ROHIT SHARMA

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'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

नेहरु द्वेष की कुंठा से पीड़ित ‘मारवाड़ी समाजवाद’ ने लोहिया को फासिस्ट तक पहुंचा दिया

नेहरु द्वेष की कुंठा से पीड़ित 'मारवाड़ी समाजवाद' ने लोहिया को फासिस्ट तक पहुंचा दिया बीजेपी 2014 में बीते 30...

कैमराजीवी

कैमराजीवी किसी युग में एक कैमराजीवी हुआ करता था. इतिहास की पुस्तकों में उसका नाम ठीक-ठीक नहीं मिलता मगर इतना...

सवाल कविता कृष्णन पर नहीं, सीपीआई (माले) लिबरेशन पर है

मार्क्सवाद-लेनिनवाद-माओवाद की क्रांतिकारी सिद्धांत के जिस महत्वपूर्ण प्रस्थापना पर मार्क्स के जमाने से ही पूंजीवादी-साम्राज्यवादी पालतू बुद्धिजीवी सबसे ज्यादा हमला...

मोहन चंद

मोहन चंद एक क़मीज़ है जिसे रोज धोता है रोज सुखाता है रोज पहनता है सादा जीवन उच्च विचार का...

मुसलमानों के हाथों पांच मुस्लिम वैज्ञानिकों का भाग्य

मुसलमानों के हाथों पांच मुस्लिम वैज्ञानिकों का भाग्य मुसलमानों के हाथों मुस्लिम वैज्ञानिकों का भाग्य स्वयं जनता को नहीं बताया...

सामाजिक क्रांति के खिलाफ गांधी प्रतिक्रांति के सबसे बड़े नेता थे ?

भारत में चार सामाजिक क्रांतियां हुई हैं. पहली क्रांति बुद्ध के नेतृत्व में (प्राचीन काल); दूसरी क्रांति कबीर, रैदास, तुकाराम...

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