ये पाखंड इतना फेमस हो चुका है कि विदेशी सैलानी विशेष तौर पर अपनी मान्यताओं की पूर्ति के लिये ब्रिटेन आते हैं. समय के साथ-साथ इससे जुडी अंधी मान्यतायें भी बढ़ती ही जा रही है. पहले ये सिर्फ गुडलक की मान्यता से जुड़ा था मगर अब लम्बी आयु, बीमारी से छुटकारा, प्रेम की प्राप्ति, सुख-समृद्धि, मन की मुराद, प्रेमी-जोड़ों के रिश्तोंं में ठहराव, तनाव मुक्ति और हर परेशानी से छुटकारा भी दिलाता है (भारत में ये सभी काम बंगाली बाबा करते हैं). क्रिसमस के मौके पर तो ईसाई धर्म के अंधविश्वासी लोग यहां मिठाइयां और गिफ्ट्स भी रखते हैं.

कुछ लोग तो इसमें ईश्वर का वास मानते हैं तो कुछ भूत का. कुछ इसमें डिवाइन पावर मानते हैं तो कुछ कोई सकारात्मक शक्ति. कुल मिलाकर अन्धविश्वास इतना गहरा हो चुका है कि पेड़ में कोई ऐसी जगह नहीं बची है जहां पर सिक्के न लगे हों. सिक्के भी सिर्फ यूके के नहीं बल्कि दुनियाभर के देशों के लगे हुए हैं. सिक्के लगाने से भी ज्यादा अन्धविश्वास सिक्के निकालने के बारे में है. अतः भूख से मरता व्यक्ति भी वहां से सिक्के नहीं निकालता.




दुनियाभर में फैले पाखंडों और धार्मिक ढोंगों को देखकर एक बात तो स्पष्ट समझ में आती है कि इन सबका का कारण है – अभाव. अभावग्रस्त व्यक्ति जब डिप्रेशन में डूबा होता है तब आशा की किरण के रूप में ये धार्मिक अंध-आस्थायें और पाखंड मुख्य भूमिका निभाते हैं. और तब तो सोने पे सुहागा हो जाता है जब एक ही तरह का डिप्रेशन लम्बे समय तक अलग-अलग लोगों में लगातार हो. फिर तो ये सिलसिला दिनों या महीनों नहीं, बल्कि सैकड़ो-हज़ारों सालों तक चलता है.




Read Also –

आईये, अब हम फासीवाद के प्रहसन काल में प्रवेश करें
स्युडो साईंस या छद्म विज्ञान : फासीवाद का एक महत्वपूर्ण मददगार
106वीं विज्ञान कांग्रेस बना अवैज्ञानिक विचारों को फैलाने का साधन




[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे.] 




Previous Post

करिश्माई आब-ए-जमजम या अंधी आस्था का कुआंं

Next Post

इस्लाम के पाखंड और कुरआन का सच

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

by ROHIT SHARMA
July 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
Next Post

इस्लाम के पाखंड और कुरआन का सच

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

गांव गांव श्मशान

November 11, 2022

सदन में फिर बजटोत्सव है … हिहिहि

February 3, 2025

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

July 27, 2026
Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

July 27, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.