ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

अंधी सड़कें

अंधी सड़कें नहीं देख पाती शार्क के खुले जबड़े आदमी मच्छी के कांटे सा फंसा हुआ है उसके नुकीले दांतों...

मैंने इस देश के लोकतंत्र का जो भयानक चेहरा देखा है उससे मुझे अब किसी पर भरोसा नहीं रहा – हिमांशु कुमार

हिमांशु कुमार पिछले दिनों मैंने एक आदिवासी लड़की के बारे में लिखा था जिसके साथ पुलिस थाने में दो बार...

फेसबुक लेखन : फेसबुक को शक्तिशाली माध्यम बनाना है तो देश की राजनीति से जोडना होगा

फेसबुक लेखन : फेसबुक को शक्तिशाली माध्यम बनाना है तो देश की राजनीति से जोडना होगा जगदीश्वर चतुर्वेदी हिन्दी फेसबुक...

फ़ासीवादी मोदी शासन का लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला…अंतिम रास्ता सड़क है…!

फ़ासीवादी मोदी शासन का लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला...अंतिम रास्ता सड़क है...! फ़ासीवाद की एक ख़ासियत यह होती है कि वह...

इंस्टेंट जस्टिस यानी खतरे में लोकतंत्र : स्वस्थ लोकतंत्र में दंड देने का काम अदालतों का होता है, फिर चाहे असद हों या विकास दूबे

आभा शुक्ला नाथूराम गोडसे ने बिड़ला भवन में जब बापू की गोली मारकर हत्या की तो वह रंगे हाथों पकड़ा...

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