Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

साहित्य के नोबेल 2022 : ऐनी ऐरनॉ के साथ एक लेखिका से परिचय

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 11, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

लिखना एक राजनीतिक काम है, जो हमारी आंखें खोलता है, जिससे हम सामाजिक असमानता देख पाते हैं.

– ऐनी एरनॉ

साहित्य के नोबेल 2022 : ऐनी ऐरनॉ के साथ एक लेखिका से परिचय
साहित्य के नोबेल 2022 : ऐनी ऐरनॉ के साथ एक लेखिका से परिचय
प्रियदर्शन

जब भी साहित्य के नोबेल की घोषणा होती है, विश्व साहित्य से अपने अपरिचय का एक और प्रमाण सामने आ जाता है. अक्सर हर साल कुछ नोबेल-वंचित प्रतिष्ठित लेखकों की सूची घूमती रहती है. इस बार भी सलमान रुश्दी को नोबेल मिलने की संभावना जताई जा रही थी जिन पर बीते दिनों हमला हुआ.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

इसके अलावा मिलान कुंदेरा या मुराकामी या एडॉनिस जैसे मशहूर लेखकों-कवियों का नाम हर साल संभावित लेखकों में रहता ही है लेकिन इस बार भी जिस फ्रेंच लेखिका ऐनी एरनॉ के नाम यह सम्मान घोषित हुआ है, वह अपेक्षया अपरिचित नाम है- उनसे कम से कम इन पंक्तियों का लेखक परिचित नहीं था.

लेकिन गूगल ने यह आसान कर दिया है कि आप बिल्कुल एक क्लिक में किसी भी लेखक के परिचय और उसकी कृतियों तक पहुंच जाते हैं. 20 बरस पहले तक यह आसान नहीं था जब नादीम गार्डिमर या टोनी मॉरीसन या नायपॉल जैसे लेखकों के बारे में सामग्री जुटानी होती थी.

तो गूगल से यह पता चला कि फ्रांस की जिस लेखिका ऐनी ऐरनॉ को नोबेल मिला है, वह मूलतः आत्मकथात्मक लेखन के लिए जानी जाती है. नोबेल समिति ने उसका नाम घोषित करते हुए कहा कि उनका लेखन ‘जिस साहस और स्पष्टता से निजी स्मृतियों की जड़ों, अलगाव और सामूहिक संयम को उद्घाटित करता है’, यह नोबेल उसके लिए दिया गया है.

वैसे अगर आप साहित्य में दिलचस्पी रखते हों तो गूगल पर मौजूद सामग्री भी आपके भीतर यह समझ पैदा कर सकती है कि जिस लेखिका को आप नहीं जानते, वह एक स्तर पर कैसी विश्वजनीन लेखिका है. एरनॉ की सबसे महत्वपूर्ण मानी जाने वाली किताब ‘द ईयर’ की भूमिका ही आपको लगभग स्तब्ध छोड़ जा सकती है. दो अलग-अलग लेखकों के वक्तव्यों के साथ इसकी शुरुआत होती है. एक वक्तव्य स्पेन के विचारक और निबंधकार जोस ओर्तेगा वाई गैसेट का है- ‘हमारे पास जो कुछ है वह इतिहास है…और वह हमसे जुड़ा हुआ नहीं है.‘

इसके बाद आता है ऐंटन चेखव का वक्तव्य- ‘हां, वे हमें भूल जाएंगे. यही हमारी नियति है. इसके अलावा कोई चारा नहीं है. जो हमें गंभीर, महत्वपूर्ण, बेहद आवश्यक लगता है, वह एक दिन भुला दिया जाएगा या महत्वहीन लगेगा. और दिलचस्प यह है कि हम बता नहीं सकते कि किसे महान और महत्वपूर्ण माना जाएगा और किसे ओछा और हास्यास्पद माना जाएगा… और यह संभव है कि हमारी मौजूदा ज़िंदगी, जिसे हम इतनी तत्परता से स्वीकार करते हैं, वक्त के साथ अजनबी, असुविधाजनक, मूर्खतापूर्ण, बहुत साफ़-सुथरी नहीं, बल्कि शायद पापपूर्ण भी मालूम होगी.‘

वर्तमान के साथ अतीत और इतिहास के बहुत निर्मम संबंध की बात करते हुए, हमारी ज़िंदगियों की तुच्छता को रेखांकित करते हुए एक स्पैनिश निबंधकार और एक रूसी लेखक के इन दो वक्तव्यों को उद्धृत करते हुए यह फ्रेंच लेखिका क्या करती है ? वह अपनी भूमिका में और निर्मम दिखाई पड़ती है. वह शुरू यहां से करती है – ‘सारी छवियां गुम हो जाएंगी.‘

और सहसा हमें अपने सरदार अली जाफ़री याद आते हैं जो ‘मेरा सफ़र’ में बरसों पहले लिखकर गुज़र चुके हैं- ‘ फिर इक दिन ऐसा आएगा / आंखों के दिए बुझ जाएंगे / हाथों के कंवल कुम्हलाएंगे / और बर्ग-ए-ज़बाँ से नुत्क़ ओ सदा / की हर तितली उड़ जाएगी / इक काले समुंदर की तह में / कलियों की तरह से खिलती हुई / फूलों की तरह से हंसती हुई / सारी शक्लें खो जाएंगी / ख़ूं की गर्दिश दिल की धड़कन / सब रागिनियां सो जाएंगी / ….हर चीज़ भुला दी जाएगी / यादों के हसीं बुत-ख़ाने से / हर चीज़ उठा दी जाएगी / फिर कोई नहीं ये पूछेगा / ‘सरदार’ कहां है महफ़िल में.’

हालांकि अपनी इस लंबी नज़्म में सरदार लौटते हैं, लेकिन हम इसे यहां छोडकर चलते हैं ‘द ईयर्स’ की उस भूमिका में जहां ऐनी एरनॉ ने पहला वाक्य लिखा है- ‘सारी छवियां गुम हो जाएंगी.‘ इसके बाद वे जैसे सूची बनाती हैं- क्या-क्या ग़ायब हो जाएगा.

मसलन एक छवि ‘उस औरत की, जो दिन की रोशनी में, युद्ध के बाद इव्टो के खंडहरों के किनारे एक झोपड़ी के पीछे, जहां कॉफ़ी मिलती है, उकडूं बैठे पेशाब कर रही थी, जो उठी, उसकी स्कर्ट उठी हुई थी, उसने अपना अंडरवियर ऊपर किया, और फिर कैफ़े में चली आई.‘ या ‘फिल्म ‘द लांग ऐब्सेंस’ में जॉर्ज विल्सन के साथ नृत्य करती हुई आलिदा वाल्ली के आंसू भरे चेहरे की.’

यह सूची बड़ी लंबी है. और वे कहती हैं- ‘वे सारी छवियां (गुम हो जाएंगी) जो वास्तविक हैं या काल्पनिक, जो पूरे रास्ते हमारी नींद तक हमारा पीछा करती हैं. एक लम्हे की छवियां, अपने अकेले की रोशनी में नहाई हुई.’

इसके बाद फिर उनकी भविष्यवाणी जैसी बात शुरू होती है- ‘ये सब एक ही समय में गायब हो जाएंगी. उन लाखों छवियों की तरह जो आधी सदी पहले गुज़र चुके हमारे परदादाओं के ललाट के पीछे थीं, और अपने अभिभावकों की तरह भी, जो अब नहीं रहे. वे छवियां, जिनमें हम उन वजूदों के बीच नन्ही लड़कियों जैसी दिखती थीं, जो हमारे पैदा होने से पहले गुजर चुके, ठीक उसी तरह जैसे हमारी अपनी स्मृतियों में हमारे अभिभावकों और सहपाठियों के बाद हमारे बच्चे हैं. और एक दिन हम अपने बच्चों की स्मृतियों में नज़र आएंगे, उनके परपोतों की स्मृतियों में और उन लोगों में जो पैदा नहीं हुए हैं. यौन इच्छा की तरह, स्मृति कभी नहीं रुकती. यह जीवितों को मृतों से जोड़ती है, वास्तविक को काल्पनिक से, स्वप्न को इतिहास से.’

तो यह ऐनी ऐरनॉ है- अपनी भूमिका में ही एक सिहरा देने वाला अनुभव देने वाली. जिस समय सब कुछ प्रकाश की रफ़्तार से गुज़रा जा रहा है, उस समय अतीत के कुएं और भविष्य के आसमान में झांकने वाली, काल की आंख में आंख डाल कर देखने वाली इस लेखिका से परिचय कराने के लिए नोबेल पुरस्कार समिति का शुक्रिया. वैसे इस समिति ने पहले भी कई महत्वपूर्ण लेखकों से परिचित कराया है. बड़े पुरस्कार यह काम करते हैं. वे लेखकों को बड़ा नहीं बनाते, मगर बड़े लेखकों को हमारे सामने ले आते हैं.

इस प्रथम पाठ में ऐनी ऐरनॉ एक बड़ी लेखिका की तरह मिलती हैं, इसमें संदेह नहीं. इन्हें पढ़ने की इच्छा बनी रहेगी.

Read Also –

‘विज्ञान की न कोई नस्ल होती है और ना ही कोई धर्म’ – मैक्स वॉन लाउ
राजा रवि वर्मा, जिन्होंने हिन्दू देवी-देवताओं को पहली बार कैनवास पर उतार जन-जन तक पहुंचाया

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

आर्थिक तबाही के कगार पर खड़ी जनता के हाथ में झुनझुना थमाती सरकार

Next Post

केन्द्र को न अर्थव्यवस्था की चिंता है और न ही गिरते रुपये की, उसे तो सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने की फिक्र है – नरेन्द्र मोदी

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

केन्द्र को न अर्थव्यवस्था की चिंता है और न ही गिरते रुपये की, उसे तो सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने की फिक्र है - नरेन्द्र मोदी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

वैक्सीन इतनी कारगर है तो फिर संक्रमण बढ़ क्यों रहा है ?

July 19, 2021

सबक : आज जो जोशीमठ में हो रहा है…

March 10, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.