गरीबी की कोख से जन्मी मजबूरी इंसानियत का भी भक्षण कर लेती है
गरीबी की कोख से जन्मी मजबूरी इंसानियत का भी भक्षण कर लेती है राम अयोध्या सिंह गरीबी से बढ़कर कोई...
'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
गरीबी की कोख से जन्मी मजबूरी इंसानियत का भी भक्षण कर लेती है राम अयोध्या सिंह गरीबी से बढ़कर कोई...
पेंशन, सब्सिडी, छुट्टियां, मंहगाई भत्ता, चिकित्सा सुविधाएं यह सब बड़े संघर्षों के बाद पाए अधिकार हैं. इन्हें भावुक बनाकर खत्म...
मुसलमानों के बारे में दो गलतफहमियां हिमांशु कुमार, गांधीवादी विचारक भारत में बहुत सी गलतफहमियां मौजूद हैं. आज इनमें से...
हम नहीं पहनतीं पैरों में पायल जिससे तुम्हें हो आभास हमारी मौज़ूदगी का और हमें हो एहसास अपने दायरे का...
महान कृति ‘दस दिन जब दुनिया हिल उठी’ के लेखक जॉन रीड की जीवनी पहला अमरीकी नगर, जहां मजदूरों ने...
ये बादशा का हुक्म है तुम्हारी अर्थियां उठें मगर ये ध्यान में रहे कि मेरे लिये जो है सजी वो...
मैट्रो में सीट हथियाने में कामयाब एक सज्जन भरी भीड़ में अपने मोबाइल पर जोर-शोर से माता की भेंटे सुन...
पलायन कभी सोचता हूं रूक कर इन घरों के बारे में कहां चले जाते हैं लोग ? इन घरों से...
भगत सिंह को याद करते हुए उनकी शहादत के बाद प्रख्यात साहित्यकार रामवृक्ष बेनीपुरी ने यह लेख लिखा था. यह...
अर्बन नक्सल से कलम नक्सल तक के विकास पर मोदी के इस भाषण को बहुत ध्यान से सावधानीपूर्वक अध्ययन करना...
'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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