ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

दरख्त

एक पेड़ जो बन गया था दरख्त जिसपर चिड़ियों का था बसेरा , और भी कई जीवों ने डाला हुआ...

रेणु का चुनावी अनुभव : बैलट की डेमोक्रेसी भ्रमजाल है, बदलाव चुनाव से नहीं बंदूक से होगा

रेणु का चुनावी अनुभव : बैलट की डेमोक्रेसी भ्रमजाल है, बदलाव चुनाव से नहीं होगा विष्णु नागर बिहार और पश्चिम...

स्वाद

जैसे लोहे का स्वाद घोड़े से पूछो वैसे ही रोटी का स्वाद भूखे से पूछो छत का स्वाद बेघर से...

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