ROHIT SHARMA

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'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

महामारी भाग – 1

पं. किशन गोलछा जैन, ज्योतिष, वास्तु और तंत्र-मंत्र-यन्त्र विशेषज्ञ हमारे देश की वर्तमान जनसंख्या लगभग 133 करोड़ है, जिसमें से...

चुनाव

दोस्तों वह तुष्टिकरण की नीति से तुम्हें धीरे धीरे मार रहा है तुम्हें इस तरह तिल तिल मार कर अपार...

कच्चा माल

जब नफरत है तो नफरत बरकरार रखना तकलीफ सूख चुकी है किनारा मिले न मिले किनारों से किनारा कर लिया...

एंटीबायटिक और प्रोबायटिक दोनों का अनर्गल प्रयोग हमारी स्वास्थ्य के प्रति विवेकान्धता का प्रमाण

बाज़ार का पूरा प्रयास है कि 1 ) ज़्यादा-से-ज़्यादा लोगों को बीमार साबित किया जाए और 2 ) खेत में...

शववाहिनी गंगा

  एक-साथ सब मुर्दे बोले ‘सबकुछ चंगा-चंगा’, सा’ब, तुम्हारे रामराज में शववाहिनी गंगा. ख़तम हुए श्मशान तुम्हारे, ख़तम काष्ठ की...

खंडहरों के बीच

खंडहरों के बीच इंसान को नष्ट किया जा सकता है पराजित नहीं सबसे कम हेमिंगवे कुछ खंडहर पर्यटकों का आकर्षण...

ढपोरशंख

एक मछुआरा समुद्र के किनारे अपने परिवार को लेकर रहता था और जीवन यापन के लिए समुद्र में मछलियां पकड़ता...

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