ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

एक दिन…

एक दिन हमसे पूछा जाएगा हम क्या कर रहे थे ? एक दिन हमसे पूछा जाएगा हमारी नींद कितनी गहरी...

शब्द

कोई मौसम ऐसा भी आता है कितना भी सहेजें शब्दों में घुन लग जाता है ऊपर से सही सलामत दिखते...

ब्रतानिया हुकूमत का चरण वंदना करने वाले आज हमें राष्ट्रवाद का उपदेश दे रहे हैं

ब्रतानिया हुकूमत का चरण वंदना करने वाले आज हमें राष्ट्रवाद का उपदेश दे रहे हैं संजय कुमार सिंह इस 8...

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