ROHIT SHARMA

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'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

उमर खालिद प्रकरण : संघियों के पापों को धोते कोर्ट को बंद करो और माओवादियों की जन अदालतों को मान्यता दो

कहा जाता है लोकतंत्र के चार स्तम्भ होते हैं. कार्यपालिका, व्यवस्थापिका, न्यायपालिका और पत्रकारिता. कार्यपालिका और व्यवस्थापिका तो पहले से...

बाबू वीर कुंवर सिंह जाति विशेष के नहीं, बल्कि पूरे हिंदुस्तान के महानायक थे

कभी राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के बहाने भूमिहारों को, तो कभी सम्राट अशोक के बहाने लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) को, तो अब...

आज महान विदुषी और लेखिका मादाम द स्तेल, महान क्रांतिकारी लेनिन और महान जर्मन दार्शनिक एमुअल कांट का जन्मदिन है।...

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