ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

संभव है

हो सकता है कि इस कविता के आख़िर में तुम्हें कोई पूर्णविराम नहीं मिले हो सकता है कि इस कविता...

‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ यानी भारत-पाक विभाजन

कनक तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ भारत पाक विभाजन को लेकर बहुत-सी भ्रांतियां हैं. लोगों को इतिहास की बातें...

आवाज दो

आवाज दो रात के सघन अंधेरे में आवाज दो हमारे पास कुछ नहीं, आवाज है तुम्हारे पास कुछ नहीं, आवाज...

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