ROHIT SHARMA

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'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

किसी की पेंशन छोड़ने से अग्निवीरों को पेंशन नहीं मिल जाएगी

पेंशन, सब्सिडी, छुट्टियां, मंहगाई भत्ता, चिकित्सा सुविधाएं यह सब बड़े संघर्षों के बाद पाए अधिकार हैं. इन्हें भावुक बनाकर खत्म...

पलायन

पलायन कभी सोचता हूं रूक कर इन घरों के बारे में कहां चले जाते हैं लोग ? इन घरों से...

अब ‘अर्बन नक्सल से कलम नक्सल’ – वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्यों के गृह मंत्रियों के ‘चिंतन शिविर’ के दौरान प्रधानमंत्री का संबोधन

अर्बन नक्सल से कलम नक्सल तक के विकास पर मोदी के इस भाषण को बहुत ध्यान से सावधानीपूर्वक अध्ययन करना...

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