ROHIT SHARMA

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'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

श्रम के 12 घंटे, मजदूरों की ‘चेतना’ और अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की नौटंकी

श्रम के 12 घंटे, मजदूरों की चेतना और अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की नौटंकी एक फैक्ट्री में मई दिवस के सवाल...

कुतदौड़

मेरे हाथों में पड़ी मेरे कुत्ते की जीन पर खिंचाव बढ़ता जा रहा है मेरे कुत्ते को इस दौड़ में...

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