ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

धारावाहिक ‘स्वराज’ : ग़लत इतिहास मिटाने के नाम पर ग़लत इतिहास बनाने का स्वर्णिम दौर

मीडिया पर न्यूज़ लॉड्री की यह श्रृंखला काफ़ी ठोस और गंभीर होती जा रही है. पढ़ते चलिए ताकि पता चले...

तिनक धिन

डर डरकर जो लिखते हैं फटी फटी सी रहती है तिलकधारी जैसी चेता में रचना रचते हैं स्त्री दलित रचना...

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