ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

धार्मिक उत्सव : लोकतंत्र के मुखौटे में फासिज्म का हिंसक चेहरा

जगदीश्वर चतुर्वेदी लोकतंत्र में क़ानून के शासन, संविधान, संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता, भारतीय दंड संहिता एवं प्रशासनिक नियमों का महत्व...

उल्टा जमाना

ऎसा ज़माना आ गया है उल्टा कि कोई तुम्हें रास्ता बताए तो शक करो वह तुम्हें लूट सकता है सुनसान...

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